मिठाई वाला (Mithaiwala)

लेखक: भगवतीप्रसाद वाजपेयी

क) “बच्चों को बहलानेवाला, खिलौनेवाला |”
१) खिलौनेवाले के स्वर का क्या प्रभाव पड़ता ?
उत्तर: खिलौनेवाला बहुत मादक तथा मधुर ढंग से आवाज लगाता था | उसकी आवाज सुनकर सुननेवाला अस्थिर हो उठता था | निकट के मकानों में हलचल मच जाती | छोटे-छोटे बच्चों को अपनी गोद में लिए हुए युवतियाँ चिकों को उठाकर छज्जों पर से नीचे झाँकने लगती | गलियों तथा उनके अंतर्व्यापी छोटे-छोटे उद्यानों में खेलते तथा इठलाते हुए बच्चों का झुण्ड उसे घेर लेता |

२) खिलौनेवाले बच्चों को खिलौने किस तरह बेचता था ?
उत्तर: खिलौनेवाले की आवाज सुनकर गलियों तथा उनके अंतर्व्यापी छोटे-छोटे उद्यानों में खेलते तथा इठलाते हुए बच्चों के झुण्ड आकर उसे घेर लेते | बच्चे खिलौने देखकर पुलकित हो उठते | वे पैसे लाकर खिलौनों का मोल-भाव करने लगते | वो खिलौनेवाले से पूछते “इछका दाम क्या है, औल इछका औल इछका ?” खिलौनेवाला बच्चों को देखता, उनकी नन्ही-नन्ही अँगुलियों तथा हथेलियों से पैसे ले लेता और बच्चों की इच्छानुसार उन्हें खिलौने दे देता |

३) राय विजयबहादुर के बच्चों ने क्या खरीदा था ?
उत्तर: राय विजयबहादुर के दो बच्चे थे, चुन्नू और मुन्नू | दोनों ने खिलौनेवाले से दो पैसे में खिलौने खरीदे थे | चुन्नू ने घोड़ा खरीदा था तथा मुन्नू ने हाथी खरीदा था |

४) बच्चों की माँ किस बात पर आश्चर्यचकित थी ?
उत्तर: चुन्नू तथा मुन्नू ने खिलौने वाले से दो पैसे में खिलौने खरीदे थे | चुन्नू ने घोड़ा खरीदा था तथा मुन्नू ने हाथी खरीदा था | दोनों अपने हाथी-घोड़े लेकर घर-भर उछलने लगे | इससे उनकी माँ रोहिणी का ध्यान उन खिलौनों की तरफ गया | उसने दोनों बच्चों को पूछा कि उन्होंने खिलौने कितने पैसे में खरीदे ? जब उसे पता चला कि खिलौने वाला सिर्फ दो पैसे में खिलौने देकर गया है तो वह आश्चर्यचकित रह गयी |

१) वक्ता और श्रोता का परिचय दीजिये |
उत्तर: प्रस्तुत संवाद की वक्ता रोहिणी है | वह राय विजय बहादुर की पत्नी है | उसके दो छोटे बच्चे हैं चुन्नू और मुन्नू | श्रोता रोहिणी का पुत्र मुन्नू है | वह अभी-अभी अपने भाई के साथ खिलौनेवाले से खिलौना खरीद कर आया है |

२) क्या ‘सस्ते’ में दे गया है और कौन ?
उत्तर: नगर में एक खिलौनेवाला आया था | उसे बच्चों से बड़ा प्रेम था | वह सस्ते दामों में बच्चों को खिलौने बेचता | उसने राय विजय बहादुर के दोनों बच्चों चुन्नू और मुन्नू को भी सिर्फ दो पैसे में एक हाथी तथा एक घोड़ा बेचा था | बच्चों की माँ आश्चर्यचकित थी कि वह इतने सस्ते में खिलौने कैसे बेच सकता है ?

३) सस्ते में देने के पीछे क्या कारण है ?
उत्तर: खिलौनेवाला एक धनी और सुखी व्यक्ति था | उसकी पत्नी व दो छोटे बच्चे थे | उन सबकी अब मृत्यु हो चुकी है | इस संसार में अब उसका कोई नहीं रहा | खिलौनेवाला उनके दुख में घुल-घुलकर मरना नहीं चाहता था | उसने बच्चों से जुडी हुई चीजें बहुत सस्ते दामों में बेचनी शुरू की | खिलौने, बाँसुरी, मिठाई ऐसी चीजों को वो घूम-घूमकर सस्ते दामों पर बेचा करता था | उसे देखते ही बच्चे उसे घेर लेते थे | उन बच्चों में उसे अपने बच्चों का रूप दीखता था | उसका मानना था कि उसके बच्चे वहीं-कहीं किसी और के घर जन्म लिए होंगे | इसलिए वह सस्ते दामों पर मिठाई बेचा करता था |

४) बच्चों को क्या खरीदकर प्रसन्नता होती है ?
उत्तर: एक खिलौनेवाला नगर में आया है जो बहुत सस्ते दामों पर खिलौना बेच रहा है | बच्चों को उससे खिलौने खरीदने में बहुत प्रसन्नता होती है |

ग) “तुम लोगों को झूठ बोलने की आदत ही होती है | देते होंगे सभी को दो-दो पैसे में, अहसान का बोझ मुझपर लाद रहे हो |”
१) वक्ता कौन है ?
उत्तर: वक्ता राय विजय बहादुर हैं | वो अपनी पत्नी के कहने पर अपने बच्चों चुन्नू तथा मुन्नू के लिए मुरली खरीद रहे हैं | वो उनका दाम जानना चाहते थे | मुरलीवाले ने उन्हें बताया कि वैसे तो मुरली तीन-तीन पैसे के हैं पर वो विजय बाबू को दो-दो पैसे में दे देगा |

२) श्रोता का परिचय दीजिये | उसकी वेशभूषा कैसी है ?
उत्तर: श्रोता तीस-बत्तीस वर्ष का दुबला-पतला युवक है | वह बीकानेरी रंगीन साफा बाँधता है | वह अपने नगर का एक धनी तथा प्रतिष्ठित व्यक्ति था | उसकी पत्नी तथा बच्चों की मृत्यु हो चुकी है | इसलिए अब वह बच्चों से जुडी हुई चीजें सस्ते दामों पर बेचता है, जैसे खिलौने, मिठाई, मुरली आदि | ताकि वह हमेशा बच्चों से मिलता जुलता रहे, उनसे बातें करता रहे | उसे उन बच्चों में अपने बच्चों की छवि दिखती है | फिलहाल वो मुरली बेच रहा है |

३) नगर भर में मुरली वाले के बारे में क्या चर्चा थी ?
उत्तर: नगर भर में मुरलीवाले के आने का समाचार फ़ैल गया था | लोग आपस में चर्चा करते हुए कहते “भई वाह ! मुरली बजाने में वह एक ही उस्ताद है | मुरली बजाकर, गाना सुनाकर वह मुरली बेचता भी है | सो भी दो-दो पैसे | भला इसमें उसे क्या मिलता होगा ! मेहनत भी तो न आती होगी |”

४) श्रोता कम पैसों में मुरली क्यों बेचता है ?
उत्तर: श्रोता अपने नगर का धनी तथा प्रतिष्ठित व्यक्ति था | उसकी पत्नी तथा बच्चों की मृत्यु हो चुकी है | इसलिए अब वह बच्चों से जुडी हुई चीजें सस्ते दामों पर बेचता है, जैसे खिलौने, मिठाई, मुरली आदि | ताकि वह हमेशा बच्चों से मिलता जुलता रहे, उनसे बातें करता रहे | उसे उन बच्चों में अपने बच्चों कि छवि दिखती है | उसे व्यवसाय कर पैसे नहीं कमाने हैं | उसने बच्चों को बेचने के लिए एक साथ एक हजार मुरलियाँ बनवाई थी, इससे उसे मुरलियाँ सस्ते दामों पर मिली | इसलिए वह मुरली सस्ते दामों पर बेच रहा है |

५) मुरलीवाले से मुरली के दाम सुनकर विजय बाबू के मन में क्या आया ? उन्होंने मुरलीवाले से क्या कहा ?
उत्तर: मुरलीवाले ने विजयबहादुर को बताया कि वैसे तो मुरली के दाम तीन पैसे हैं पर वो उन्हें दो-दो पैसे में देगा | उसकी बात सुनकर विजय बाबू मुस्कुरा दिए तथा मन में सोचा “कैसा ठग है ! देता सबको इसी भाव से है, पर मुझपर उलटा अहसान लाद रहा है |” उन्होंने मुरलीवाले से कहा कि “तुम लोगों की झूठ बोलने की आदत ही होती है | देते होंगे सभी को दो-दो पैसों में, पर अहसान का बोझ मेरे ऊपर लाद रहे हो |”

६) मुरलीवाला क्यों अप्रतिभ हो उठा ?
उत्तर: मुरलीवाला बहुत कम कीमत पर मुरली बेच रहा था | उसे बच्चों से बहुत लगाव था | इसलिए जो मुरली वह स्वयं २ पैसे में बनाकर लाया था उसे बिना लाभ के दो पैसे में ही बेच रहा था | इसके बावजूद जब राय विजयबहादुर ने उस पर आरोप लगाया कि वह झूठ बोल रहा है | वह सभी को दो पैसे में ही मुरली देता होगा | पर उन्हें सस्ते में दे रहा है ऐसा कह कर उनपर अहसान का बोझ लाद रहा है | मुरलीवाला यह सुनकर अप्रतिभ हो उठा |

७) वक्ता का संवाद सुनकर श्रोता क्या कहता है ?
उत्तर: वक्ता राय विजय बहादुर का संवाद सुनकर श्रोता एकदम अप्रतिभ हो उठता है | वह कहता है “आपको क्या पता बाबू जी कि इनकी असली लागत क्या है | यह तो ग्राहकों का दस्तूर होता है कि दुकानदार चाहे हानि उठाकर चीज क्यों न बेचे, पर ग्राहक यह समझते हैं कि दुकानदार मुझे लूट रहा है | आप भला काहे को विश्वास करेंगे ! लेकिन सच पूछिए तो बाबूजी, इनका असली दाम दो ही पैसा है | आप कहीं से भी दो-दो पैसे में ये मुरलियाँ नहीं ला सकते | मैंने तो पूरी एक हजार बनवाई थी, तब मुझे इस भाव में पड़ी |”

घ) “पेट जो न कराए सो थोडा |”
१) उपरोक्त वाक्य से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: भोजन मनुष्य की मूलभूत आवश्यकता है | बिना उसके जीवन संभव नहीं है | मनुष्य के ज्यादातर कार्य रोजी-रोटी कमाकर पेट भरने के लिए ही होते हैं | यदि मनुष्य को भोजन नहीं मिले तो वो उसके लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाता है | पेट भरने के लिए फिर वो गलत सही नहीं सोचता | इस कहानी में भी मुरलीवाला जगह-जगह घूमकर मुरली बेचता है | उसकी अवस्था देखकर रोहिणी के मन में यह ख्याल आता है कि पेट जो न कराये वो थोडा है |

२) रोहिणी ने दादी से मिठाई वाले को रोकने के लिए क्यों कहा ?
उत्तर: गली में मिठाईवाले की आवाज सुनकर रोहिणी पहचान गयी कि यही खिलौनेवाला तथा मुरलीवाला बनकर आया था | रोहिणी को उसका मीठा स्वर तथा बच्चों के प्रति स्नेहसिक्त बातें याद थी | उसके मन में उत्सुकता थी कि वह व्यक्ति इतने सस्ते में बच्चों को चीजें क्यों बेच जाता है ! तथा बच्चों के प्रति उस व्यक्ति के मन में इतना प्रेम क्यों है ! साथ ही साथ वह अपने बच्चों चुन्नू तथा मुन्नू के लिए मिठाई भी खरीदना चाहती थी | इसलिए उसने दादी से कहा कि मिठाईवाले को रोके |

३) मिठाईवाले ने दादी से अपने मिठाई की क्या विशेषता बताई ?
उत्तर: दादी ने रोहिणी के कहने पर मिठाईवाले को रोका था | मिठाईवाले ने अपने मिठाईयों की प्रशंसा करते हुए बताया कि ये नई तरह की मिठाइयाँ हैं, रंग-बिरंगी, कुछ-कुछ खट्टी, कुछ-कुछ मीठी और जायकेदार | बड़ी देर तक मुँह में टिकती है | जल्दी नहीं घुलतीं | बच्चे इन्हें बड़े चाव से चूसते हैं | इन गुणों के सिवाय खाँसी को भी दूर करती है | चपटी, गोल तथा पहलदार गोलियां हैं |

४) दादी तथा मिठाईवाले में क्या मोल-भाव हो रहा था ?
उत्तर: मिठाईवाला पैसे की सोलह गोलियाँ बेचता है | दादी ने उससे एक पैसे की पच्चीस गोलियाँ माँगी | मिठाईवाले ने मना करते हुए कहा कि “नहीं दादी, अधिक नहीं दे सकता | इतनी भी कैसे देता हूँ, यह अब मैं तुम्हें क्या … खैर, अधिक तो नहीं दे सकूँगा |” रोहिणी को सौदा सस्ता लग रहा था इसलिए उसने दादी से कहा कि चार पैसे की मिठाई ले ले | पर दादी इससे आश्वस्त नहीं थी | इसलिए उन्होंने मिठाईवाले से कहा कि पैसे की पच्चीस नहीं तो कम से कम बीस तो दे ही दे |

ङ) “इस व्यवसाय में भला तुम्हे क्या मिलता होगा ?”
१) उपर्युक्त संवाद किसने कहा और क्यों ?
उत्तर: उपर्युक्त संवाद राय विजय बहादुर की पत्नी रोहिणी ने मिठाई वाले से कहा | मिठाई वाला पहले भी २ बार उस नगर में आ चुका है | पहले वो खिलौने तथा मुरलियाँ बेचता था | अब मिठाई बेच रहा है | वह हमेशा ऐसी चीजें बेचता है जो बच्चों को पसंद हो तथा बहुत सस्ते दाम पर बेचता है | इससे रोहिणी को जिज्ञासा हुई कि वह किस प्रकार इस व्यवसाय से लाभ कमाता होगा | इसलिए उसने मिठाई वाले से पूछ लिया |

२) श्रोता कौन है ? उसका व्यवसाय कैसा है ?
उत्तर: श्रोता अपने नगर का धनी तथा प्रतिष्ठित व्यक्ति था | उसकी पत्नी तथा बच्चों की मृत्यु हो चुकी है | इसलिए अब वह बच्चों से जुडी हुई चीजें सस्ते दामों पर बेचता है, जैसे खिलौने, मिठाई, मुरली आदि | ताकि वह हमेशा बच्चों से मिलता जुलता रहे, उनसे बातें करता रहे | उसे उन बच्चों में अपने बच्चों की छवि दिखती है | उसे अपने व्यवसाय से कोई लाभ नहीं होता, न ही वो कोई लाभ कमाना चाहता है | उसके पास पैसे की कोई कमी नहीं है |

३) श्रोता का व्यवसाय करने का उद्देश्य क्या है ?
उत्तर: श्रोता अपने नगर का धनी तथा प्रतिष्ठित व्यक्ति था | उसकी पत्नी तथा बच्चों की मृत्यु हो चुकी है | इसलिए अब वह बच्चों से जुडी हुई चीजें सस्ते दामों पर बेचता है, जैसे खिलौने, मिठाई, मुरली आदि | ताकि वह हमेशा बच्चों से मिलता जुलता रहे, उनसे बातें करता रहे | उसे उन बच्चों में अपने बच्चों की छवि दिखती है | उसका मानना है कि उसके बच्चे भी वहीं-कहीं जन्में होंगे | वह यदि अपने घर में अकले पड़ा रहता तो घुल-घुलकर मरता | इस व्यवसाय के कारण बच्चों के बीच रहकर उसे बहुत सुख-संतोष मिलता है |

४) कहानी के शीर्षक की सार्थकता पर विचार प्रस्तुत करें |
उत्तर: कहानी का मुख्य पात्र एक ऐसा व्यक्ति है जो आर्थिक दृष्टी से संपन्न तो है पर उसकी पत्नी तथा बच्चों की मृत्यु हो चुकी है | इसलिए अब वह बच्चों से जुडी हुई चीजें सस्ते दामों पर बेचता है, जैसे खिलौने, मिठाई, मुरली आदि | ताकि वह हमेशा बच्चों से मिलता जुलता रहे, उनसे बातें करता रहे | उसे उन बच्चों में अपने बच्चों कि छवि दिखती है | उसका मानना है कि उसके बच्चे भी वहीं-कहीं जन्में होंगे | प्रस्तुत कहानी का शीर्षक ‘मिठाई वाला’, खिलौनेवाला अथवा मुरली वाला तीनों रखा जा सकता था किंतु कहानी के मुख्य पात्र का पूरा परिचय तभी मिलता है जब वो मिठाई वाले के रूप में आया हुआ होता है | इसलिए कहानी का शीर्षक मिठाई वाला उपयुक्त है |

प्र.२ परिवार न हो तो संसार की सारी संपत्ति अर्थहीन लगती है | पाठ को आधार मानकर इस विषय में अपने विचार लिखिए |
उत्तर: मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है | वह अपने परिवार के साथ रहकर समाज के बीच सुख भोगना चाहता है | अकेले सुख भोगना उसके स्वभाव में नहीं है | प्रस्तुत पाठ का मुख्य पात्र भी एक धनी व्यक्ति है | जो अपनी पत्नी तथा दो बच्चों के साथ सुखी जीवन जी रहा था | समय के फेर में उसके परिवार के हर सदस्य की मृत्यु हो गयी | अब उस व्यक्ति को अपना धन और वैभव सब कुछ अर्थहीन लगता है | उसकी अपार धन संपत्ति उसे सुख नहीं दे पायी | उस धनी व्यक्ति की तरह ही परिवार न हो तो प्रत्येक मनुष्य के लिए संसार की सारी संपत्ति अर्थहीन है|

प्र.३ क्या दूसरों को सुख बाँटकर मनुष्य अपने दुःख दूर कर सकता है ?
उत्तर: दूसरों को सुख बाँटने के लिए निस्वार्थ भाव से किया हुआ काम मनुष्य के मन को अपार संतोष देता है | जब मनुष्य दूसरों की भलाई के लिए काम करता है तो उसकी अंतर आत्मा उसे धन्यवाद देती है | जिन लोगों को उसने सुख बाँटा है वो भी उसे ह्रदय से धन्यवाद देते हैं, प्रेम देते है | इससे मनुष्य का स्वयं का दुःख कहीं खो जाता है | परहित में किया हुआ कार्य मनुष्य के ह्रदय को शीतल कर उसकी हर पीड़ा को दूर कर देता है |

प्र.४ व्यक्ति विधाता की लीला के समक्ष विवश होता है, तथापि दुःख की घड़ी में विलाप करने के स्थान पर अन्य माध्यमों से स्वयं को खुश करने के प्रयत्न का नाम ही सच्ची मनुष्यता है | मुरलीवाले के चरित्र को ध्यान में रखकर इन पंक्तियों पर अपने विचार स्पष्ट कीजिये |  (ICSE 2014)
उत्तर: मनुष्य ने आज विज्ञान में अभूतपूर्व प्रगति कर ली है | प्रकृति की कई चीजों को उसने अपने लाभ के हिसाब से मोड़ लिया है, किंतु अब भी वो अपने भाग्य को नहीं जीत पाया है | विधाता कब, कैसी लीला रचे, इसका कोई अंदाजा नहीं | क्षण भर में राजा को रंक व रंक को राजा बना देता है | उसके सामने मनुष्य विवश है | कुछ लोग विधाता के इस खेल से निराश हो जाते हैं व जीवन भर दुःखी रहते हैं | तो इसके विपरीत कुछ मनुष्य विधाता की उसी लीला में किसी और माध्यम से अपनी प्रसन्नता का कारण खोज लेते हैं | इसी का नाम सच्ची मनुष्यता है | प्रस्तुत पाठ में मुरली वाला एक संपन्न व्यक्ति है | उसका हँसता-खेलता परिवार था | समय के फेर से पत्नी, बच्चे सबकी मृत्यु हो गयी | उसके लिए संसार में कुछ नहीं बचा | पर उसने घुट-घुटकर मरने की बजाय दूसरों के बच्चों में अपनी प्रसन्नता खोज ली | वह बच्चों को कभी खिलौने, कभी मुरली तो कभी मिठाई सस्ते दामों पर बेचता | इससे बच्चे भी प्रसन्न रहते व उसका स्वयं का दुःख भी समाप्त हो गया | इस तरह अप्रत्यक्ष रूप से उसने भाग्य को पराजित कर दिया था | भाग्य ने उसे दुःखी करने की कोशिश की, पर नहीं कर पाया | यह एक तरह से विधाता पर मनुष्यता की विजय है |

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