ममता (Mamta)

लेखक : जयशंकर प्रसाद

क) “चुप रहो ममता ! यह तुम्हारे लिए है |”
१) वक्ता का परिचय दें |
उत्तर: वक्ता रोहतास दुर्ग के सम्राट के महामंत्री हैं | उनका नाम चूड़ामणि है | उन्हें पता है कि उनके राजा का शासन अब समाप्त होने को है | ममता उनकी इकलौती पुत्री है, जो विधवा हो चुकी है | अपनी पुत्री के भविष्य को लेकर वक्ता काफी चिंतित हैं |

२) वक्ता का श्रोता से क्या संबंध है ?
उत्तर: वक्ता रोहतास दुर्ग के सम्राट के महामंत्री हैं | उनका नाम चूड़ामणि है | श्रोता उनकी इकलौती पुत्री ममता है | चूड़ामणि ममता के भविष्य को लेकर अत्यंत चिंतित रहते हैं, इसलिए उन्होंने अपने राजा से धोखा करते हुए शेरशाह द्वारा दी हुई रिश्वत स्वीकार कर ली थी |

३) वक्ता श्रोता के लिए क्या और कहाँ से लाया था ?
उत्तर: वक्ता चूड़ामणि श्रोता ममता के भविष्य के बारे में बहुत चिंतित हैं | ममता उनकी इकलौती पुत्री है तथा विधवा है | चूड़ामणि को पता है कि उनके राजा का राज्य अब ज्यादा दिन नहीं टिकने वाला | जिस प्राचीन सामंत-वंश के वे मंत्री है, वो अब विनाश की ओर जा रहा है | शेरशाह किसी भी दिन रोहतास पर अधिकार कर सकता है | इसलिए चूड़ामणि ने शेरशाह से रिश्वत में बहुत सारा सोना स्वीकार कर लिया | चाँदी के बड़े-बड़े थालों में सजाकर ममता को वह सोना भेंट करने लाया था |

४) श्रोता पर वक्ता द्वारा लाई वस्तु का क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर: वक्ता ने शेरशाह से रिश्वत के तौर पर बहुत सारा सोना लिया था तथा बदले में अपने राज्य से गद्दारी की थी | श्रोता इस प्रकार प्राप्त किये हुए धन को देखकर बहुत दुखी व अप्रसन्न हो जाती है | वह अपने पिता को कहती है कि “यह अर्थ नहीं अनर्थ है| हम ब्राह्मण हैं, इतना सोना लेकर क्या करेंगे ? ” उसने अपने पिता को कहा कि वे सोने को वापस लौटा दें | श्रोता को भीख माँगकर खाना स्वीकार था किंतु उत्कोच स्वीकार नहीं कर सकती थी |

ख) “यह महिलाओं का अपमान करना है |”
१) वक्ता तथा श्रोता का परिचय दीजिये |
उत्तर: वक्ता बादशाह शेरशाह के पठान सिपाही थे | वो रोहतास के दुर्ग में प्रवेश कर रहे थे | उनके साथ कई डोलियाँ थी | उनका कहना था कि उन डोलियों में महिलायें हैं | श्रोता रोहतास दुर्ग के सम्राट के मंत्री हैं | उनका नाम चूड़ामणि है | उनको इस बात का संदेह था कि डोलियों में महिलाओं के बजाय शेरशाह के सिपाही हैं |

२) श्रोता डोलियों के आवरण क्यों खुलवाना चाहता था |
उत्तर: श्रोता रोहतास दुर्ग के सम्राट के मंत्री हैं | उनका नाम चूड़ामणि है | उनको इस बात का संदेह था कि पठान सैनिक साथ में जो डोलियाँ लाये हैं उनमे महिलायें नहीं है | बल्कि उनकी जगह सिपाही हैं जो छुप कर रोहतास में प्रवेश कर रहे हैं | इसलिए वो डोलियों के आवरण को खुलवाकर जाँच करना चाहते थे |

३) चूड़ामणि कैसे मारे गए ?
उत्तर: रोहतास दुर्ग के मंत्री चूड़ामणि को इस बात का संदेह था कि पठान सैनिक साथ में जो डोलियाँ लाये हैं उनमे महिलायें नहीं है | बल्कि उनकी जगह सिपाही हैं जो छुप कर रोहतास में प्रवेश कर रहे हैं | इसलिए वो डोलियों के आवरण को खुलवाकर जाँच करना चाहते थे | शेरशाह के सिपाहियों ने इसे महिलाओं का अपमान कहकर लड़ाई शुरू कर दी | इस लड़ाई में चूड़ामणि मारे गए |

ग) “माता ! मुझे आश्रय चाहिए |”
१) आश्रय माँगने वाले का परिचय दें |
उत्तर: आश्रय माँगने वाला व्यक्ति मुगल सम्राट बाबर का पुत्र हुमायूँ था | उसकी आकृति भीषण थी तथा चेहरे पर हताशा झलक रही थी | वह चौसा युद्ध में शेरशाह से पराजित होकर वहाँ से भाग आया था | बुरी तरह थकने की वजह से वह आगे चलने में असमर्थ था |

२) ‘माता’ संबोधन किसके लिए किया गया है ?
उत्तर: माता संबोधन ममता के लिए किया गया है | वह रोहतास दुर्गपति के मंत्री चूड़ामणि की इकलौती पुत्री थी | शेरशाह ने जब रोहतास पर आक्रमण किया तो उसके पिता मारे गए पर वो किसी तरह वहाँ से बच निकली | तब से लेकर अब तक वह काशी के उत्तर में एक खँडहर में झोपड़ी बनाकर रह रही थी |

३) आश्रय माँगने वाले की स्थिति कैसी थी ?
उत्तर: आश्रय माँगने वाला व्यक्ति मुगल सम्राट बाबर का पुत्र हुमायूँ था | वह चौसा युद्ध में शेरशाह से पराजित होकर वहाँ से भाग आया था | बुरी तरह थकने की वजह से वह आगे चलने में असमर्थ था | उसका गला सूख रहा था | साथी छूट गए थे | अश्व गिर पड़ा था | वह व्यक्ति ममता से प्रार्थना करते-करते जमीन पर गिर पड़ा | उसके सामने ब्रह्मांड घूमने लगा था |

४) आश्रय देने से पूर्व आश्रयदात्री ने क्या कहा और क्यों ?
उत्तर: हुमायूँ को आश्रय देने से पूर्व ममता उससे कहती है कि मुगल भी क्रूर होते हैं | उसके मुख पर भी वही रक्त की प्यास है, वही निष्ठुरता है जो शेरशाह में है | अतः वह हुमायूँ को आश्रय नहीं देगी | किंतु तभी उसे अपने ब्राह्मण धर्म का स्मरण आता है | अतिथि देव की उपासना करना, उन्हें आश्रय देना ममता का कर्तव्य था | उसे संदेह था कि मुगल उससे छल भी कर सकता है | इसके बावजूद वह उसे शरण देते हुए कहती है “जाओ भीतर थके हुए पथिक ! तुम चाहे कोई हो, मैं तुम्हे आश्रय देती हूँ | मैं ब्राह्मण कुमारी हूँ, सब अपना धर्म छोड़ दें तो भी मैं भी यों छोड़ दूँ ?”

घ) “मिर्जा मैं उस स्त्री को कुछ भी न दे सका |”
१) वक्ता तथा श्रोता का परिचय दीजिये |
उत्तर: वक्ता मुगल सम्राट बाबर का पुत्र हुमायूँ था | वह चौसा युद्ध में शेरशाह से पराजित होकर वहाँ से भाग आया था | बुरी तरह थकने की वजह से वह आगे चलने में असमर्थ था | इसलिए उसने ममता की झोपड़ी में आश्रय लिया था | श्रोता हुमायूँ का एक घुड़सवार सिपाही है जो हुमायूँ को खोजते-खोजते अपने साथियों के साथ वहाँ पहुँचा था |

२) वक्ता ममता को क्यों खोज रहा था ?
उत्तर: वक्ता मुगल सम्राट बाबर का पुत्र हुमायूँ था | वह चौसा युद्ध में शेरशाह से पराजित होकर वहाँ से भाग आया था | बुरी तरह थकने की वजह से वह आगे चलने में असमर्थ था | इसलिए उसने ममता की झोपड़ी में आश्रय लिया था | वह ममता के इस उपकार के कारण कृतज्ञ था | वह उसे कुछ देना चाहता था | इसलिए वह ममता को खोज रहा था |

३) ममता मृगदाव में क्यों चली गयी ?
उत्तर: ममता ने मुगल सम्राट बाबर के पुत्र हुमायूँ को आश्रय दिया था | वह चौसा युद्ध में शेरशाह से पराजित होकर वहाँ से भाग आया था | बुरी तरह थकने की वजह से वह आगे चलने में असमर्थ था | इसलिए ममता ने उसे अपनी झोपड़ी में आश्रय दिया | अगले दिन प्रातः काल सैकड़ों अश्वारोही हुमायूँ को खोजते-खोजते वहाँ पहुँच गए | उन सबको देखकर ममता भयभीत हो गयी | जब हुमायूँ ने अपने सिपाहियों को उसे खोजने का आदेश दिया तो वह छुपने के लिए मृगदाव में चली गयी |
४) जाते-जाते हुमायूँ ने मिर्जा को क्या आदेश दिया तथा क्यों ?
उत्तर: शेरशाह से युद्ध में पराजित होने के बाद हुमायूँ ने ममता की झोपडी में आश्रय लिया था | अगले दिन उसके सिपाही उसे खोजते हुए वहाँ पहुँचे | हुमायूँ ने अपने सिपाहियों को ममता को खोजने को कहा पर वो मृगदाव में छिप गयी थी | इसलिए नहीं मिली | हुमायूँ उसके उपकार का बदला चुकाना चाहता था | इसलिए वहाँ से जाते-जाते उसने मिर्जा को आदेश दिया कि “मिर्जा उस स्त्री को मैं कुछ न दे सका | उसका घर बनवा देना, क्योंकि विपत्ति में मैंने यहाँ आश्रय पाया था | यह स्थान भूलना मत |”

ङ) “अब तुम इसका मकान बनाओ या महल, मैं अपने चिर-विश्राम गृह में जाती हूँ |”
१) वक्ता का संक्षिप्त परिचय दीजिये |
उत्तर: वक्ता रोहतास के दुर्गपति के मंत्री चूड़ामणि की इकलौती पुत्री है | उसका नाम ममता है | वह विधवा हो चुकी है | शेरशाह ने जब रोहतास पर आक्रमण किया, तब उसके पिता मारे गए थे | वह किसी तरह वहाँ से भाग निकली थी | उसने अपना बाकी जीवन एक खँडहर की झोपड़ी में बिताया | अब वह सत्तर वर्ष की वृद्धा है तथा मरणासन्न है |

२) किसके लिए क्या बनाने की चर्चा चल रही है ?
उत्तर: ममता ने कई वर्षों पूर्व मुगल सम्राट हुमायूँ को आश्रय दिया था जब वह शेरशाह से पराजित होकर आया था | हुमायूँ ने वहाँ से जाने से पहले आदेश दिया था कि ममता के लिए घर बनवा दिया जाए | लगभग ४७ वर्षों बाद मुगल वहाँ वापस आये तथा ममता के लिए वहाँ घर बनाना चाहते थे |

३) बनवाने वाले कौन हैं ? उन्हें किसने भेजा है ?
उत्तर: ममता ने कई वर्षों पूर्व मुगल सम्राट हुमायूँ को आश्रय दिया था जब वह शेरशाह से पराजित होकर आया था | हुमायूँ ने वहाँ से जाने से पहले आदेश दिया था कि ममता के लिए घर बनवा दिया जाए | लगभग ४७ वर्षों बाद मुगल सम्राट अकबर ने वहाँ अपने सिपाहियों को भेजा ताकि ममता क लिए घर बनाया जा सके |

४) स्मारक के रूप में क्या बनाया गया और उस पर क्या लिखा गया ?
उत्तर: शेरशाह से परास्त होने के बाद मुगल सम्राट हुमायूँ ने ममता के पास आश्रय लिया था | जाने से पहले उसने वहाँ ममता के लिए घर बनाने का आदेश दिया था | लगभग ४७ वर्ष बाद मुगल उस जगह पर वापस आये | तब तक ममता ७० वर्ष की हो चुकी थी तथा मरणासन्न थी | मरते-मरते उसने मुगल अश्वारोही को बताया कि सम्राट हुमायूँ ने उसकी झोपड़ी में ही आश्रय लिया था | मुगलों ने उस जगह पर एक अष्टकोण मंदिर बना दिया जिस पर शिलालेख लगाया गया “सातों देशों के नरेश हुमायूँ ने एक दिन यहाँ विश्राम किया था | उनके पुत्र अकबर ने उसकी स्मृति में यह गगनचुम्बी मंदिर बनवाया |” उस शिलालेख में ममता का कहीं नाम नहीं था |

प्र.२ ‘अतिथि देवो भव’ का भाव भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है | इस पर अपने विचार बताइए |
उत्तर: अतिथि देवो भव की भावना भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग है | भारत का हजारों वर्षों का इतिहास है | अनेक जाति, धर्म, भाषा के लोग हमारे देश में आये तथा हमारे देश ने उन्हें शरण दिया | जिन लोगों को पूरे संसार में कहीं स्थान नहीं मिला, उन्हें भी हमारे देश में अपनाया गया है | इसलिए हमारे देश में इतनी विविधता है | बाहर से आये लोगों को कब हम अपना बना लेते हैं, भारतीयता में ढाल लेते हैं, पता ही नहीं चलता | इसलिए अतिथि देवो भाव की भावना को भारतीय संस्कृति का सबसे महत्वपूर्ण भाग माना जाता है |

प्र.३ ममता के किरदार से आपको क्या प्रेरणा मिलती है ?
उत्तर: प्रस्तुत पाठ की मुख्य किरदार ममता एक कर्तव्यपरायण स्त्री है | वह किसी भी परिस्थिति में अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटती | चाहे उसके लिए उसे कष्ट उठाना पड़े या मुसीबत में पड़ना पड़े | बड़े से बड़े लालच का भी उसपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता | ममता से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हमारे कर्तव्य पथ पर चाहे जितनी कठिनाईयाँ आये, हमें हर हाल में अपना कर्तव्य पूरा करना चाहिए | दूसरों को कर्तव्य पथ से मुँह मोड़ते देख, हमें अपना कर्तव्य नहीं त्यागना चाहिए | हमें धन-संपत्ति त्यागना पड़े या अपने प्राण त्यागने पड़े, अपना कर्म हर हाल में पूरा करना चाहिए |

प्र.७ “मैं नहीं जानती कि वह ……………………………………… डर से भयभीत रही थी |”
(ICSE 2015)
१) वक्ता का संक्षिप्त परिचय दीजिये |
उत्तर: वक्ता रोहतास के दुर्गपति के मंत्री चूड़ामणि की इकलौती पुत्री है | उसका नाम ममता है | वह विधवा हो चुकी है | शेरशाह ने जब रोहतास पर आक्रमण किया, तब उसके पिता मारे गए थे | वह किसी तरह वहाँ से भाग निकली | उसने अपना बाकी जीवन एक खँडहर की झोपड़ी में बिताया | अब वह सत्तर वर्ष की वृद्धा है तथा मरणासन्न है | वक्ता का जीवन त्याग व कर्तव्यपरायण का अप्रतिम उदाहरण है |
२) कौन, किसका घर बनवाने की आज्ञा दे गया था और क्यों ?
उत्तर: वर्षों पूर्व मुगल सम्राट हुमायूँ जब शेरशाह से पराजित होकर आया था तो ममता ने उसे आश्रय दिया था | इस उपकार के बदले में हुमायूँ उसे कुछ न दे पाया था | अतः वहाँ से जाने से पहले उसने आदेश दिया था कि ममता के लिए उसी जगह घर बनवा दिया जाए | लगभग ४७ वर्षों बाद मुगल सम्राट अकबर ने वहाँ अपने सिपाहियों को भेजा ताकि ममता के लिए घर बनाया जा सके |

३) झोपड़ी के स्थान पर वहाँ क्या बनवाया गया और उसपर क्या लिखा गया ? अपने शब्दों में लिखिए | बताइए कि वह स्थान किसके नाम का महत्व रखता है ?
उत्तर: मुग़ल सम्राट अकबर ने झोपड़ी की जगह पर एक अष्टकोण मंदिर बनवाया | उस पर शिलालेख लगाया गया कि सातों देशों के नरेश हुमायूँ ने एक दिन उस स्थान पर विश्राम किया था | उनके पुत्र अकबर ने उसकी स्मृति में वह गगनचुम्बी मंदिर बनवाया |
वह स्थान इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि उस स्थान पर ममता जैसी कर्तव्यपरायण व निर्लोभी स्त्री रहती थी जिसने किसी भी परिस्थिति में अपना धर्म नहीं छोड़ा | वहीं उसने प्राण भी छोड़े | इसलिए वह धरती पवित्र थी, किंतु वहाँ बने शिलालेख में ममता का कहीं नाम नहीं था |

४) इस कहानी के माध्यम से लेखक ने क्या संदेश देना चाहा है ?
उत्तर: इस कहानी में लेखक ने ममता के किरदार का प्रयोग करके हमें यह संदेश दिया है कि हमारे कर्तव्य पथ पर चाहे जितनी कठिनाईयाँ आये, हमें हर हाल में अपना कर्तव्य पूरा करना चाहिए | दूसरों को कर्तव्य पथ से मुँह मोड़ते देख, हमें अपना कर्तव्य नहीं त्यागना चाहिए | हमें धन-संपत्ति त्यागना पड़े या अपने प्राण त्यागने पड़े, अपना धर्म हर परिस्थिति में निभाना चाहिए |

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