नवीन कल्पना करो (Navin Kalpana Karo)

कवि: गोपाल सिंह नेपाली

क) निज राष्ट्र के शरीर के …………………………. किशोर कामना करो |
१) प्रस्तुत काव्यांश किस कविता से लिया गया है ? कवि का परिचय दो |
उत्तर: प्रस्तुत काव्यांश ‘नवीन कल्पना करो’ नामक कविता से लिया गया है | इसके कवि श्री गोपाल सिंह नेपाली जी हैं | इनकी कवितायें बहुत ओजपूर्ण होती हैं | नेपाली जी कवि सम्मेलनों में बहुत लोकप्रिय थे | इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – ‘उमंग’, ‘पंछी’, ‘रागिनी’, ‘नीलिमा’, तथा ‘हिमालय ने पुकारा’ |

२) कवि के ‘नवीन कल्पना करो’ कहने से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: कवि देशवासियों से आग्रह कर रहा है कि हमारे देश के विकास के लिए, देश को शक्तिशाली बनाने के लिए, देश को संपन्न बनाने के लिए हमें नए-नए तरीके खोजने चाहिए | हमें अपनी पूरी कल्पनाशक्ति का उपयोग करके देश को आगे बढ़ाने की नई विधियाँ ढूँढनी चाहिए |

३) कवि देश, मेदिनी, मधुमास, चाँदनी, दीप और रोशनी को स्वतंत्र कह रहा है, इसके पीछे क्या भाव छुपा है ?
उत्तर: यह कविता भारत को आजादी मिलने के कुछ वर्षों बाद ही लिखी गयी थी | इसलिए कवि हमारे देश और उसके चारों तरफ जो प्रकृति है उसे स्वतंत्र कह रहा है | हमारा देश, धरती, वसंत, चाँदनी, दीप और रोशनी सब स्वतंत्र है अर्थात अब हमें पूर्ण आज़ादी मिल चुकी है |

४) कवि नवयुवकों को क्या कामना करने को कह रहा है ?
उत्तर: हमारा देश स्वतंत्र हो चुका है | अतः अब हमें देश को शक्तिशाली बनाने पर विचार करना चाहिए | अपनी सारी शक्तियों को इकट्ठी करके अब देश को विकसित तथा संपन्न बनाने के लिए प्रयत्न करने चाहिए | कवि नवयुवकों का आवाहन करते हुए कह रहा है कि उन्हें देश को सद्य समृद्ध करने की कामना करनी चाहिए |

ख) तन की स्वतंत्रता …………………………………. तुम साधना करो |
१) कवि तन की स्वतंत्रता को चरित्र का निखार क्यों कहता है ?
उत्तर: जब तक मानव का शरीर किसी का गुलाम हो वो दूसरे की इच्छा से बंधा होता है | उसे बस आज्ञा पालन करना होता है चाहे काम सही हो या गलत | इससे उसके चरित्र का नाश हो जाता है | जब उसका तन स्वतंत्र होगा, तो वो अपने निर्णय स्वयं ले पायेगा, अच्छे बुरे में से अच्छे रास्ते को चुन पायेगा | इससे उसके चरित्र का निर्माण होगा | इसलिए कवि तन की स्वतंत्रता को चरित्र का निखार कहता है |

२) मन की स्वतंत्रता से मनुष्य के विचारों पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
उत्तर: यदि मनुष्य का मन स्वतंत्र न हो तो उसके विचार दब जाते हैं | उसकी सोच पर दूसरों की सोच हावी हो जाती है | वह अपने विकास के लिए कभी कोई नया उपाय नहीं कर पाता | जब मनुष्य का मन स्वतंत्र हो तभी उसमें सोचने की क्षमता जागती है, नए-नए विचार पैदा होते हैं | वह उन विचारों का मूल्यांकन कर उसकी प्रगति के लिए जो विचार आवश्यक है, उसे अपनाता है | इसलिए मन की स्वतंत्रता मनुष्य के विकास के लिए परमावश्यक है |

३) देश की स्वतंत्रता को अमर पुकार कहने से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: मनुष्य के लिए इससे अधिक अपमान की कोई बात नहीं हो सकती कि उसका देश स्वतंत्र न हो | एक परतंत्र देश की सारी उपलब्धियाँ शून्य हो जाती है | ऐसे देश व उसके नागरिकों का कोई सम्मान नहीं रह जाता | इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि मनुष्य अपनी पूरी शक्ति लगा के देश को आज़ाद कराने का प्रयत्न करें | चाहे इस प्रयास में उसके प्राण ही चले जाए | इसलिए कवि देश की स्वतंत्रता को अमर पुकार कह रहे हैं |

४) कवि किस साधना के लिए प्रेरित कर रहा है ?
उत्तर: कवि देश की स्वतंत्रता के महत्व को जानता है | इसलिए वो देश की स्वतंत्रता को अमर पुकार कहता है | वह चाहता है कि हमारे देशवासी भी इस बात को भूले नहीं | देश के नागरिकों को देश की स्वतंत्रता कितनी महत्वपूर्ण है इस बात का हमेशा स्मरण रहे व देश की स्वतंत्रता पर कभी आँच न आए इसके लिए साधना करने के लिए कवि प्रेरित कर रहा है|

ग) हम थे अभी-अभी गुलाम ………………………………. तुम भावना भरो |
१) प्रस्तुत पद्यांश में कवि हमें क्या न भूलने की सलाह दे रहा है ?
उत्तर: कवि हमें याद दिला रहा है कि हम बहुत लंबे समय तक गुलाम रहे और इसकी मुख्य वजह थी आपस की फूट | हमें अपना आत्मसम्मान भूलकर दूसरों के सामने झुकना पड़ा क्योंकि हम शत्रुओं से लड़ने के बजाय आपस में लड़ते रहे | अपनी गुलामी की हमें क्या कीमत चुकानी पड़ी और हमें कितना कष्ट हुआ, कवि हमें इन सब बातों को न भूलने की सलाह दे रहा है |

२) करना पड़ा हमें सलाम से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: हम एक लंबे समय तक अंग्रेजों के गुलाम थे | एक गुलाम देश होने के कारण हमें उनके सामने झुककर सलाम करना पड़ता था | हमें अपने आत्मसम्मान को मारकर मुट्ठी भर अंग्रजों की श्रेष्ठता स्वीकार करनी पड़ती थी | सलाम करना शब्द हमारे उस गुलामी के दिनों की ओर संकेत कर रहा है |

३) कवि किस फूट की तरफ इशारा कर रहे हैं ? उसका क्या नतीजा हुआ ?
उत्तर: अंग्रेजों से लड़ते समय भारत के राजाओं में एकता नहीं थी | अंग्रेजों ने सफलता से फूट डालो और राज करो की नीति का आश्रय लिया | सब राजा आपस में लड़ते रहे और अंग्रेजो ने एक-एक कर सबको हरा दिया और पूरे देश पर कब्ज़ा कर लिया | इसका नतीजा यह हुआ कि हम लगभग २०० वर्षों तक गुलाम रहे | भारत सोने की चिड़िया से एक गरीब और अविकसित देश में बदल गया |

४) कवि ह्रदय में स्वतंत्रता की भावना भरने को क्यों कह रहा है ?
उत्तर: हम बहुत लंबे समय तक गुलाम रहे और इसकी मुख्य वजह थी आपस की फूट | एक गुलाम देश होने के कारण हमें उनके सामने झुककर सलाम करना पड़ता था | हमें अपने आत्मसम्मान को मारकर मुट्ठी भर अंग्रेजों की श्रेष्ठता स्वीकार करनी पड़ती थी | वो गुलामी के दिन दोबारा न लौट आए अर्थात देश दोबारा गुलाम न हो , इसलिए कवि हमें ह्रदय में स्वतंत्रता की भावना भरने को कह रहे हैं |

घ) है देश एक, लक्ष्य एक ……………………………….. तुम भेद न करो |
१) कवि हमारे देश की विविधता में एकता किस प्रकार दिखा रहे हैं ?
उत्तर: कवि बता रहे हैं कि भले हमारे देश में ४० करोड़ लोग हैं लेकिन उनका मन सिर्फ देश के बारे में सोचता है | उनकी उपासना की विधि अलग-अलग है, किन्तु सबका एक ही धर्म है वो है ‘भारत’ | सबका लक्ष्य एक ही है देश के विकास और देश की समृद्धि के लिए काम करना | इस प्रकार कवि भारत देश की विविधता में एकता दिखा रहे हैं |

२) कवि किस भेदभाव के लिए मना कर रहे हैं ?
उत्तर: हमारे देश में अनेक जाती, धर्म, भाषा और संप्रदाय के लोग रहते हैं | कवि हमें कह रहे हैं कि इस विविधता के बावजूद हम सब भारतीय हैं | इसलिए इन सब चीजों के आधार पर या आर्थिक आधार पर हमें अपने देशवासियों के बीच भेदभाव नहीं करना चाहिए | देश का प्रत्येक नागरिक चाहे वो कोई भी भाषा बोलता हो, चाहे वो किसी भी जाती या धर्म का हो, भारतीय संविधान ने सबको समान माना है |

३) बगिया तथा वसुंधरा के हरे भरे होने से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: बगिया तथा वसुंधरा के हरे-भरे होने का तात्पर्य है कि हमारा देश प्राकृतिक संपदाओं से भरा-पूरा है | भारत की मिट्टी बहुत उपजाऊ है | यहाँ लहलहाते खेत, हरे-भरे जंगल और बाग़-बगीचे हैं | देश में भरपूर खनिज संपदा है | इसलिए भारत को सुजलाम-सुफलाम भी कहते हैं |

४) कवि किस प्रकार की समानता की बात कर रहे हैं ?
उत्तर: हमारा देश साधन-संपन्न है | फिर भी हमारे देश में कुछ लोग बहुत गरीब हैं तो कुछ बहुत अमीर | कुछ लोग महलों में रह रहे हैं तो कुछ को रहने को झोपड़े तक नहीं | करोड़ों लोगों को आज भी दो वक़्त की रोटी मिलने में कठिनाई आती है | कवि चाहता है कि ऐसे लोगों को भी समाज में बराबरी का हक मिले | आर्थिक आधार पर किसी के साथ भेदभाव न हो, सबके साथ समानता का व्यवहार हो |

ङ) बढ़ती चले कतार………………………………………. तुम वंदना करो |
१) देश की पुकार पर हमारी क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए ?
उत्तर: जब भी देश को हमारी आवश्यकता पड़े, हमें सब काम छोड़कर तुरंत देश सेवा में लग जाना चाहिए | हमें अपना लाभ, अपने परिवार, अपने भाइयों और अपने मित्रों का लाभ बाद में देखना चाहिए | पहले अपनी पूरी शक्ति देश के लिए लगा देनी चाहिए | देश की एक आवाज पर सबको पंक्तिबद्ध होकर आगे आ जाना चाहिए |

२) “पहले जले दिया शहीद के मजार पर” से कवि का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: देश के लिए अनेक लोगों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया है | उन्होंने अपना जीवन, परिवार, मित्र, बंधु सबका मोह त्याग दिया और देश के लिए न्योछावर हो गए | इसलिए कवि कह रहे हैं कि पहले उन शहीदों के मजार पर दिया जलना चाहिए अर्थात देश में सबसे पहले सम्मान शहीदों को मिलना चाहिए | देश के प्रत्येक व्यक्ति को उनकी कुर्बानी को याद रखना चाहिए |

३) कवि शहीदों की वंदना की प्रेरणा क्यों दे रहे हैं ?
उत्तर: शहीदों ने अपना जीवन, अपना परिवार, मित्र, बंधु सबका मोह त्याग दिया और देश के लिए न्योछावर हो गए | अपनी मातृभूमि की पुकार पर उन्होंने अपना सर्वस्व त्याग दिया | इसलिए कवि कहता है कि देश में सबसे पहले उन्हें सम्मान देना चाहिए व प्रत्येक देशवासी को उनकी वंदना करनी चाहिए |

४) “पीछे किया करो सिंगार द्वार-द्वार पर” से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: कवि इस पद्य खंड में यह बताने का प्रयत्न कर रहे हैं कि हमें देश के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने को तैयार रहना चाहिए | हमें देश हित को स्वयं के हित पर प्रधानता देनी चाहिए | “पीछे किया करो सिंगार द्वार-द्वार पर” से कवि इसी बात की और संकेत कर रहे हैं कि देशसेवा पहले, स्वयं के घर और परिवार का ख्याल बाद में |

च) ओ देश की जवानियों …………………….. तुम अमोघ अर्चना करो |
१) कवि देश के नवयुवकों का आवाहन क्यों कर रहा है ? वह उन्हें किन-किन विशेषणों से संबोधित कर रहा है ?
उत्तर: कवि देश के नवयुवकों का आवाहन देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने के लिए कर रहा है | देश का प्रत्येक नागरिक स्वतंत्र ही जन्म लेना चाहिए तथा स्वतंत्र ही मरना चाहिए | कवि देश के नवयुवकों को देश की जवानी, इतिहास की निशानी, खून की रवानी तथा संघर्ष की कहानी आदि विशेषणों से संबोधित कर रहा है |

२) इतिहास की निशानियों से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: भारत के इतिहास में देश के लिए अनेक नवयुवकों ने अपना तन, मन और धन अर्पित किया है | उन्होंने देश को आजाद रखने के लिए कठोर संघर्ष किया था | आज की युवा पीढ़ी उन नवयुवकों के बलिदान का प्रतीक है | इसलिए कवि उन्हें ‘इतिहास की निशानियों’ विशेषण से संबोधित करता है |

३) कवि किसकी अर्चना करने को कह रहा है ?
उत्तर: कवि स्वतंत्रता की अर्चना करने को कह रहा है | कवि के अनुसार देश के नवयुवकों को अब संघर्ष के लिए तैयार हो जाना चाहिए, ताकि देश की स्वतंत्रता बनी रहे | देश का प्रत्येक व्यक्ति स्वतंत्र ही जन्म ले और स्वतंत्र ही मरे |

४) कवि मनुष्य जीवन में स्वतंत्रता के महत्व को किस प्रकार इंगित करता है ?
उत्तर: कवि देश की स्वतंत्रता को सर्वोच्च वरीयता देता है | उसके अनुसार स्वतंत्र देश के नागरिक का ही आर्थिक, मानसिक और बौद्धिक विकास संभव है | इसलिए वह देश के नवयुवकों को इतिहास की गुलामी याद दिलाते हुए आवाहन कर रहा है कि उन्हें देश की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए संघर्ष करने को तैयार रहना चाहिए | देश का प्रत्येक नागरिक जन्म के समय भी स्वतंत्र हो और मृत्यु के समय भी |

छ) अधिकार लो सदा न भीख माँगते रहो ……………………………. तुम योजना करो |
१) कवि संघर्ष की प्रेरणा किस प्रकार दे रहा है ?
उत्तर: कवि देशवासियों का आवाहन करते हुए कह रहा है कि हमें संघर्ष से भागना नहीं चाहिए, बल्कि देश की रक्षा के लिए हमेशा संघर्ष करने को तैयार रहना चाहिए | हमें अपना अधिकार स्वयं की शक्ति से ले लेना चाहिए | उसके लिए दूसरों से माँगने की आवश्यकता नहीं पड़नी चाहिए | चाहे आँधी उठे या तूफ़ान अर्थात चाहे कितने भी बड़े-बड़े संकट आये, हमें उससे घबराना नहीं चाहिए | इस प्रकार कवि हमें अपने अधिकारों को प्राप्त करने के लिए संघर्ष की प्रेरणा दे रहा है|

२) पद्यांश में चोर शब्द से किस ओर संकेत किया गया है ?
उत्तर: हमारे देश के शत्रु लगातार इस फिराक में रहते हैं कि किस तरह हमारे देश में अपने जासूसों को भेजें | कभी-कभी शत्रु सेना भी चुपके से देश की सीमा के भीतर घुसने का प्रयत्न करती है | देश को हानि पहुँचाने आये ऐसे लोगों के लिए कवि ने चोर शब्द प्रयोग किया है |

३) सशस्त्र योजना बनाने का क्या उद्देश्य है ?
उत्तर: कवि देश की स्वतंत्रता का महत्व जानता है | वह नवयुवकों को चेतावनी दे रहा है कि हमें हमेशा सावधान रहना चाहिए ताकि देश में कोई शत्रु न घुस जाए | हमें देश की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयत्न करना चाहिए | अपने देश की कुशलता से रक्षा के लिए हमें सशस्त्र युद्ध के लिए भी तैयार रहना चाहिए | सशस्त्र योजना बनाने का उद्देश्य देश को उसके आंतरिक और बाह्य शत्रुओं से बचाना है |

४) ‘छाई घटा, चली हिलोर’ से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: प्रस्तुत पद्य खंड में छाई घटा, चली हिलोर का अर्थ है बहुत बड़ी-बड़ी मुसीबतें | कवि कह रहा है कि चाहे देश पर कितना भी बड़ा संकट आ जाये, हमें उस संकट से लड़ने को तैयार रहना चाहिये | हमें संघर्षों से डरकर भागना नहीं चाहिए |

ज) कुचली गयी, स्वतंत्रता कि फनफना उठो …………………………. तुम सामना करो |
१) प्रस्तुत पद्य खंड से क्या संदेश मिलता है ?
उत्तर: प्रस्तुत पद्य खंड देशभक्ति के भाव से भरा हुआ है | इसके द्वारा कवि संदेश दे रहे हैं कि देश पर यदि कोई खतरा आये तो हमें पूरी शक्ति से उसे कुचल देना चाहिए | किसी भी परिस्थिति में देश का सम्मान बने रहना चाहिए | देश की एकता और अखंडता बनी रहनी चाहिए | देश की रक्षा के लिए पूरे संसार से युद्ध करने के लिए तैयार रहना चाहिए |

२) शत्रुओं से देश की रक्षा किस प्रकार करनी चाहिए ?
उत्तर: यदि कोई भी शत्रु हमारे देश की सीमा पार करने का साहस करता है, तो हमें पूरी शक्ति से उसका सामना करके उसे नष्ट कर देना चाहिए | अगर देश पर कहीं भी हमला होता है तो हमें सनसना उठना चाहिए अर्थात अपने क्रोध को अपनी शक्ति बनाकर शत्रु पर आक्रमण कर देना चाहिए |

३) हमें सारे संसार का सामना करने को क्यों तैयार रहना चाहिए ?
उत्तर: यदि देश पर हमला होता है, देश की सुरक्षा और स्वतंत्रता को ख़तरा उत्पन्न होता है तो ऐसी स्थिति में हमें युद्ध करने के लिए तैयार रहना चाहिए | भले ही हमारे विरोध में पूरा संसार हो, हमें अपने देश की रक्षा के लिए पूरे संसार से युद्ध करने के लिए तैयार रहना चाहिए | देश के सम्मान को बचाए रखने के लिए हमें संसार में कहीं भी मुकाबला करने को तैयार रहना चाहिए |

४) देश का अपमान होने पर हमारी क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए ?
उत्तर: यदि कोई हमारे देश का अपमान करता है तो हमें क्रोध में झनझना उठना चाहिये तथा उस अपमान का बदला लेने के लिए अपनी पूरी शक्ति लगा देनी चाहिए | भले ही इसके लिए हमें संसार के किसी भी कोने में मुकाबला करना पड़े, हमें पीछे नहीं हटना चाहिए | इसके लिए हमें पूरे संसार से युद्ध करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए |

प्र.१४ बगिया हरी-हरी, वसुंधरा भरी-भरी …………………………………… तुम वंदना करो | (ICSE 2015)
१) बगिया हरी-हरी तथा वसुंधरा भरी-भरी का मनुष्य की दशा से क्या संबंध है ?
उत्तर: बगिया हरी-हरी तथा वसुंधरा भरी-भरी होने का तात्पर्य है कि हमारा देश प्राकृतिक संपदाओं से भरा पूरा है | भारत की मिट्टी बहुत उपजाऊ है | यहाँ लहलहाते खेत, हरे-भरे जंगल और बाग़-बगीचे हैं | देश में भरपूर खनिज संपदा है | प्राकृतिक संपदाओं से संपन्न ऐसे देश में मनुष्य को हमेशा सुखी होना चाहिए | उसे किसी चीज की कमी नहीं है किंतु फिर भी हमारे देश में गरीबी तथा असमानता है व चारों ओर दुःख फैला हुआ है |

२) कवि को किस दुःख की चिंता है ? कवि अपने इस दुःख को दूर करने के लिए किससे क्या कह रहा है ?
उत्तर: हमारा देश साधन-संपन्न है | फिर भी हमारे देश में कुछ लोग बहुत गरीब हैं तो कुछ बहुत अमीर | कुछ लोग महलों में रह रहे हैं तो कुछ को रहने को झोंपड़े तक नहीं | करोड़ों लोगों को आज भी २ वक़्त की रोटी मिलने में कठिनाई आती है | कवि इस दुःख से अत्यधिक चिंतित है | अपने इस दुःख को दूर करने के लिए कवि देश के नवयुवकों का आवाहन कर रहा है |

३) अपने द्वार को सजाने से पहले कवि क्या करने को कह रहा है ? हमें किन लोगों के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए व क्यों ? समझाकर लिखिए |
उत्तर: देश के लिए अनेक लोगों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया है | उन्होंने अपना जीवन, परिवार, मित्र, बंधु सबका मोह त्याग दिया और देश के लिए न्योछावर हो गए | अपनी मातृभूमि की पुकार पर उन्होंने अपना सर्वस्व त्याग दिया | इसलिए कवि कह रहे हैं कि अपना द्वार सजाने से पहले उन शहीदों के मजार पर दिया जलाना चाहिए | देश में सबसे पहले सम्मान शहीदों को मिलना चाहिए | देश के प्रत्येक व्यक्ति को उनकी कुर्बानी याद रखनी चाहिए |

४) प्रस्तुत कविता का मूलभाव लिखिए |
उत्तर: प्रस्तुत कविता लोगों के मन में देशभक्ति की भावना जगाने के लिए लिखी गयी है | देश के प्रत्येक व्यक्ति को अपने देश के उज्ज्वल हित की कामना करनी चाहिए | हमें इस बात का सतत प्रयत्न करना चाहिए कि हमारा भारत देश धन-धान्य से परिपूर्ण हो तथा यहाँ से गरीबी, बिमारी, दुःख का नामोनिशान मिट जाए | देश के लोगों में भाईचारा बना रहे | आतंकवाद, जातिवाद, प्रांतवाद, भाषावाद जैसी समस्याएँ समाप्त हो जाएँ | देश में हर तरफ शांति हो | हमारा देश विज्ञान के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति करे | भारत देश का व भारत के लोगों का पूरे संसार में सम्मान हो | इसके अलावा यह कविता हमें अपने भूतकाल में की गई गलतियों को न भूलने को भी कह रहा है | हमारी जिन गलतियों ने हमें गुलामी के दिन दिखाए थे, उनसे सबक लेकर भविष्य में ऐसी कोई गलती न हो, यह सुनिश्चित करना चाहिए |

अतिरिक्त प्रश्न
१) आपने अपने मन में भविष्य के भारत के लिए क्या कल्पना कर रखी है ?
उत्तर: प्रत्येक देशभक्त की तरह मैं भी अपने देश के उज्ज्वल हित की कामना करता हूँ | मैं हमेशा कल्पना करता हूँ कि मेरा भारत देश धन-धान्य से परिपूर्ण हो | यहाँ से गरीबी, बिमारी, दुःख का नामोनिशान मिट जाए | देश के लोगों में भाईचारा बना रहे | आतंकवाद, जातिवाद, प्रांतवाद, भाषावाद जैसी समस्याएँ समाप्त हो जाएँ | देश में हर तरफ शांति हो | हमारा देश विज्ञान के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति करे | भारत देश का व भारत के लोगों का पूरे संसार में सम्मान हो | मेरे कल्पना का भारत ऐसा है |

२) हमारे गुलामी के दिनों ने हमें क्या सबक सिखाया है ?
उत्तर: हमारे गुलामी के दिनों ने हमें यह सबक सिखाया है कि यदि हम आपस में लड़ते रहे, तो कोई बाहरवाला आकर इसका लाभ अवश्य उठाएगा | हमें आपस में लड़ाकर जिस तरह एक बार गुलाम बनाया गया, वैसा दोबारा भी किया जा सकता है | गुलाम मनुष्य, मनुष्य नहीं होता, वह पशुओं से भी हीन होता है | उसके आत्मसम्मान को कुचल दिया जाता है | वह दुनिया में कहीं भी जाए किन्तु मातृभूमि की गुलामी का कलंक हमेशा उसके माथे पर लगा रहता है | इस सबक को हमें कभी नहीं भुलना चाहिए |

३) आपकी दृष्टि में भारत की गुलामी के क्या कारण थे ? बीती गुलामियों को न लौटने देने के लिए हमें क्या करना चाहिए ? (ICSE 2010)
उत्तर: भारत की गुलामी का मुख्य कारण हमारी आपस की फूट थी जिसका लाभ शत्रु देश ने उठाया | हम आपस में लड़ते रह गए और शत्रु हमारे देश के एक-एक हिस्से को जीतता गया | बीती गुलामियों को न लौटने देने के लिए हमें आपस में एकजुट होकर रहना होगा | हम करोडों लोगों के शरीर चाहे अलग हो पर देश को आजाद और सुरक्षित रखने के लिए सबके विचार समान होने चाहिए |

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