खेल (Khel)

लेखक : जैनेन्द्र

क) प्रकृति इन निर्दोष परमात्मा-खण्डों को निस्तब्ध और निर्निमेष निहार रही थी |
१) प्रकृति किन्हें निहार रही थी ?
उत्तर: एक सात वर्ष की बालिका सुरबाला गंगा के तट पर एक पैर रेत पर जमाकर भाड़ बना रही थी | पास ही मनोहर नाम का बालक, जो सुरबाला से दो वर्ष बड़ा है, कहीं से एक लकड़ी ले आया है | उससे गंगा के जल को उछाल रहा है | दोनों अपने-अपने खेल में निमग्न थे तथा प्रकृति दोनों को निहार रही थी |

२) बालिका भाड़ से क्या कह रही थी ?
उत्तर: बालिका सुरबाला गंगा के तट पर एक पैर पर रेत जमाकर और थोप-थोपकर भाड़ बना रही थी | भाड़ बनाते-बनाते वह भाड़ से बोली “देख ठीक नहीं बना, तो मैं तुझे फोड़ दूँगी |” फिर वो उसे प्यार से थपका-थपकाकर ठीक करने लगी |

३) गंगा के निर्जन तट पर क्या हो रहा था ?
उत्तर: संध्या का समय था | गंगा के निर्जन तट पर एक बालक तथा बालिका खेल रहे थे | तट पर बहुत सारा रेत पड़ा था | बालिका उस रेत से भाड़ बना रही थी तो बालक कहीं से लकड़ी लाकर गंगा के पानी को छटा-छटा उछाल रहा था | उस समय दोनों बच्चे पूरे संसार को भूल चुके थे तथा गंगा नदी का रेत और पानी ही उनके लिए जीवन था | प्रकृति दोनों निर्दोष बच्चों को निस्तब्ध और निर्निमेष निहार रही थी |

४) पानी से कौन खेल रहा था? जब वह पानी का खेल छोड़कर मुड़ा, तो उसने क्या देखा ?
उत्तर: पानी से मनोहर खेल रहा था | उसके हाथ में एक लकड़ी थी जिससे वह गंगा के पानी को छटा-छटा उछाल रहा था | जब उसने अपना खेल छोड़कर पीछे मुड़कर देखा तो पाया कि बालिका सुरबाला ने एक भाड़ बनाया हुआ है और उसका पूरा ध्यान उसी भाड़ पर अटका है |

५) दोनों बच्चों की हरकतों से बाल मनोविज्ञान का क्या परिचय मिलता है ?
उत्तर: बच्चों का मन निर्दोष होता है | वो संसार के बारे में बहुत ज्यादा नहीं सोचते | जिस चीज में उनका मन लग जाता है वो उसी में लगे रहते हैं | उस समय उनके लिए वही पूरा संसार होता है | यहाँ भी मनोहर और सुरबाला रेत तथा पानी से खेल रहे हैं | फिलहाल रेत से बनाया हुआ भाड़ सुरबाला का पूरा संसार है तथा गंगा का पानी ही मनोहर का पूरा जीवन है |
ख) …नहीं, वह कुटी में नहीं रहेगा, बाहर खड़ा-खड़ा भाड़ …………….. के भीतर ले लूँगी |
१) उक्त कथन सोचने वाले का परिचय दीजिये | अथवा सुरबाला कौन हैं ? (ICSE 2013)
उत्तर: उक्त कथन बोलने वाली एक बालिका है | उसका नाम सुरबाला है | वह सात वर्ष की है | वह गंगातट पर बालू से भाड़ बना रही है | उसके साथ उसका साथी मनोहर है जो उससे थोड़ी ही दूर पर लकड़ी से नदी का पानी उड़ा रहा है |

२) मनोहर कौन है ?
उत्तर: मनोहर एक नौ वर्ष का बालक है | वह स्वभाव से हठी है तथा चंचल है | वह हमेशा सुरबाला को छेड़ता रहता है | उसने सुरबाला द्वारा परिश्रम से बनाया हुआ भाड़ मजाक में तोड़ दिया |

३) मनोहर के विषय में सुरों के क्या विचार है ?
उत्तर: सुरों के विचार में मनोहर अच्छा है पर साथ में वो दंगई और चंचल भी है | वो स्वभाव से जिद्दी भी है | वह हमेशा सुरबाला को छेड़ता रहता है, पर साथ ही साथ उसे सुरबाला से बहुत लगाव भी है | वह सुरबाला को नाराज तथा दुःखी नहीं देख सकता |

४) “वक्ता के माध्यम से घरेलू परिवेश का चित्रण व चिंतन प्रस्तुत हुआ है |” कैसे? स्पष्ट करें |
उत्तर: प्रस्तुत कथन द्वारा लेखक ने घरेलू परिवेश का चित्रण व चिंतन प्रस्तुत किया है| बच्चे अपने मन में ही क्या-क्या कल्पना कर लेते हैं | क्षण में वो नाराज होते हैं तो क्षण में प्रसन्न हो जाते हैं | उसी तरह परिवार की स्त्रियाँ जिस तरह पुरुषों का ख्याल रखती है ताकि उन्हें कष्ट न हो, यहाँ सुरबाला भी मनोहर से नाराज हो या प्रसन्न | पर उसे कष्ट न हो इस बात का ख्याल रखती है | इसलिए वो उसे भाड़ की गरम छत पर आने नहीं देना चाहती | वक्ता के इस प्रकार के व्यवहार द्वारा लेखक ने घरेलू परिवेश का चित्रण व चिंतन प्रस्तुत किया है |

ग) बस ब्रह्माण्ड का सबसे महत्वपूर्ण भाड़ और विश्व की सबसे सुंदर वस्तु तैयार हो गयी |
१) ब्रह्माण्ड का सबसे महत्वपूर्ण भाड़ किसने व कैसे बनाया था ?
उत्तर: सात वर्ष की एक बालिका सुरबाला गंगा के किनारे रेत से खेल रही थी | उसने अपने पैर पर रेत जमाकर थोप-थोप कर भाड़ बनाया | उस भाड़ पर रेत से एक कुटी बनाई | भाड़ में से धुआँ निकालने के लिए उसने एक सींक टेढ़ी करके भाड़ पर गाड़ दी | इस प्रकार बालिका का भाड़ तैयार हुआ था | सामान्य अर्थों में तो वो भाड़ बस बच्चों के खिलौने जैसा था पर उस बालिका के लिए वह संसार का सबसे महत्वपूर्ण भाड़ था |

२) बालिका का मन भाड़ में किस प्रकार खोया हुआ था ?
उत्तर: बालिका अपना बनाया हुआ भाड़ देखकर अति प्रसन्न थी | उसके लिए वह संसार का सबसे महत्वपूर्ण भाड़ था | संसार की सबसे सुंदर वस्तु थी | वह अपने भाड़-श्रेष्ठ को देखकर विस्मित और पुलकित हो रही थी | यदि उस समय कोई बालिका से पूछ्ता कि परमेश्वर कहाँ विराजते हैं तो वह यही बताती कि “इस भाड़ के जादू में |”

३) मनोहर ने सुरबाला के भाड़ का क्या किया ?
उत्तर: मनोहर पानी के साथ खेलना छोड़ जब सुरबाला के पास आया तो उसने देखा कि उसका पूरा ध्यान भाड़ में अटका है | वह भाड़ को एकटक देखते हुए अपनी परमात्मा-लीला के जादू को बुझाने और सुलझाने में लगी हुई थी | मनोहर ने एक जोर का कहकहा लगाकर एक लात में उस भाड़ को तोड़ दिया | उसके बाद जैसे कोई किला फतह किया हो इस गर्व से भरकर चिल्लाया “सुरों रानी !”

४) विद्वान पाठक उस स्थान पर होता तो सुरबाला को क्या समझाता ?
उत्तर: विद्वान पाठक होता तो बच्चों को समझाता कि “यह संसार क्षण भंगुर है | इसमें दुख क्या और सुख क्या ? जो जिससे बनता है, वह उसी में लय हो जाता है- इसमें शोक और उद्वेग की क्या बात है ? यह संसार जल का बुदबुदा है, फूटकर किसी रोज जल में ही मिल जाएगा | फूट जाने में ही बुदबुदे की सार्थकता है | जो यह नहीं समझते, वे दया के पत्र हैं | रे मुर्ख लड़की, तू समझ | सब ब्रह्मांड ब्रह्मा का है और उसी में लीन हो जायेगा | इससे तू किसलिए व्यर्थ व्यथा सह रही है ? रेत का तेरा भाड़ क्षणिक था, क्षण में लुप्त हो गया | रेत में मिल गया | इस पर खेद मत कर, इससे शिक्षा ले | जिसने लात मारकर उसे तोडा है, वह तो परमात्मा का केवल साधन मात्र है | परमात्मा तुझे नवीन शिक्षा देना चाहते हैं | लड़की, तू मुर्ख क्यों बनती है ? परमात्मा की इस शिक्षा को समझ और परमात्मा तक पहुँचने का प्रयास कर | आदि-आदि | ”

घ) “सुरों… ओ सुरिया ! मैं मनोहर हूँ ! मनोहर !… मुझे मारती नहीं |”
१) वक्ता कौन है ? श्रोता से उसका क्या संबंध है ?
उत्तर: वक्ता एक नौ वर्ष का बालक है | उसका नाम मनोहर है | श्रोता एक सात वर्ष की बालिका है जिसका नाम सुरबाला है | दोनों एक-दूसरे के खेल के साथी हैं | मनोहर ने सुरबाला का बनाया हुआ भाड़ तोड़ दिया है | इसलिए वो मनोहर से नाराज होकर बैठी है| मनोहर सुरबाला की नाराजगी के कारण व्याकुल है |

२) वक्ता मारने के लिए क्यों कहता है ?
उत्तर: वक्ता मनोहर ने श्रोता सुरबाला का बनाया हुआ भाड़ तोड़ दिया है | इसलिए वो उससे नाराज होकर बैठी है | वह व्यथा से भरी हुई है तथा मनोहर से बात नहीं कर रही हैं | इससे मनोहर व्याकुल हो उठता है | सुरबाला को मनाने के लिए वो उसे मारने के लिए कहता है | मारने के बाद शायद सुरबाला का गुस्सा शांत हो जाता |

३) श्रोता के मन में वक्ता के प्रति क्या भाव है ? उसके दुःख का क्या कारण था ? (ICSE-13)
उत्तर: श्रोता सुरबाला ने परिश्रम करके रेत का एक भाड़ बनाया था, जिसे वक्ता मनोहर ने लात मारकर तोड़ दिया था | श्रोता इस कारण व्यथा से भर उठी थी | उसके मन में बहुत दुःख था तथा वो मनोहर के प्रति बहुत क्रोधित भी थी | इसलिए वो मनोहर से बात नहीं कर रही थी | पर उसका यह क्रोध कुछ क्षणों का मेहमान था |

४) कहानी के लेखक का संक्षिप्त परिचय दें |
उत्तर: कहानी के लेखक जैनेन्द्र हिंदी कहानी साहित्य के इतिहास में प्रेमचंद के बाद हिंदी कहानी को नये आयाम देनेवाले प्रमुख कहानीकार हैं | उनकी महत्वपूर्ण कहानियों में ‘हत्या’, ‘खेल’, ‘अपना-अपना भाग्य’, ‘बाहुबली’, ‘वातायन’, ‘पाजेब’ आदि हैं | जैनेन्द्र की कहानियों में व्यक्ति के मन की शंकाओं, आशाओं, आकांक्षाओं, प्रश्नों, कुंठाओं आदि से जुडी गुत्थियों का चित्रण ही प्रायः मिलता है | ‘पाजेब’ तथा ‘खेल’ जैसी कहानियाँ उनकी बाल-मनोविज्ञान पर गहरी पकड़ का स्पष्ट प्रमाण है |

ङ) “हम वैसा ही लेंगे |”
१) उक्त संवाद किसने, किससे और कब कहा ?
उत्तर: उक्त संवाद बालिका सुरबाला ने मनोहर से कहा | सुरबाला मनोहर से नाराज थी क्योंकि उसने उसका भाड़ तोड़ दिया था | वो उससे बात नहीं कर रही थी | मनोहर ने उसे मनाने का बहुत प्रयत्न किया तो वो बोली कि उसे उसका भाड़ चाहिए और बिलकुल वैसा का वैसा ही चाहिए जैसा पहले था |

२) क्या लेने की बात की गयी है ?
उत्तर: बालिका सुरबाला ने एक भाड़ बनाया था | जिस पर एक कुटी थी तथा धुँआ निकलने का रास्ता भी था | उसे मनोहर ने लात मारकर तोड़ दिया था | जिससे सुरबाला नाराज हो गयी थी | जब मनोहर ने उसे मनाने का प्रयत्न किया तो सुरबाला ने उससे वही भाड़, वैसा का वैसा वापस माँगा |

३) भाड़ तोड़ने के पीछे मनोहर के कौन से भाव है ?
उत्तर: सुरबाला ने बड़े मन से एक भाड़ बनाया था | जिस पर एक कुटी थी तथा धुँआ निकलने का रास्ता भी था | भाड़ बनने के बाद वो उसे देखकर बहुत प्रसन्न हो रही थी | वो उसमें इतना उलझी थी कि उसे मनोहर के आने का पता नहीं चला | मनोहर चंचल स्वभाव का बालक है और थोड़ा दुष्ट भी है | जब उसने देखा कि सुरबाला बिलकुल अपने भाड़ में खोई हुई है, मनोहर के आने का उसे ध्यान नहीं है | तो उसने सुरबाला का ध्यान खींचने के लिए उस भाड़ को लात मारकर तोड़ दिया |

४) वक्ता अपने भाड़ का क्या स्वरूप चाहती है ?
उत्तर: वक्ता सुरबाला ने बड़े मन से एक भाड़ बनाया था | जिस पर एक कुटी थी तथा धुँआ निकलने का रास्ता भी था | बालक मनोहर ने उसे लात मारकर तोड़ दिया था | सुरबाला अब वैसा का वैसा भाड़ दोबारा चाहती थी | भाड़ के ऊपर एक कुटी होनी चाहिए व धुआँ निकलने का रास्ता भी होना चाहिए |

१) पाठ में संसार की क्षण भंगुरता का चित्रण किया गया है | उस बारे में अपने विचार बताइए | अथवा संसार को क्षण भंगुर क्यों कहा जाता है ? (ICSE 2013)
उत्तर: संसार में हर चीज नाशवान है | जिस चीज का निर्माण हुआ है, उसका विनाश होना तय है | कोई भी चीज कितने भी लंबे समय तक टिके, अनत समय की तुलना में वो लम्बा समय भी एक क्षण के बराबर है | यह संसार पानी के बुलबुले की तरह है, जो कभी भी फूटकर पानी में मिल सकता है | इसलिए संसार में मिलने वाली चीजों से न प्रसन्न होना चाहिए, न शोक मनाना चाहिए |

२) सिद्ध कीजिये की ‘खेल’ कहानी में बालपन की सरलता का चित्रण किया गया है | इस कहानी के माध्यम से लेखक ने किस सत्य को उजागर किया है ? (ICSE 2013)
उत्तर: बालकों का मन अत्यंत सरल होता है | जो चीज उन्हें पसंद आ जाए उसपर उनका मन तुरंत आसक्त हो जाता है | यदि उनकी प्रिय वस्तु को कुछ हो जाए तो उन्हें दुःख भी बहुत होता है | किन्तु उनके मन की प्रसन्नता और अप्रसन्नता ज्यादा समय तक नहीं टिकती | उनके मनोभाव क्षण-क्षण में बदलते हैं | प्रस्तुत कहानी में भी सुरबाला का मनोहर पर क्रोद्ध जिस तरह कुछ क्षणों में पिघल जाता है, उससे भी यह स्पष्ट होता है कि बच्चों के मन में कोई भी भाव लंबे समय तक नहीं टिकता |

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  1. Baptist Menezes August 28, 2017

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