मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ( Essay on Missile Man Dr. APJ Abdul Kalam in Hindi )

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भारत के सबसे लोकप्रिय व्यक्तियों में से एक डॉ. एपीजे कलाम ( Essay on Missile Man Dr. APJ Abdul Kalam in Hindi ) देश के ग्यारहवें राष्ट्रपति थे | वे एक प्रख्यात वैज्ञानिक और जनता के राष्ट्रपति के रूप में प्रसिद्ध थे | भारत के लिए अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलें बनाने के कारण उन्हें मिसाइल मैन के नाम से भी जाना जाता था | अपनी सादगी, अनुशासन, काम के प्रति समर्पण और राष्ट्रवादी सोच के कारण देश में उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि बड़े से बड़े अभिनेता, खिलाड़ी और राजनेता को भी ईर्ष्या हो जाए | देश की वर्तमान युवा पीढ़ी के लिए उनका जीवन आदर्श है |

डॉ कलाम का जन्म एक मध्यमवर्गीय मुस्लिम परिवार में हुआ था | उनके पिता ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे किंतु उन्होंने डॉ कलाम ( Essay on Missile Man Dr. APJ Abdul Kalam in Hindi ) की शिक्षा का पूरा ध्यान रखा | खराब आर्थिक स्थिति के कारण अपनी आरंभिक शिक्षा जारी रखने के लिए डॉ कलाम को अख़बार वितरित करने का कार्य भी करना पड़ा था | कलाम ने 1958 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से अंतरिक्ष विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है | स्नातक होने के बाद उन्होंने हावरक्राफ्ट परियोजना पर काम करने के लिये भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान में प्रवेश किया | 1962 में वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में आये जहाँ उन्होंने सफलतापूर्वक कई उपग्रह प्रक्षेपण परियोजनाओं में अपनी भूमिका निभाई | डॉ कलाम की देखरेख में भारत ने अग्नि एवं पृथ्वी जैसे मिसाइलों  को स्वदेशी तकनीक से बनाया | उनकी ही देखरेख में भारत ने 1998 में पोखरण में अपना दूसरा सफल परमाणु परीक्षण किया और परमाणु शक्ति से संपन्न राष्ट्रों की सूची में शामिल हुआ | इस तरह भारत को एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने में डॉ कलाम की महत्वपूर्ण भूमिका रही है |

देश के लिए उनके योगदान को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें भारत के राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाया | 18 जुलाई 2002 को नब्बे प्रतिशत बहुमत से डॉ कलाम भारत के राष्ट्रपति चुने गए | वैसे तो वो एक राजनैतिक व्यक्ति नहीं थे, किंतु उनकी राष्ट्रवादी सोच और देश के कल्याण के लिए उनकी बताई हुई नीतियों के कारण वो बहुत ज्यादा लोकप्रिय हो गए | उन्होंने विंग्स ऑफ फायर, इग्नाइटेड माइंड्स, इंडिया 2020 जैसी कई मशहूर और प्रेरणा देने वाली किताबें लिखी हैं, जो लोगों को खासकर छात्रों को प्रेरित करती है | इन किताबों में उन्होंने अपने जीवन के बारे में, अपने सपनों के भारत के बारे में बहुत कुछ लिखा | वो 2020 तक भारत को एक महाशक्ति बना देना चाहते थे |

डॉ. कलाम ( Essay on Missile Man Dr. APJ Abdul Kalam in Hindi ) पूरा जीवन काम करते रहे | राष्ट्रपति का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी उन्होंने विश्राम नहीं किया | वो कई महाविद्यालयों में व्याख्यान देने जाते | वो जीवन भर एक विद्यार्थी रहे जो हमेशा कुछ न कुछ सीखता रहते थे | साथ ही साथ वो मृत्यु तक हम सबके शिक्षक भी बने रहे | उनकी मृत्यु भी व्याख्यान देते-देते ही हुई थी | अपने निधन से लगभग 9 घण्टे पहले ही उन्होंने ट्वीट करके बताया था कि वह शिलोंग आईआईएम में लेक्चर के लिए जा रहे हैं | व्याख्यान देते-देते उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उनकी मृत्यु हुई |

डॉ कलाम का जीवन हम सब के लिए प्रेरणादायी है | उनके जीवन की कई ऐसी छोटी-मोटी घटनाएँ हैं जो हमें बहुत कुछ सिखा जाती है | जब वो राष्ट्रपति बने थे तो दो सूटकेस लेकर राष्ट्रपति भवन पहुँचे थे | उनकी जरुरत का पूरा सामान उन दो सूटकेसों में आ जाता था | राष्ट्रपति का कार्यकाल पूरा होने पर जब उन्होंने राष्ट्रपति भवन छोड़ा तो भी अपने साथ सिर्फ दो सूटकेस ही ले गए | पाँच वर्षों में उन्हें जो भी भेंटें मिली थी, उसमें से कुछ भी उन्होंने अपने लिए नहीं लिया | जब उनकी मृत्यु हुई तब भी संपत्ति के नाम पर उनके पास दो सूटकेस, कुछ किताबें और कुछ छोटा-मोटा सामान ही था | विलासिता का कोई सामान उन्होंने अपने पास नहीं रखा |

आज जब देश में हर जगह असहिष्णुता की चर्चा है, तब ऐसे समय में डॉ कलाम जैसे व्यक्तित्व की हमें बहुत आवश्यकता है | वो हमारे देश के धर्मनिरपेक्ष मुल्यों के सबसे बड़े प्रतीक थे | वो क़ुरान और भगवद्गीता दोनों का अध्ययन करते थे | कलाम ने कई स्थानों पर उल्लेख किया है कि वे तिरुक्कुरल का भी अनुसरण करते हैं | उनके भाषणों में कम से कम एक कुरल का उल्लेख अवश्य रहता था | जब डॉ कलाम पहली बार रक्षा सलाहकार बने तो उस समय मुलायम सिंह यादव देश के रक्षा मंत्री थे | उन्होंने कई जगह यह कहकर बड़प्पन दिखाने की कोशिश की कि उन्होंने एक मुस्लिम को रक्षा सचिव बनाया है | डॉ कलाम को जब यह बात पता चली तो वो तुरंत मुलायम सिंह यादव के पास पास गए और कहा कि वो जो कुछ भी हैं उनकी योग्यता से हैं | उन्हें धर्म के कारण पद देने की बात न कही जाए अन्यथा उनका पद वापस ले लिया जाए |

कलाम साहब ( Essay on Missile Man Dr. APJ Abdul Kalam in Hindi ) ने अपने जीवन के बारे में एक बार कहा था “…मैं यह बहुत गर्वोक्ति पूर्वक तो नहीं कह सकता कि मेरा जीवन किसी के लिये आदर्श बन सकता है; लेकिन जिस तरह मेरी नियति ने आकार ग्रहण किया उससे किसी ऐसे गरीब बच्चे को सांत्वना अवश्य मिलेगी जो किसी छोटी सी जगह पर सुविधाहीन सामजिक दशाओं में रह रहा हो | शायद यह ऐसे बच्चों को उनके पिछड़ेपन और निराशा की भावनाओं से विमुक्त होने में अवश्य सहायता करे |” उनका जीवन सिर्फ गरीब बच्चों को ही नहीं बल्कि पूरे भारतवासियों को निराशा से मुक्त होने में सहायता करता है |

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