परीक्षा (Pariksha)

लेखक: प्रेमचंद

(क) इस विज्ञापन ने सारे मुल्क में हलचल मचा दी |
(१) किस विज्ञापन ने हलचल मचा दी थी?
उत्तर: रियासत देवगढ़ के दीवान सरदार सुजान सिंह बूढ़े हो चुके थे | वे राज-काज संभालने की जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहते थे | महाराज के बहुत प्रार्थना करने पर भी न मानें | अतः महाराज ने नया दीवान चुनने की जिम्मेदारी उन्हें ही दे दी | अगले दिन देश के प्रसिद्ध समाचारपत्रों में यह विज्ञापन निकला कि देवगढ़ के लिए एक सुयोग्य दीवान की जरूरत है | इस विज्ञापन ने पूरे देश में हलचल मचा दी |

(२) विज्ञापन में दीवान पद के उम्मीदवार बनने के लिए कौन सी शर्तें थी ?
उत्तर: सरदार सुजान सिंह ने देश के प्रसिद्ध समाचारपत्रों में यह विज्ञापन दिया कि रियासत देवगढ़ के लिए एक सुयोग्य दीवान की जरूरत है | दीवान पद के उम्मीदवार का ग्रेजुएट होना जरूरी नहीं पर हृष्ट-पुष्ट होना आवश्यक है | मंदाग्नि के मरीज को उम्मीदवार बनने से मना कर दिया गया था | उम्मीदवार की विद्या को कम परन्तु कर्तव्य को अधिक महत्व दिया जानेवाला था | जो सरदार सुजान सिंह की परीक्षा में खरा उतरेगा, वही दीवान का पद पायेगा |

(३) विज्ञापन का क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर: सरदार सुजान सिंह ने देश के प्रसिद्ध समाचारपत्रों में यह विज्ञापन दिया कि रियासत देवगढ़ के लिए एक सुयोग्य दीवान की जरूरत है | विज्ञापन ने सारे देश में हलचल मचा दी | देवगढ़ में नये-नये और रंग-बिरंगे मनुष्य दिखाई देने लगे | प्रत्येक रेलगाड़ी से उम्मीदवारों का एक मेला सा उतरता | कोई पंजाब से चला आता था, कोई मद्रास से, कोई नये फैशन का प्रेमी, कोई पुरानी सादगी पर मिटा हुआ | पंडित व मौलवी भी अपना भाग्य आजमाने आ पहुँचे थे | रंगीन एमामे, चोगे और अलग-अलग प्रकार के अंगरखे और कंटोप देवगढ़ में अपनी सज-धज दिखने लगे | सबसे ज्यादा संख्या ग्रेजुएटों की थी |

(४) विज्ञापन किसने व क्यों निकाला था ?
उत्तर: रियासत देवगढ़ के दीवान सरदार सुजान सिंह बूढ़े हो चुके थे | वे राज-काज संभालने की जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहते थे | महाराज के बहुत प्रार्थना करने पर भी न मानें | अतः महाराज ने नया दीवान चुनने की जिम्मेदारी उन्हें ही दे दी | इसलिए अगले दिन सरदार सुजान सिंह ने देश के प्रसिद्ध समाचारपत्रों में यह विज्ञापन निकाला कि देवगढ़ के लिए एक सुयोग्य दीवान की जरूरत है |

(ख) हर एक मनुष्य अपने जीवन को अपनी बुद्धि के अनुसार अच्छे रूप में दिखाने की कोशिश करता था |
१) उपर्युक्त कथन का प्रसंग क्या है ?
उत्तर: रियासत देवगढ़ के दीवान का चुनाव होनेवाला था | देश के हर भाग से उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमाने आए हुए थे | दीवान के उम्मीदवार का चयन उसकी कर्तव्यपरायणता के आधार पर होने वाला था | इस वजह से हर व्यक्ति स्वयं की बुरी आदतों को छिपा रहा था व सद्गुणों का दिखावा कर रहा था | हर उम्मीदवार अपनी-अपनी बुद्धि के अनुसार स्वयं को अच्छा दिखाने की कोशिश कर रहा था |

२) मि. अ स्वयं को कैसे प्रदर्शित करता है ?
उत्तर: मि. अ रियासत देवगढ़ के दीवान पद के उम्मीदवार थे | दीवान पद का हर उम्मीदवार अपनी बुराइयों को छिपाकर स्वयं को एक अच्छे मनुष्य के रूप में पेश कर रहा था | मि. अ ने भी वैसा ही किया | उनको सुबह देर तक सोने की आदत थी | वो सुबह ९ बजे उठते थे किन्तु आजकल वे सुबह जल्दी उठकर बगीचे में टहलने चले जाते हैं | वो किसी भी तरह एक महीने तक अपनी देर तक सोने की बुरी आदत को लोगों के सामने आने नहीं देना चाहते थे |

३) मि. ब स्वयं को किस प्रकार दिखाना चाहता है ?
उत्तर: मि. ब रियासत देवगढ़ के दीवान पद के उम्मीदवार थे | दीवान पद का हर उम्मीदवार अपनी बुराइयों को छिपाकर स्वयं को एक अच्छे मनुष्य के रूप में पेश कर रहा था | मि. ब को भी हुक्का पीने की बुरी आदत थी | वो अपनी इस आदत को लोगों के सामने नहीं आने देना चाहते थे | इसलिए वो देर रात को अँधेरे में दरवाजा बंद करके सिगार पीते थे |

४) मि. द, स और ज ने कैसे अपना व्यवहार बदला ?
उत्तर: मि. द, स और ज अपने घर के नौकरों से बहुत बुरा व्यवहार किया करते थे | दीवान पद का उम्मीदवार बनने के बाद उन्होंने अपनी आदत बिलकुल बदल ली | अब वे नौकरों को ‘आप’ और ‘जनाब’ कहकर ही बुलाते थे | उम्मीदवारी के एक महीने तक तीनों स्वयं को अच्छा व्यक्ति दिखाना चाहते थे |

(ग) लेकिन मनुष्यों का वह बूढ़ा जौहरी आड़ में बैठा हुआ देख रहा था कि इन बगुलों में हंस कहाँ छुपा हुआ है |
१) कौन इसे एक महीने के झंझट समझ रहे थे और क्यों ?
उत्तर: रियासत देवगढ़ के दीवान का चुनाव होनेवाला था | देश के हर भाग से उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमाने आए हुए थे | उन्हें एक माह तक सरदार सुजान सिंह का मेहमान बन कर रहना था | इस दौरान सरदार सुजान सिंह उचित परीक्षा लेकर कौन दीवान बनेगा इस बात का निर्णय करने वाले थे | सारे उम्मीदवार इस एक माह में स्वयं को अच्छा दिखाने की कोशिश कर रहे थे | वे इस एक महीने को झंझट का समय सोच रहे थे क्योंकि इस एक माह में उन्हें उनकी इच्छा और आदतों के विपरीत काम करना पड़ रहा था |

२) इस पाठ के सन्दर्भ में जौहरी शब्द का अर्थ बताइये | इसका प्रयोग किसके लिए किया गया है और क्यों ?
उत्तर: इस पाठ में जौहरी शब्द सरदार सुजान सिंह के लिए प्रयोग किया गया है | सामान्य अर्थों में जौहरी का अर्थ होता है ऐसा व्यक्ति जो हिरा मोती जैसे कीमती रत्नों की उचित परीक्षा कर सके व उन्हें पहचान सके | प्रस्तुत पाठ में सरदार सुजान सिंह का काम भी बिलकुल वैसा ही था | उन्हें दीवानी पद के उम्मीदवारों की उचित परीक्षा लेकर सही व योग्य उम्मीदवार को पहचानना था | उनकी जिम्मेदारी थी कि वे एक ऐसे व्यक्ति को ढूँढे जो अपने गुणों के कारण मनुष्यों में रत्न की तरह हो, श्रेष्ठ हो | इसलिए सरदार सुजान सिंह मनुष्यों के जौहरी थे |

३) ‘बगुलों में हंस’ मुहावरे की व्याख्या कीजिये एवं बताइये कि बगुले व हंस का यहाँ किससे तात्पर्य है ?
उत्तर: बगुले व हंस दोनों का रंग सफ़ेद होता है | दोनों दिखने में काफी-कुछ समान होते हैं | इस वजह से बगुलों की भीड़ में से हंस को पहचानना काफी मुश्किल होता है |
रियासत देवगढ़ की दीवानी पद के लिए भी बहुत सारे उम्मीदवार आए थे | सारे उम्मीदवार स्वयं को बहुत अच्छा दिखा रहे थे | सबने अपनी बुराईओं को छिपा लिया था, इसलिए उनमें योग्य उम्मीदवार कौन है, ये पहचानना बहुत हे मुश्किल था | उम्मीदवारों की इस भीड़ की तुलना बगुले से की गयी है | उनमें से जो व्यक्ति वास्तव में गुणों में श्रेष्ठ था, उसे हंस कहा गया है | किन्तु उत्तम गुणों वाले उस व्यक्ति को ढूँढना बगुलों की भीड़ में छिपे हंस को ढूँढने के समान ही कठिन था | इसलिए यहाँ बगुलों में हंस वाले मुहावरे का प्रयोग हुआ है |

४) सरदार सुजान सिंह किस प्रकार के व्यक्ति को रियासत का दीवान बनाना चाहते थे ? उनकी कसौटी पर कौन व्यक्ति खरा उतरा ?
उत्तर: रियासत देवगढ़ के महाराज ने नया दीवान चुनने की जिम्मेदारी सरदार सुजान सिंह को दी थी | सरदार सुजान सिंह स्वयं एक नीतिकुशल व्यक्ति थे | वे एक ऐसे व्यक्ति को रियासत का दीवान बनाना चाहते थे जिसके ह्रदय में दया हो, उदारता हो | उसमें ऐसा आत्मबल हो कि वो मुसीबत का बहादुरी से सामना कर सके | जो गरीबों को कभी न सताए | वह चाहे धोका खा जाये पर दया व धर्म के मार्ग से कभी न हटे |
पंडित जानकीनाथ सरदार सुजान सिंह की कसौटी पर खरे उतरे क्योंकि उन्होंने स्वयं कष्ट में होते हुए भी गरीब किसान का रूप बनाये सरदार सुजान सिंह की सहायता की | अतः वे दीवानी पद के योग्य थे |

(घ) रियासत देवगढ़ में ये खेल बिलकुल निराली बात थी |
१) यहाँ किस खेल की बात हो रही है? खेल की योजना बनाने के पीछे क्या उद्देश्य था ?
उत्तर: यहाँ हॉकी के खेल की बात हो रही है | दीवानी पद के लिए आये उम्मीदवारों में से नए फैशनवालों ने हॉकी के खेल का सुझाव दिया | हॉकी का खेल भी एक कला है | उन्होंने सोचा इस कला को क्यों छुपा के रखा जाये ? हो सकता है कि ये उनको दीवानी पद के लिए चुने जाने में कुछ सहायता कर जाये |

२) रियासत देवगढ़ में हॉकी का खेल निराली बात क्यों थी ?
उत्तर: रियासत देवगढ़ में हॉकी का खेल बिलकुल निराली बात थी क्योंकि पढ़े लिखे, भले लोग शतरंज या ताश जैसे गंभीर खेल खेलते थे | भाग दौड़ के खेल बच्चों के समझे जाते थे | दीवानी पद के लिए आये ज्यादातर व्यक्ति पढ़े लिखे थे | रियासत देवगढ़ में ऐसे पढ़े लिखे, भले लोग शतरंज या ताश जैसे गंभीर खेल खेलते हैं |

३) हॉकी का खेल किस तरह चला ?
उत्तर: हॉकी का खेल बड़े उत्साह से चला | धावे के लोग जब गेंद को लेकर तेजी से उड़ते तो ऐसा जान पड़ता था कि कोई लहर बढ़ती चली आती है, लेकिन दूसरी ओर से खिलाडी इस बढ़ती हुई लहर को इस तरह रोक लेते थे कि मानो लोहे की दीवार है | शाम तक यही धूमधाम रही | लोग पसीने से तर हो गए | खून की गर्मी आँख और चेहरे से झलक रही थी | हाँफते-हाँफते बेदम हो गए, लेकिन हार-जीत का निर्णय न हो सका |

४) हॉकी के खेल वाला दिन उम्मीदवारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कैसे साबित हुआ ?
उत्तर: सारे उम्मीदवार एक महीने के लिए रियासत देवगढ़ के मेहमान थे | सरदार सुजान सिंह उनकी परीक्षा लेकर दीवान का चयन करने वाले थे | हॉकी के खेल वाला दिन ही वो दिन साबित हुआ जिस दिन सरदार सुजान सिंह ने उम्मीदवारों की परीक्षा लेकर पंडित जानकीनाथ को दीवान बनाने का निश्चय किया | इसलिए वह दिन उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ |

ङ) “मैं तुम्हारी गाड़ी निकाल दूँ?”
१) वक्ता कौन है ? परिचय दें |
उत्तर: वक्ता एक नवयुवक है, उसका नाम पंडित जानकीनाथ है | वह दीवान पद के उम्मीदवार के तौर पर देवगढ़ आया है | हॉकी खेलते वक्त उसके पैरों में चोट लगी थी, इसलिए वह लंगड़ा रहा था | स्वभाव से वो परोपकारी व साहसी था | उसके ह्रदय में आत्मबल व उदारता थी | स्वयं को चोट लगने के बावजूद भी कष्ट उठाकर उसने गरीब किसान की गाड़ी को दलदल से निकाला | उसका संकल्प मजबूत था | इन सब गुणों के कारण वह सरदार सुजान सिंह की परीक्षा में सफल होकर रियासत देवगढ़ का दीवान बनता है |

२) गाड़ी कहाँ फँसी थी?
उत्तर: गाड़ी एक ऐसे नाले में फँसी थी जिस पर कोई पुल न था | नाले में कीचड़ था और उसकी चढ़ाई इतनी ऊँची थी कि गाड़ी ऊपर नहीं चढ़ सकती थी | गाड़ी पर अनाज का बोझ ज्यादा था और बैल कमजोर थे | इसलिए बार-बार जोर लगाने के बावजूद भी गाड़ी नाले को पार नहीं कर पा रही थी |

३) गाड़ी को किसने निकाला और किस युक्ति से?
उत्तर: गाड़ी को किसान ने पंडित जानकीनाथ की सहायता से बाहर निकाला | बैलों में इतनी शक्ति नहीं थी कि वे उस नाले की ऊँचाई पर चढ़ सके | इसलिए पंडित जानकीनाथ स्वयं गाड़ी के पीछे आ गए और किसान को गाड़ी पर बैठकर बैलों को साधने के लिए कहा | उन्होंने पीछे से पहियों पर जोर लगाया, उधर किसान ने बैलों को ललकारा | बैलों को भी सहारा मिल गया था, उन्होंने कंधे झुकाकर एक बार जोर लगाया और गाड़ी नाले के पार हो गयी | इस प्रयत्न में पंडित जानकीनाथ स्वयं घुटनों तक कीचड़ में घुस गये किन्तु उन्होंने किसान की सहायता की |

४) गाड़ी निकल जाने पर गाड़ी वाले ने वक्ता से क्या कहा?
उत्तर: गाड़ी निकल जाने पर गाड़ी वाले ने वक्ता का धन्यवाद देते हुए कहा कि “ महाराज, आपने आज मुझे उबार लिया, नहीं तो सारी रात यहाँ बैठना पड़ता |” इसपर युवक ने हँसकर कुछ इनाम माँगा तो किसान ने उन्हें दीवानी पद मिलने का आशीर्वाद दिया |

च) किसान युवक के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो गया | बोला — “महाराज आपने मुझे उबार लिया, नहीं तो सारी रात यहीं बैठना पड़ता |”
१) किसान युवक के सामने हाथ जोड़कर क्यों खड़ा हो गया ? ‘उबार लिया’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर: किसान की गाड़ी नाले में अटक गयी थी | गाड़ी में बोझ ज्यादा था और बैल कमजोर | बहुत प्रयत्न करने के बाद भी वह नाले से निकल नहीं पायी | किसान बड़ी मुसीबत में फँसा हुआ था | ऐसे समय में युवक ने किसान की सहायता की | खुद नाले के अंदर जाकर, घुटनों तक कीचड़ में गड़कर भी उसने किसान की गाड़ी को बाहर निकाला | उसकी इस सहायता के कारण किसान युवक के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो गया | यहाँ उबार लिया से तात्पर्य है युवक ने किसान को मुसीबत से बचा लिया क्योंकि यदि युवक गाड़ी निकालने में उसकी सहायता नहीं करता तो किसान को रात भर वहीं नाले के पास बैठना पड़ता |

२) युवक के इनाम माँगने पर किसान ने क्या कहा ?
उत्तर: युवक ने नाले में फँसी गाड़ी को निकालने में किसान की सहायता की थी, इस पर किसान ने हाथ जोड़कर आभार प्रकट किया | हँसते हुए युवक ने किसान से कुछ इनाम माँगा | इस पर किसान ने गंभीर होकर कहा कि “नारायण चाहेंगे तो दीवानी आपको ही मिलेगी” |

३) किसान की बात सुनकर युवक के मन में क्या विचार आया ?
उत्तर: युवक ने गाड़ी को नाले से निकालने में किसान की सहायता की थी | युवक के इनाम माँगने पर किसान ने गंभीर होकर कहा कि “नारायण चाहेंगे तो दीवानी आपको ही मिलेगी” |
किसान की आवाज और चेहरा-मोहरा दोनों सरदार सुजान सिंह से मिलती जुलती थी | इससे युवक के मन में संदेह आया कि कहीं ये सरदार सुजान सिंह तो नहीं | किसान भी युवक के मन के संदेह को भाँप गया था |

४) इस कहानी से आपको क्या शिक्षा मिली ?
उत्तर: प्रश्न छ) का उत्तर क्र. ४ देखिये |

च) “गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है |”
१) वक्ता का परिचय दीजिये |
उत्तर: वक्ता रियासत देवगढ़ के दीवान सरदार सुजान सिंह है, जो एक किसान के भेष में है | उन्होंने यह रूप दीवानी पद के लिए आये हुए उम्मीदवारों की परीक्षा के लिए बनाया था | उनकी गाड़ी नाले में फँस गयी थी | वे स्वयं उसे नाले से निकाल नहीं पा रहे थे | उन्होंने श्रोता की सहायता से गाड़ी नाले से निकाली है |

२) उपरोक्त वाक्य का क्या अर्थ है ?
उत्तर: मोती समुद्र की गहराई में मिलता है | जो उस गहराई में उतरता है, उसके हाथ ही मोती लगता है| किनारे पर बैठने वालों के हाथ नहीं | संसार में जो भी व्यक्ति मेहनत करता है, अपने लक्ष्य को पाने के लिए कष्ट सहता है, सफलता उसे ही मिलती है |

३) यहाँ गहरे पानी में पैठने वाला कौन है ? उसने ऐसा क्यों किया ?
उत्तर: गहरे पानी में पैठने का अर्थ होता है अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए विशेष प्रयत्न करना | यहाँ गहरे पानी में पैठनेवाला सरदार सुजान सिंह है | उन्हें रियासत देवगढ़ के लिए एक योग्य दीवान ढूँढना था | इसलिए उन्हें संकट में फँसे किसान का रूप बनाकर उम्मीदवारों की परीक्षा लेनी पड़ी, ताकि उन्हें मोती अर्थात योग्य उम्मीदवार मिल सके |

४) उपरोक्त सन्दर्भ में मोती कौन है ?
उत्तर: सरदार सुजान सिंह को रियासत देवगढ़ के लिए एक योग्य दीवान की आवश्यकता थी | उन्होंने एक संकट में फँसे किसान का भेष बनाकर उम्मीदवारों की परीक्षा ली | इस परीक्षा में पंडित जानकीनाथ सफल हुए क्योंकि उन्होंने स्वयं कष्ट उठाकर भी किसान की सहायता की | अतः उपरोक्त सन्दर्भ में मोती पंडित जानकीनाथ है, जिन्हें सरदार सुजान सिंह ने गहरे पानी में पैठ कर पाया है, अर्थात विशेष प्रयत्न करके पाया है |

छ) “मैं रियासत को पंडित जानकीनाथ के दीवान पाने पर बधाई देता हूँ |”
१) उक्त कथन का वक्ता कौन है ? उसका चरित्रांकन कीजिये |
उत्तर: उक्त कथन के वक्ता रियासत देवगढ़ के दीवान सरदार सुजान सिंह हैं | वे नीतिकुशल और कर्तव्यपरायण व्यक्ति हैं | उन्होंने चालीस वर्ष तक देवगढ़ की सेवा की | वे एक कुशल प्रशासक थे | स्वयं देवगढ़ के राजा साहब भी सरदार सुजान सिंह का बड़ा सम्मान करते थे | सुजान सिंह विद्या को कम किन्तु कर्तव्य को अधिक महत्व देने वाले व्यक्ति थे | गरीबों के प्रति दया, मुसीबत से लड़ने का आत्मबल, इन गुणों को वे आवश्यक समझते थे | उनमें दीवानी के पद के लिए बिलकुल मोह नहीं था |

२) दीवान पाने के लिए वक्ता ने क्या परीक्षा रखी थी?
उत्तर: वक्ता एक ऐसे व्यक्ति को दीवान बनाना चाहता था जिसके ह्रदय में दया हो, उदारता हो | उसमें ऐसा आत्मबल हो कि वो मुसीबत का बहादुरी से सामना कर सके | इसलिए सरदार सुजान सिंह ने दीवान पद के सभी उम्मीदवारों को एक महीने तक रियासत देवगढ़ में रहने के लिए आमंत्रित किया ताकि वह उनकी परीक्षा ले सके | एक दिन जब दीवान पद के उम्मीदवार हॉकी का खेल ख़त्म कर के लौट रहे थे, सरदार सुजान सिंह एक किसान बनकर वहाँ पहुँच गए | उनकी गाड़ी नाले में फँस गयी थी जो बाहर नहीं निकल पा रही थी | उन्होंने तय किया था कि जो उम्मीदवार इस समय उनकी सहायता करेगा उसी को वो दीवान बनायेंगे | इस तरह सरदार सुजान सिंह ने उम्मीदवारों की परीक्षा ली |

३) परीक्षा में कौन सफल हुआ और कैसे ?
उत्तर: दीवानी पद की परीक्षा में पंडित जानकीनाथ सफल हुए | हॉकी खेलते वक़्त उनके पैर में चोट लगने के बावजूद उन्होंने एक मुसीबत में फँसे किसान की गाड़ी नाले से बाहर निकालने में सहायता की | वह किसान स्वयं सरदार सुजान सिंह थे जो उम्मीदवारों की परीक्षा लेने किसान का रूप बनाकर आए थे | सरदार सुजान सिंह को एक ऐसे उम्मीदवार की तलाश थी जिसके ह्रदय में दया हो, उदारता हो | उसमें ऐसा आत्मबल हो कि वो मुसीबत का बहादुरी से सामना कर सके | पंडित जानकीनाथ ने स्वयं कष्ट में होते हुए भी उनकी सहायता की | इस तरह वो दीवानी पद की परीक्षा में सफल हुए |

४) इस कहानी से हमें क्या सन्देश मिलता है?
उत्तर: इस कहानी से हमें ये संदेश मिलता है मनुष्य के सद्गुणों का महत्व बाहरी प्रमाणपत्रों से ज्यादा होता है | मनुष्य के ह्रदय में दया तथा उदारता होनी चाहिए जिससे वह समाज की सेवा कर सके | उसमें ऐसा आत्मबल होना चाहिए कि वह विपत्ति का सामना वीरता से कर सके | तभी वह समाज में ऊँचा स्थान पाने के योग्य बनेगा |

प्र.२ कहानी का शीर्षक स्पष्ट कीजिये |
उत्तर: प्रस्तुत कहानी रियासत देवगढ़ के बारे में है जहाँ के नीतिकुशल दीवान सरदार सुजान सिंह बूढ़े हो चुके हैं | वो अब राज काज नहीं सँभालना चाहते | इसलिए उन्होंने महाराज से प्रार्थना की कि अब उन्हें दीवान पद की जिम्मेदारी से मुक्त किया जाये |
महाराज की इच्छा बिलकुल नहीं थी कि सरदार सुजान सिंह को पदमुक्त किया जाये पर वो नहीं मानें | तब महाराज ने नया दीवान चुनने की जिम्मेदारी उन्हें ही दे दी | सरदार सुजान सिंह ने दीवान बनने के लिए जो शर्तें रखीं, उनमें विद्या की जगह दया, प्रेम, ममता, परोपकार, आत्मबल जैसे मानवीय गुणों को अधिक महत्व दिया गया था |
उम्मीदवारों की परीक्षा भी उन्होंने एक ऐसा गरीब किसान बनकर ली, जो मुसीबत में था | दीवानी के कई उम्मीदवारों ने उस किसान को देखा पर किसी ने उसकी सहायता नहीं की | केवल पंडित जानकीनाथ ही ऐसे थे जिन्होंने स्वयं कष्ट उठाकर भी उस किसान की सहायता करने का निश्चय किया | वो स्वयं घुटनों तक कीचड़ में गड़ गए किन्तु उन्होंने गाड़ी को धक्का देकर नाले से बाहर निकाला | पंडित जानकीनाथ को पता भी न था कि उन्होंने जिस किसान की सहायता की है वह वास्तव में सरदार सुजान सिंह हैं | वे दीवानी की असली परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके थे |
इस कहानी में मनुष्य के सद्गुणों की परीक्षा होती है, इसलिए “परीक्षा” ये शीर्षक इस कहानी के लिए बिल्कुल सही है |

प्र.३ दीवान पद के उम्मीदवारों की तरह हमारे नेता भी दिखावे पर बहुत ध्यान देते हैं | इस विषय पर अपने विचार लिखिए |
उत्तर: हमारे दश की राजनीति का लक्ष्य अब समाज सेवा नहीं रहा | अब लक्ष्य हो गया है किसी तरह चुनाव जीतना तथा उसके बाद अधिक से अधिक धन कमाना | नेताओं का व्यवहार सार्वजनिक जीवन में तथा चुनाव के समय बिलकुल अलग होता है तथा व्यक्तिगत जीवन में बिलकुल अलग | दिखावे के द्वारा नेता अपनी ऐसी छवि बनाने का प्रयत्न करते हैं जिससे देश की जनता को लगे कि यह नेता वाकई में आदर्श नेता है | यह देश की सेवा करेगा | पर वास्तव में होता इसके विपरीत है | नेताओं का उद्देश्य प्रभावशाली पद पाना व धन अर्जित करना ही रह गया है |

प्र.४ क्या आप रियासत देवगढ़ के लोगों के इस विचार से सहमत हैं कि “पढ़े-लिखे भले लोगों के लिए शतरंज तथा ताश जैसे गंभीर खेल हैं | दौड़-कूद के खेल बच्चों के होते हैं |”
उत्तर: मनुष्य चाहे किसी भी उम्र का हो, किसी भी वर्ग का हो या उसकी शैक्षणिक योग्यता कुछ भी हो, उसके शारीरिक तथा मानसिक विकास के लिए दौड़-कूद वाले खेल भी जरूरी है तथा शतरंज तथा ताश जैसे गंभीर खेल भी | दौड़-कूद के खेल जैसे हॉकी, फूटबाल आदि मनुष्य को स्वस्थ रखते हैं तो ताश तथा शतरंज जैसे खेल मनुष्य की बुद्धि शक्ति को बढ़ाते हैं | दोनों तरह के खेलों का मनुष्य के विकास में अलग-अलग तरह से योगदान है | अतः मैं रियासत देवगढ़ के लोगों के इस विचार से सहमत नहीं हूँ कि “पढ़े-लिखे भले लोगों के लिए शतरंज तथा ताश जैसे गंभीर खेल हैं | दौड़-कूद के खेल बच्चों के होते हैं |”

प्र.५ सरदार सुजान सिंह ने दीवान का चयन करते समय विद्या के स्थान पर मानवीय गुणों को महत्व दिया था | क्या आप उनके दीवान चुनने की विधि को उचित मानते है ?
उत्तर: दीवान का पद किसी भी राज्य के लिए बहुत महत्व का होता है | उसके हाथ में लगभग पूरे राज्य की शासन व्यवस्था होती है | दीवान के दिए हुए सुझावों के आधार पर राजा महत्वपूर्ण निर्णय लेता है | प्रजा की रक्षा करना, उनकी संपत्ति की रक्षा करना, उनके सुख का ख्याल रखना यह सब दीवान की जिम्मेदारी होती है | इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि दीवान के पद पर जो व्यक्ति हो, उसके मन में दया, साहस, आत्मबल जैसे मानवीय गुण हो | विद्या का भी अपना महत्व है किन्तु वो कभी इन गुणों की जगह नहीं ले सकता | इसलिए सरदार सुजान सिंह की दीवान चुनने की विधि पूरी तरह सही है |

2 Comments

  1. Aman December 10, 2015
  2. Abhijeet hooda February 1, 2017

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