राम-सुग्रीव-मैत्री (Ram Sugriv Maitri)

कवि : तुलसीदास

क) आगे चले बहुरि रघुराया ………………………………….. लीन्ह मनुज अवतार ||
१) ऋष्यमूक पर्वत पर कौन रह रहा था ?
उत्तर: ऋष्यमूक पर्वत पर किष्किंधा के राजा बालि का भाई सुग्रीव अपने मंत्रिओं तथा सहायकों के साथ रहता था | उसके भाई बालि ने उसे पीटकर राज्य से निकाल दिया था व उसकी पत्नी छीन ली थी | वह सुग्रीव के प्राणों का प्यासा था | उसके क्रोध और बल से सुग्रीव बहुत डरता था | सिर्फ ऋष्यमूक पर्वत ही ऐसी जगह थी जहाँ सुग्रीव स्वयं को सुरक्षित समझता था क्योंकि मतंग ऋषि के श्राप से बालि ऋष्यमूक पर्वत पर कदम नहीं रख सकता था |

२) राम तथा लक्ष्मण को ऋष्यमूक पर्वत की ओर आता देखकर सुग्रीव की क्या दशा हुई ? उन्होंने हनुमानजी से क्या कहा ?
उत्तर: राम तथा लक्ष्मण को ऋष्यमूक पर्वत की ओर आता देखकर सुग्रीव भयभीत हो गए | उन्हें संदेह हुआ कि कहीं उसे मारने के लिए दोनों को बालि ने तो नहीं भेजा है ? उन्होंने हनुमानजी से कहा “तुम ब्रह्मचारी का रूप लेकर जाओ तथा यह पता लगाओ कि यह दोनों सुंदर तथा शक्तिशाली पुरुष कौन हैं ? दोनों के बारे में पता लगाकर मुझे संकेत द्वारा बता देना | यदि बालि ने दोनों को भेजा है तो मैं तत्काल इस स्थान का त्याग कर दूँगा तथा कहीं और चला जाऊँगा |”

३) हनुमानजी ने दोनों युवकों से क्या प्रश्न किये ? उस समय उन्होंने कौन सा रूप धारण किया था ?
उत्तर: हनुमानजी ब्राह्मण का रूप बनाकर श्री राम तथा लक्ष्मण के पास गए तथा उनसे पूछा “आप दोनों गोरे और श्याम वर्ण वाले कौन हैं जो इस वन में क्षत्रिय का रूप धारण करके घूम रहे हैं ? आपके पैर कोमल हैं | आप किस उद्देश्य से वन में फिर रहे हैं ? आपका शरीर सुंदर और कोमल है | आप वन की इस कठोर वायु को क्यों सहन कर रहे हैं ? क्या आप तीनों देवों ब्रह्मा, विष्णु या महेश में से कोई हैं ? या आप नर तथा नारायण हैं ? क्या आप इस धरती के भार को कम करने आये हो या संसार को पार लगाने आये हो ? क्या आप स्वयं ईश्वर हो जिन्होंने मनुष्य का अवतार लिया हुआ है ?”

४) “स्यामल गौर सरीरा” से यहाँ क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: “स्यामल गौर सरीरा” का प्रयोग भगवान् श्रीराम तथा लक्ष्मण के लिए किया गया है | भगवान श्रीराम साँवले रंग के थे, इसलिए कवि तुलसीदासजी ने उनके लिए स्यामल शब्द का प्रयोग किया है | लक्ष्मणजी गोरे रंग के थे | उनके लिए कवि ने गौर शब्द का प्रयोग किया है | स्यामल गौर सरीरा का अर्थ है श्रीराम तथा लक्ष्मण का शरीर साँवले तथा गोरे रंग का था |

ख) कोसलेस दशरथ के जाए ……………………………… रूप स्वामि भगवंत ||
१) दोनों युवक कौन थे ? वे वन में क्यों भटक रहे थे ?
उत्तर: दोनों युवक कोसल के राजा दशरथ के पुत्र श्रीराम तथा लक्ष्मण थे | पिता की आज्ञा मानकर दोनों चौदह वर्ष के वनवास पर आये थे | उनके साथ श्रीराम की पत्नी सीता भी थी | राक्षसों के राजा रावण ने सीताजी का अपहरण कर लिया था | उन्हें ही खोजने श्रीराम तथा लक्ष्मण वन-वन भटक रहे थे |

२) भगवान राम को पहचानते ही हनुमानजी की क्या दशा हुई ?
उत्तर: भगवान श्रीराम को पहचानते ही हनुमानजी उनके चरणों में गिर गए | उन्हें अपार आनंद हो रहा था | उनके सुख का वर्णन नहीं किया जा सकता | वे इतने प्रसन्न थे कि बोल भी नहीं पा रहे थे | वो प्रभु श्रीराम के वेश को देखते रह गए | पुनः धैर्य धारण करके उन्होंने प्रभु श्रीराम की स्तुति की | अपने स्वामी को पहचान लेने के कारण उनके ह्रदय में अपार आनंद था |

३) प्रभु श्रीराम ने हनुमानजी के प्रति अपना प्रेम कैसे प्रकट किया ?
उत्तर: हनुमानजी भगवान श्रीराम के चरणों में पड़े थे | प्रभु श्रीराम ने उन्हें उठाकर अपने गले से लगा लिया | हनुमानजी को गले लगाते प्रभु श्रीराम की आँखों में आनंद के आँसू आ गए | उन्होंने हनुमानजी से कहा “वानर होने की वजह से मन में कोई दुःख नहीं लाना | तुम मुझे लक्ष्मण से दुगुने प्रिय हो | लोग मुझे समदर्शी कहते हैं किंतु मेरा सेवक मुझे अधिक प्रिय है |”

४) अनन्य भक्ति किस प्रकार की होती है ?
उत्तर: जिस भक्त की बुद्धि इस बात पर स्थिर रहती है कि यह पूरा संसार मेरे भगवान का ही रूप है तथा मैं उनका सेवक हूँ, उसकी भक्ति ही अनन्य भक्ति होती है |

ग) देखि पवनसुत पति अनुकूला | …………………………. जोरी प्रीति दृढ़ाई ||
१) हनुमानजी क्यों प्रसन्न हो गए ?
उत्तर: भगवान श्रीराम को पहचानते ही हनुमानजी उनके चरणों में गिर गए | प्रभु ने उन्हें उठाकर अपने गले लगा लिया | प्रभु श्रीराम ने हनुमानजी से कहा कि वो उन्हें लक्ष्मण से भी दुगुने प्रिय है | हनुमानजी ने जब देखा कि भगवान श्रीराम उनसे प्रसन्न हैं तो उनके ह्रदय में आनंद छा गया | उनके सारे कष्ट दूर हो गए |

२) हनुमानजी ने प्रभु श्रीराम से क्या प्रार्थना की ?
उत्तर: हनुमानजी ने प्रभु श्रीराम को सुग्रीव के बारे में बताया, जो अपने भाई बालि के भय से ऋष्यमूक पर्वत पर रह रहे थे | हनुमानजी ने भगवान से प्रार्थना की कि वह सुग्रीव से मित्रता करे व उसे बालि के भय से मुक्त करे | वह चारों दिशाओं में करोड़ों वानरों को भेजकर माता सीता का पता लगाएगा |

३) प्रभु श्रीराम को देखकर सुग्रीव की क्या प्रतिक्रिया थी ?
उत्तर: हनुमानजी ने सुग्रीव को प्रभु श्रीराम तथा लक्ष्मण से मिलाया | भगवान श्रीराम को देखकर सुग्रीव ने अपना जीवन धन्य माना | उन्होंने आदर के साथ भगवान के चरणों में अपना माथा टेका | सुग्रीव जी मन में सोच रहे थे कि “मैं तो एक साधारण वानर हूँ, क्या भगवान मुझसे प्रीति करेंगे ?”

४) सुग्रीव तथा प्रभु श्रीराम में मित्रता किस प्रकार हुई ?
उत्तर: हनुमानजी ने भेष बदल कर भगवान श्रीराम तथा लक्ष्मण का परिचय लिया | प्रभु श्रीराम भी हनुमानजी को देखकर बहुत प्रसन्न हुए | हनुमानजी ने उन्हें सुग्रीव से मित्रता करने और उसे अभयदान देने की प्रार्थना की | भगवान श्रीराम सुग्रीव से मिले | सुग्रीव ने भगवान के चरणों पर माथा टेका पर सोच रहे थे कि “मैं इनसे मित्रता का निर्वाह कैसे कर पाउँगा ?” उस समय हनुमानजी ने अग्नि को साक्षी बनाकर प्रभु श्रीराम तथा सुग्रीव में मित्रता करा दी |

प्र.१५ आगे चले बहुरि रघुराया ……………………………………. नर नारायन की तुम्ह दोऊ | (ICSE 2015)
१) सुग्रीव किस पर्वत पर, किसके साथ व क्यों रहता था ?
उत्तर: सुग्रीव ऋष्यमूक पर्वत पर अपने मंत्रिओं तथा सहायकों के साथ रहता था | उसके भाई बालि ने उसे पीटकर राज्य से निकाल दिया था व उसकी पत्नी छीन ली थी | वह सुग्रीव के प्राणों का प्यासा था | बालि के क्रोध और बल से सुग्रीव बहुत डरता था | सिर्फ ऋष्यमूक पर्वत ही ऐसी जगह थी जहाँ सुग्रीव स्वयं को सुरक्षित समझता था क्योंकि मतंग ऋषि के श्राप से बालि ऋष्यमूक पर्वत पर कदम नहीं रख सकता था |

२) सुग्रीव क्या देखकर भयभीत हो गए थे ? उन्होंने हनुमान जी से क्या कहा ?
उत्तर: राम तथा लक्ष्मण को ऋष्यमूक पर्वत की ओर आता देखकर सुग्रीव भयभीत हो गए | उन्हें संदेह हुआ कि कहीं उसे मारने के लिए दोनों को बालि ने तो नहीं भेजा है ? उन्होंने हनुमानजी से कहा “तुम ब्रह्मचारी का रूप लेकर जाओ तथा यह पता लगाओ कि यह दोनों सुंदर तथा शक्तिशाली पुरुष कौन हैं ? दोनों के बारे में पता लगाकर मुझे संकेत द्वारा बता देना | यदि बालि ने दोनों को भेजा है तो मैं तत्काल इस स्थान का त्याग कर दूँगा तथा कहीं और चला जाऊँगा |”

३) बालि कौन था ? वह ऋष्यमूक पर्वत पर क्यों नहीं जाता था ? उससे सुग्रीव क्यों भयभीत थी ?
उत्तर: बालि किष्किंधा का राजा था | वह एक महान पराक्रमी वानर था | उसे वरदान मिला था कि जो कोई युद्ध में उसके सामने आएगा उसका आधा बल बालि में आ जायेगा | इस कारण वह युद्ध में अजेय हो गया था |
उसे सिर्फ ऋष्यमूक पर्वत से भय था | महर्षि मतंग ने बालि को शाप दिया था कि यदि वह उनके आश्रम के पास एक योजन की दूरी तक आयेगा तो मर जायेगा। मतंग ऋषि का आश्रम ऋष्यमूक पर्वत पर स्थित था, अत: बालि वहाँ नहीं जा सकता था |
मायावी नामक असुर एक रात किष्किन्धा आया और बालि को द्वंद्व के लिए ललकारा | बालि उस असुर के पीछे भागा । साथ में सुग्रीव भी उसके साथ था। भागते-भागते मायावी ज़मीन के नीचे बनी एक कन्दरा में घुस गया। बालि भी उसके पीछे-पीछे गया । जाने से पहले उसने सुग्रीव को यह आदेश दिया कि जब तक वह मायावी का वध कर लौटकर नहीं आता, तब तक सुग्रीव उस कन्दरा के मुहाने पर खड़ा होकर पहरा दे। एक वर्ष से अधिक अन्तराल के पश्चात कन्दरा के मुहाने से रक्त बहता हुआ बाहर आया। सुग्रीव ने असुर की चीत्कार तो सुनी परन्तु बालि की नहीं। यह समझकर कि उसका भाई युद्ध में मारा गया, सुग्रीव ने उस कन्दरा के मुँह को एक शिला से बन्द कर दिया और वापस किष्किन्धा आ गया | जहाँ उसने यह समाचार सबको सुनाया । मंत्रियों ने सलाह कर सुग्रीव का राज्याभिषेक कर दिया। कुछ समय पश्चात बालि प्रकट हुआ और अपने अनुज को राजा देख बहुत कुपित हुआ । उसे अपने भाई सुग्रीव पर संदेह हो गया कि वह उसका राज्य हड़पना चाहता है | उसने सुग्रीव को पीटकर राज्य से निकाल दिया व उसकी पत्नी छीन ली | वह सुग्रीव के प्राणों का प्यासा था | उसके क्रोध और बल से सुग्रीव बहुत डरता था |

४) सुग्रीव ने हनुमान से क्या कहा ? हनुमान ने सुग्रीव की आज्ञा का पालन किस प्रकार किया तथा उन्होंने आगंतुक से क्या प्रश्न पूछे ?
उत्तर: राम तथा लक्ष्मण को ऋष्यमूक पर्वत की ओर आता देखकर सुग्रीव भयभीत हो गए | उन्हें संदेह हुआ कि कहीं उन्हें मारने के लिए दोनों को बालि ने तो नहीं भेजा है ? उन्होंने हनुमानजी से कहा “तुम ब्रह्मचारी का रूप लेकर जाओ तथा यह पता लगाओ कि यह दोनों सुंदर तथा शक्तिशाली पुरुष कौन हैं ? दोनों के बारे में पता लगाकर मुझे संकेत द्वारा बता देना | यदि बालि ने दोनों को भेजा है तो मैं तत्काल इस स्थान का त्याग कर दूँगा तथा कहीं और चला जाऊँगा |”
हनुमानजी ने सुग्रीव की आज्ञा का पालन करते हुए ब्राह्मण का रूप बनाया व श्री राम तथा लक्ष्मण के पास गए | उन्होंने उनसे पूछा “आप दोनों गोरे और श्याम वर्ण वाले कौन हैं जो इस वन में क्षत्रिय का रूप धारण करके घूम रहे हैं ? आपके पैर कोमल हैं | आप किस उद्देश्य से वन में फिर रहे हैं ? आपका शरीर सुंदर और कोमल है | आप वन की इस कठोर वायु को क्यों सहन कर रहे हैं ? क्या आप तीनों देवों ब्रह्मा, विष्णु या महेश में से कोई हैं ? या आप नर तथा नारायण हैं ? क्या आप इस धरती के भार को कम करने आये हो या संसार को पार लगाने आये हो ? क्या आप स्वयं ईश्वर हो जिन्होंने मनुष्य का अवतार लिया हुआ है ?”

अतिरिक्त प्रश्न
१) प्रस्तुत पद्यांश किस रचना से लिया गया है ? इसमें किस घटना का वर्णन है ?
उत्तर: प्रस्तुत पद्यांश तुलसीदासजी द्वारा रचित ‘रामचरितमानस’ के किष्किन्धा काण्ड से लिया गया है | इस खंड में भगवान राम की हनुमान से भेंट, सुग्रीव से भगवान श्रीराम का परिचय तथा उनके परस्पर मित्रता-सूत्र में बँधने का वर्णन है |

२) राम-सुग्रीव की मैत्री आदर्श मैत्री थी | इस विषय में अपने विचार लिखिए |
उत्तर: जब मनुष्य का समय अच्छा हो तो उस समय बहुत मित्र बनते हैं किंतु सच्ची मित्रता की परीक्षा बुरे समय में होती है | राम तथा सुग्रीव में जिस समय मैत्री हुई, उस समय दोनों संकट में थे | एक तरफ रावण ने माता सीता का हरण कर लिया था तो दूसरी तरफ बालि सुग्रीव का वध करना चाहता था | भगवान राम ने बालि जैसे बलशाली शत्रु का वध करके सुग्रीव को राजा बनाया | सुग्रीव ने भी राक्षसों के राजा रावण को परास्त कर माता सीता को वापस लाने में भगवान राम की पूरी सहायता की | इस प्रकार एक दूसरे का संकट दूर करते हुए मैत्री का निर्वाह करनेवाले राम-सुग्रीव आदर्श मित्रता के प्रतीक थे |

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