सम्मिलित (Sammilit)

कवि: सियारामशरण गुप्त

क) चलो-चलो, इस अमलतास के …………. परस्पर की माया है |
१) प्रस्तुत पद्य खंड किस कविता से लिया गया है ? कवि का परिचय दीजिये |
उत्तर: प्रस्तुत पद्य खंड सम्मिलित नामक कविता से लिया गया है | इसके कवि श्री सियारामशरण गुप्त हैं | ये राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के अनुज थे | इनकी कृतियों में इनका सरल तथा विनयशील व्यक्तित्व स्पष्ट प्रतिबिंबित हुआ है | इनके काव्य में प्राचीन के प्रति आस्था तथा नवीन के प्रति उत्साह लक्षित है | ‘मौर्या विजय’, ‘आद्रा’, ‘पाथेय’, ‘आत्मोत्सर्ग’, ’मृणमयी’, ‘बापू’, ‘उन्मुक्त’ तथा ‘नकुल’ इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं |

२) कवि को क्या करने से मना किया जा रहा है ?
उत्तर: कवि को सुनसान जंगल में आम और अमलतास के दो सुंदर वृक्ष दिखे | वृक्षों की सुंदरता ने कवि की आँखों को तृप्त कर दिया | कवि जैसे ही उन पेड़ों की ओर बढ़ा, तभी किसी ने कहा कि उसे अमलतास के फूल को नहीं तोड़ना चाहिए, न ही उन रसीले आमों को तोड़ने की सोचना चाहिए |

३) कवि आश्चर्यचकित क्यों था ?
उत्तर: कवि एक सुनसान वन में था, जहाँ उसे आम तथा अमलतास के दो वृक्ष दिखे | दोनों वृक्ष बहुत सुंदर थे | उनकी सुंदरता देखकर कवि की आँखें तृप्त हो गयी | कवि इस बात पर आश्चर्यचकित था कि इस विरल जंगल में इतने सुंदर वृक्ष कैसे उग आये !

४) दोनों पेड़ किस प्रकार एक दूसरे से मिले हुए थे ?
उत्तर: अमलतास का पेड़ फूलों से भरा हुआ था, आम के पेड़ पर भी खूब सारे आम लगे थे | दोनों की डालियाँ एक दूसरे से इस तरह लिपटी हुई थी | ऐसा लगता था जैसे अमलतास का पेड़ आम के वृक्ष को अपने फूल भेंट में दे रहा हो तथा आम का वृक्ष अपने फल भेंट कर रहा हो | दोनों वृक्ष एक दूसरे की छाया में आनंद से थे | उन दोनों की परछाई इस तरह से मिली हुई थी कि देखकर लगता था दोनों एक ही वृक्ष है |

ख) किन्तु बताया गया मुझे ……………………… यहाँ दिन रात विचरती |
१) कवि को उस भूमि खंड की क्या कहानी सुनाई गयी ?
उत्तर: लोगों ने कवि को उस स्थान की १० वर्ष पुरानी कथा सुनाई | दो भाई उस जमीन पर अपना-अपना अधिकार जता रहे थे | धीरे-धीरे दोनों के बीच मनमुटाव बढ़ गया | एक दिन दोनों आपस में लड़ पड़े तथा शस्त्रों से एक दूसरे को मार डाला | दोनों का रक्त से लहूलुहान शरीर उसी धरती पर गिरा था | उस भूमि ने दोनों भाईयों का रक्त पिया था |

२) उस धरती को शापित क्यों कहा गया है ?
उत्तर: दो भाई उस भूमि के टुकडे पर अपना-अपना अधिकार दिखा रहे थे | धीरे-धीरे उनमें वैरभाव बढ़ता गया | शत्रुता इतनी बढ़ गयी कि दोनों भाइयों ने एक दूसरे को मार डाला | दोनों का रक्त से लहूलुहान शरीर उसी धरती पर गिरा था | उस भूमि ने दोनों भाईयों का रक्त पिया था | इसलिए कवि ने उस धरती को शापित कहा है |

३) दोनों भाइयों में लड़ाई क्यों हो गयी ?
उत्तर: जमीन के एक टुकडे को लेकर दोनों भाइयों के मन में लालच आ गया | दोनों उस पर अपना-अपना अधिकार दिखाने लगे | एक ने कहा “इस जमीन पर मेरा अधिकार है” तो दूसरे ने कहा “तू कौन है ? और यहाँ तेरा क्या है ?” धीरे-धीरे झगड़ा बढ़ता गया और एक समय ऐसा आया कि दोनों ने शस्त्रों से एक दूसरे की हत्या कर दी |

४) कलह-प्रेत की मूर्ति के विचरने का क्या अर्थ है ?
उत्तर: दो भाईओं के बीच में नैसर्गिक रूप से प्रेम होता है | भूमि के एक टुकडे की वजह से उनमें शत्रुता हो गयी | दोनों ने एक दूसरे को मार डाला | उनका रक्त धरती के जिस भाग पर पड़ा था वहाँ वर्ष भर के भीतर दो नए अंकुर फूट पड़े, जो बड़े होकर आम तथा अमलतास के पेड़ बन गए | इसलिए कहा जाता है कि वह धरती शापित है तथा उन दो पेड़ों के रूप में कलह-प्रेत की मूर्ति आज भी वहाँ विचर रही है |

५) कवि को अमलतास का फूल तोड़ने को क्यों मना किया जा रहा था ? अथवा
कवि को आम की ममता छोड़ने को क्यों कहा जा रहा था ?
उत्तर: जिस भूमि पर आम तथा अमलतास के पेड़ उगे थे , उस भूमि के लालच में दो भाइयों ने एक दूसरे की हत्या कर दी थी | उन का रक्त से सना हुआ शरीर भूमि के जिस टुकड़े पर पड़ा था, वहीं वर्ष भर बाद यह दोनों पेड़ उगे थे | दोनों पेड़ आपस में इस तरह लिपटे थे मानों वे आपस में भाई हो | लोग दोनों पेड़ों को भाइयों के बीच शत्रुता का प्रतीक मानने लगे थे | उन्हें लगता कि इन दोनों पेड़ों के फूलों तथा फलों को जो उपयोग में लाएगा उसके मन में भी शत्रुता के भाव जगने लगेंगे | इसलिए कवि को अमलतास के फूल तोड़ने तथा रसीले आमों की ममता छोड़ने को कहा गया है |

ग) कलह-प्रेत की मूर्ति ! ……………………… इन्हीं पत्तों सा झूमूँ |
१) धरती के प्रेम-तीर्थ में पावन होने का क्या अर्थ है ?
उत्तर: धरती के लिए मनुष्य ने कितनी लडाईयाँ लड़ी | उसे टुकड़ों में बाँटा | इस हिंसा के बावजूद धरती अब तक अखंडित है | वह हमेशा नित नए फूलों व फलों से सज्जित रहती है | धरती मनुष्य के विष-वैर को शांति से पी जाती है | इसके बदले वह उसे अमृत लौटाती है | मनुष्य की आपसी घृणा का उसपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता | वह हमेशा अपना मातृवत प्रेम बनाए रखती है | इसलिए कवि मनुष्य को धरती के प्रेम तीर्थ में पावन होने को कहता है | मनुष्य को धरती से प्रेरणा लेकर आपसी द्वेष भुलाकर हमेशा प्रेमवत व्यवहार करना चाहिए |

२) प्रेम-प्रियता के ऋण में कौन, किसको व कैसे बाँध रहा है ?
उत्तर: प्रेम-प्रियता के ऋण में धरती माता मनुष्य को बाँध रही है | मनुष्य आपसी लड़ाई कभी नहीं भूलता, मन में शत्रुता बनाए रखता है | धरती माता उस सारी घृणा को पी जाती है तथा मनुष्य को जीवन जीने के लिए अनगिनत प्राकृतिक उपहार देती है | वह अपनी छाती पर उगे पेड़ों-पत्तों, घास के तिनकों से मनुष्य को अपने प्रेम-प्रियता के ऋण में बाँध रही है |

३) कवि क्या अभिलाषा व्यक्त कर रहा है ?
उत्तर: कवि धरती माता से अपनी अभिलाषा प्रकट करते हुए कहता है कि “यह पूरा मानव समाज जो आपसी शत्रुता के कारण कलंकित है, वह आपकी गोद में आकर निष्कलंक हो जाता है | मैं भी निर्भय होकर आपकी गोद में जो पेड़ पौधे हैं उनके नीचे घूमूँ, तथा उनके फूलों एवं फलों को लेकर पत्तों की तरह आनंदमग्न रहूँ |”

४) स्वजन-स्वजन के वैर पंक से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: धन, संपत्ति, भूमि आदि के कारण आज भाइयों, बंधुओं एवं रिश्तेदारों में वैरभाव बढ़ता जा रहा है | दिन ब दिन रिश्तों की अहमियत कम होती जा रही है | प्रेम का स्थान लालच ने ले लिया है | आज धन-संपत्ति को ही मनुष्य अपना मित्र मानता है | सारे पारिवारिक रिश्ते , मित्रता भी धन के तराजू में ही तोले जा हैं | इसलिए कवि लिख रहे हैं कि आजकल स्वजनों के बीच भी आपस में वैर का कीचड फ़ैल गया है |

प्र१६ मेरा मन तो हरा हो गया ………………………………. परस्पर कि माया है | (ICSE 2015)
१) ‘मेरा मन तो हरा हो गया’ से कवि का क्या तात्पर्य है ? कवि का मन हरा क्यों हो गया था ?
उत्तर: यहाँ मन के हरा होने का तात्पर्य है मन का प्रसन्न होना | कवि एक सुनसान वन में था, जहाँ उसे आम तथा अमलतास के दो वृक्ष दिखे | दोनों वृक्ष बहुत सुंदर थे | उनकी सुंदरता देखकर कवि की आँखें तृप्त हो गयी | कवि इस बात पर आश्चर्यचकित था कि इस विरल जंगल में इतने सुंदर वृक्ष कैसे उग आये ! कवि ने इसी बात को काव्यात्मक तरीके से लिखा है कि दोनों वृक्षों को देखकर उसका मन हरा हो गया |

२) कौन भेंट रहे हैं ? कविता के सन्दर्भ में स्पष्ट कीजिये |
उत्तर: कवि एक सुनसान वन में था, जहाँ उसे आम तथा अमलतास के दो वृक्ष दिखे | अमलतास का पेड़ फूलों से भरा हुआ था, आम के पेड़ पर भी खूब सारे आम लगे थे | दोनों की डालियाँ एक दूसरे से इस तरह लिपटी हुई थी कि ऐसा लगता था जैसे अमलतास का पेड़ आम के वृक्ष को अपने फूल भेंट में दे रहा हो तथा आम का वृक्ष अपने फल भेंट कर रहा हो | दोनों वृक्ष एक दूसरे की छाया में आनंद से थे | उन दोनों की परछाई इस तरह से मिली हुई थी कि देखकर लगता था दोनों एक ही वृक्ष है | किंतु उसी भूमि के एक टुकडे की वजह से दो भाइयों में शत्रुता हो गयी | दोनों ने एक दूसरे को मार डाला | उनका रक्त धरती के जिस भाग पर पड़ा था वहाँ वर्ष भर के भीतर दो नए अंकुर फूट पड़े, जो बड़े होकर आम तथा अमलतास के पेड़ बन गए | इसलिए वो आम और अमलतास का मिलन वास्तव में दोनों भाईओं का मिलन है |

प्र.३ ‘छाया भी अविभिन्न परस्पर की माया है |’ पंक्ति का भावार्थ लिखिए | कवि ने उक्त पंक्ति के द्वारा क्या संकेत दिया है ?
उत्तर: कवि एक सुनसान वन में था, जहाँ उसे आम तथा अमलतास के दो वृक्ष दिखे | अमलतास का पेड़ फूलों से भरा हुआ था, आम के पेड़ पर भी खूब सारे आम लगे थे | दोनों की डालियाँ एक दूसरे से इस तरह लिपटी हुई थी कि ऐसा लगता था जैसे अमलतास का पेड़ आम के वृक्ष को अपने फूल भेंट में दे रहा हो तथा आम का वृक्ष अपने फल भेंट कर रहा हो | दोनों वृक्ष एक दूसरे की छाया में आनंद से थे | उन दोनों की परछाई इस तरह से मिली हुई थी कि देखकर लगता था दोनों एक ही वृक्ष है | इसलिए कवि दोनों वृक्षों की छाया को अविभिन्न कह रहे हैं | कवि के अनुसार यह इस बात का संकेत है कि दोनों वृक्ष का आपस में कोई संबंध है जैसे वो लंबे समय से एक दूसरे से जुड़े हों |

केंद्रीय भाव :
प्रस्तुत कविता ‘सम्मिलित’ में कवि सियारामशरण गुप्त भौतिक संपत्तियों के कारण मनुष्यों में होने वाले संघर्ष की ओर इशारा कर रहे हैं | धन, संपत्ति, भूमि के लालच में भाई-भाई भी एक दूसरे के रक्त के प्यासे हो जाते हैं | भूमि के लिए अनगिनत बार लड़ाई हो चुकी है | कवि चाहते हैं कि जिस भूमि के कारण इतना वैर भाव फैला है, मनुष्य को उसी धरती से सीख लेनी चाहिए | जिस प्रकार धरती सारा कूड़ा-कचरा, जहर लेकर भी मनुष्यों को फलों व फूलों से लदे हरे-भरे वृक्ष ही देती है | उसी प्रकार मनुष्य को भी शत्रुता की भावना भूलकर संसार में प्रेम से रहना चाहिए |

अतिरिक्त प्रश्न
१) इस कविता के माध्यम से कवि ने क्या पाठ पढाया है ?
उत्तर: प्रस्तुत कविता ‘सम्मिलित’ के माध्यम से कवि सियारामशरण गुप्त जी ने प्रेम, अहिंसा और सहानुभूति का पाठ पढाया है | एक भूमि खंड को लेकर दो भाइयों में झगडा हुआ तथा दोनों लड़ाई में मारे जाते हैं | जहाँ दोनों मरे थे, उस स्थान पर दो हरे-भरे लहलहाते हुए वृक्ष खड़े हो गए हैं जो आपस में गले मिलते हुए प्रतीत होते हैं | वे मानों कहते हैं कि हमें अपने झगड़ों में न पड़कर पारस्परिक सद्भाव से रहना चाहिए |

२) भौतिक वस्तुओं का लालच मनुष्य के रिश्तों में दरार डाल रहा है | इसपर अपने विचार लिखिए |
उत्तर: मनुष्य का सांसारिक वस्तुओं की तरफ आकर्षण दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है | लोग ज्यादा से ज्यादा धन, संपत्ति, भूमि प्राप्त करना चाहते हैं | भौतिक वस्तुओं को प्राप्त कर उनसे सुख भोगने की इच्छा मनुष्य में बहुत ज्यादा बढ़ गयी है | वह इसके लिए रिश्तों नातों तक का त्याग कर देता है | संपत्ति के लिए भाई-भाई से, पिता-पुत्र से लड़ने लगा है | पारस्परिक प्रेम का स्थान पैसे के प्रति प्रेम ने ले लिया है | भौतिक वस्तुओं के लालच ने रिश्तों में दरार डाल दी है |

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