उदय का क्षण (Uday ka kshan)

कवि: भवानीप्रसाद मिश्र

क) कल की तरह आज भी ………………………………… शीतल किरणें मृत्युंजयी |
१) प्रस्तुत पद्य खंड किस कविता से लिया गया है ? कवि का परिचय दो |
उत्तर: प्रस्तुत पद्य खंड “उदय का क्षण” नामक कविता से लिया गया है | इसके कवि श्री भवानीप्रसाद मिश्र जी हैं | भवानीप्रसादजी ने अपनी कविताओं में गाँधीवादी विचारधारा को नवीन शैली में अभिव्यक्ति दी | इन्होनें प्रकृति की विभिन्न छविओं को सीधी सरल भाषा में रूपांतरित किया | ‘गीतफरोश’, ‘चकित है दुःख’, ‘अँधेरी कवितायेँ’ और ‘बुनी हुई रस्सी’ इनके प्रसिद्द कविता संग्रह हैं | ‘बुनी हुई रस्सी’ काव्य रचना पर इन्हें साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत किया गया |

२) कवि ‘आज भी सूरज निकलेगा’ , इन शब्दों द्वारा क्या बताना चाहते हैं ?
उत्तर: मनुष्य के जीवन में परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं | कभी अच्छा समय तो कभी बुरा समय आता-जाता रहता है | ‘आज भी सूरज निकलेगा’ इन शब्दों द्वारा कवि परिस्थितियों के इस बदलाव की ओर संकेत कर रहे हैं | अभी भले रात है किंतु कुछ समय बाद सूरज निकलेगा और चारों ओर प्रकाश छा जाएगा | इसी तरह भले अभी संकटों के बादल छाए हुए हैं | कोई मार्ग नहीं दिख रहा है किंतु थोड़े समय बाद ही उम्मीदों की किरण इन संकटों के बादल को चीरते हुए आएगी और उनसे बाहर निकलने का मार्ग बताएगी |

३) कवि ने भाग्यवान शब्द किसके लिए प्रयोग किया है ?
उत्तर: सूर्योदय के समय जो जागे हुए होते हैं, जिनकी आँखों पर प्रातः काल की सूर्य किरणें पड़ती हैं, ऐसे व्यक्तियों को कवि भाग्यवान कह रहे हैं | यहाँ कवि कहना चाहते हैं कि जो व्यक्ति दुःख के समय डरकर हिम्मत नहीं हारता है | पुरुषार्थ करना नहीं छोड़ता है व अच्छे अवसर की प्रतीक्षा में रहता है | ऐसे व्यक्ति को जैसे ही मौका मिलता है वो उसका सही उपयोग कर संकट से बाहर निकल आता है और आगे बढ़ जाता है | ऐसा व्यक्ति भाग्यवान है |

४) सूर्य की किरणों को मृत्युंजयी क्यों कहा गया है ?
उत्तर: सूर्य की किरणें पूरे संसार को जीवन देती है | यह सारा संसार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सूर्य के कारण ही जीवित है | सूर्य की किरणें मिलने पर ही पेड़ भोजन बना पाते हैं | उस भोजन का प्रयोग सारे पशु-पक्षी तथा मनुष्य करते हैं | सूर्य ही ऋतु परिवर्तन का कारण तथा प्रकाश और ऊर्जा का श्रोत है | इसलिए कवि सूर्य की किरणों को मृत्युंजयी कहता है |

ख) जब शाम झुरेगी, ………………………………. जीवन की मढ़ती है |
१) शाम के ढलने पर प्रकृति में क्या-क्या परिवर्तन होते हैं ?
उत्तर: शाम ढलते ही चारों ओर अँधियारा छा जाता है | दिन की किरणें चंदा का रूप लेकर आकाश में बिछ जाती हैं अर्थात चाँद आसमान में दिखाई देने लगता है | उसकी चाँदनी पूर्व दिशा की खिड़की से झरकर भाग्यशाली लोगों के बिस्तर पर बिछ जाती हैं | लोग चाँद की शीतल चाँदनी में सुखपूर्वक निद्रा की गोद में चले जाते हैं |

२) कवि उदय-अस्त का क्या अर्थ समझाना चाहता है ?
उत्तर: कवि उदय-अस्त के द्वारा परिस्थितियों की परिवर्तनशीलता मनुष्य को समझा रहे हैं | जिस तरह सूर्य उदय होने के बाद अस्त होता ही है | उसका अस्त होना इस बात को निश्चित कर देता है कि कुछ समय बाद वो दुबारा उदय होगा | उसी प्रकार समय कभी भी एक प्रकार का नहीं रहता | अच्छा समय आता है, उसके कुछ समय बाद बुरा वक्त भी आता है | दोनों में से कोई भी हमेशा के लिए नहीं टिकता | परिवर्तन का यह चक्र ही प्रकृति का नियम है |

३) प्रभात के समय क्या-क्या होता है ?
उत्तर: प्रभात होते ही पूरी प्रकृति आनंदमग्न दिखाई देने लगती है | रात्रि का आलस्य दूर होने लगता है | विश्राम की वजह से पूरे संसार में एक नई स्फूर्ति आ गयी होती है| सूर्य का उदित होना, पक्षियों का चहचहाना, फूलों का खिलना यह सब मिलकर संकेत करने लगते हैं कि मनुष्य को दुबारा अपने काम पर लग जाना चाहिए |

४) “परिवर्तन संसार का नियम है” ऐसा क्यों कहते हैं ?
उत्तर: संसार की प्रत्येक चीज अस्थाई है | चाहे प्रकृति हो या मनुष्य का जीवन, सब कुछ बदलता रहता है | दिन के बाद रात और रात के बाद दिन, यह चक्र चलता रहता है | वर्षा–ग्रीष्म–शीत ये तीनों ऋतुएँ भी क्रमश: आती-जाती रहती हैं | उसी तरह मनुष्य का जीवन भी है | परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं | सुख के बाद दुःख और दुःख के बाद सुख आता जाता रहता है | इसलिए कहा जाता है कि “परिवर्तन संसार का नियम है” |

ग) हर परिवर्तन से प्राण-शक्ति …………………………………. निकलेगा सूरज अभी आज |
१) परिवर्तन से प्राण शक्ति कैसे प्राप्त किया जा सकता है ?
उत्तर: परिवर्तन प्रकृति का अटल व शाश्वत नियम है | दिन के बाद रात तथा रात के बाद दिन लगातार चलता रहता है | मौसम भी लगातार बदलता रहता है | प्रकृति का यह परिवर्तन मानव में नवीन ऊर्जा का संचार करता है | मनुष्य के थके हुए शरीर को विश्राम देकर उसमें प्राण शक्ति का संचार करता है | परिवर्तन एक नई शुरुआत का संकेत होता है | यदि मनुष्य उस परिवर्तन को स्वीकार करने के लिए तैयार हो, तो वह उससे नई शक्ति प्राप्त कर सकता है |

२) किस स्थिति में कवि सारे सृष्टि को व्यर्थ मानता है ?
उत्तर: कवि कह रहे हैं कि यदि उदय के क्षण का स्वागत करने के लिए कवि उल्लास गीत नहीं गाये तो सारी सृष्टि व्यर्थ है | इन शब्दों द्वारा कवि संकेत कर रहे हैं कि मनुष्य जीवन में कई परिवर्तन के क्षण आते रहते हैं | परिस्थितियाँ लगातार बदलती रहती है | यदि मनुष्य इन परिवर्तनों का प्रसन्नतापूर्वक स्वागत न करे तो उसके लिए यह सारा संसार व्यर्थ है |

३) कवि अपने मन को क्या समझा रहा है ?
उत्तर: कवि अपने मन को समझा रहा है कि उसे उदय के काल में मौन नहीं रहना चाहिए | यहाँ उदय के काल का अर्थ है परिवर्तन का क्षण | कवि इस क्षण को एक नए अवसर के रूप में देखता है | अँधियारा अर्थात बुरा समय समाप्त होने को है तथा अच्छा समय आनेवाला है | इसलिए परिवर्तन के क्षण का स्वागत करना चाहिए | ऐसा कवि अपने मन को समझा रहे हैं |

४) कवि इस पद्यखंड द्वारा क्या प्रेरणा दे रहे हैं ?
उत्तर: कवि इस पद्यखंड द्वारा मनुष्य को नए परिवर्तन के प्रति आस्था रखने की प्रेरणा दे रहे हैं | कवि के अनुसार परिस्थितियाँ बदलती रहती है | आज यदि समय बुरा है तो कल अच्छा आएगा | मनुष्य को निराश होकर भविष्य से उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए | हर आनेवाले परिवर्तन को एक नए अवसर के तौर पर देखना चाहिए | आशावान व्यक्ति ही जीवन में प्रगति कर सकता है |

केंद्रीय भाव :
प्रस्तुत कविता ‘उदय का क्षण’ द्वारा कवि प्रकृति सौंदर्य का वर्णन करते हुए मनुष्य को आशावादी बने रहने की प्रेरणा देते हैं | हर अँधेरी रात के बाद एक मनोरम सुबह आती है | सारा संसार उस सुबह का प्रसन्नता से स्वागत करता है |
मनुष्य को भी अपने बुरे वक्त में आशावादी होना चाहिए | दुःख के बाद सुख तथा सुख के बाद दुःख आता जाता रहता है | समय बुरा चल रहा हो तो भी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए | आनेवाला समय अपने साथ एक नया अवसर लेकर आता है | उस अवसर का सदुपयोग करने के लिए मनुष्य को तैयार रहना चाहिए |

अतिरिक्त प्रश्न
१) भविष्य के प्रति आशावान होना क्यों आवश्यक है ?
उत्तर: मनुष्य का समय बदलता रहता है | कभी अच्छा तो कभी बुरा आता जाता रहता है | बुरे समय में ह्रदय को दृढ़ करके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए योजना बनानी चाहिए | भविष्य के प्रति आशावान व्यक्ति ही, आए हुए अवसर का सही इस्तेमाल कर आगे बढ़ सकता है | अवसर भविष्य के गर्भ में छुपे होते हैं, जो बताकर नहीं आते | आशावादी व्यक्ति ही ऐसे अवसरों की अपेक्षा कर तैयारी में रह सकता है | निराशावादी व्यक्ति आए हुए अवसरों को न समय रहते पहचान पाता है, न उनका फायदा उठा पाता है | इसलिए मनुष्य को भविष्य के प्रति आशावान होना चाहिए |

२) परिवर्तन से न घबराकर उसका स्वागत करना चाहिए | इस विषय में अपने विचार लिखिए |
उत्तर: कहा जाता है परिवर्तन प्रकृति का नियम है | ऐसे में परिवर्तनों से घबराकर जीवन में आगे बढ़ना तो बहुत मुश्किल है | हम चाहे न चाहे, हमारे चारों ओर की प्रकृति, समाज तथा परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं | कुछ लोग हर नए परिवर्तन से घबरा जाते हैं | देश में जब पहली बार रेलगाड़ी आई थी, तब भी लोग घबरा गए थे क्योंकि रेल उनके लिए एक नई और अनजानी चीज थी | उसी रेल ने आज देश का चेहरा बदल दिया है | ऐसे कई और उदाहरण हैं | इसलिए मनुष्य को कभी भी परिवर्तन से घबराना नहीं चाहिए | हो सकता है नया परिवर्तन उसके लिए सुख का संदेश लेता आए |

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