हिमालय (Himalaya)

कवि : रामधारी सिंह ‘दिनकर’

क) साकार, दिव्य, गौरव विराट, ………………………… किस महिमा का वितान ?
१) यहाँ नगपति किसे कहा गया है ?
उत्तर: नगपति का अर्थ होता है पर्वतों का स्वामी | यहाँ नगपति हिमालय पर्वत को कहा गया है क्योंकि हमारे देश में इसे सभी पर्वतों में श्रेष्ठ माना जाता है | भारतीय संस्कृति में हिमालय का स्थान बहुत महत्वपूर्ण है |

२) ‘जननी के हिम-किरीट’ से क्या आशय है ?
उत्तर: यहाँ जननी शब्द कवि ने भारत माता के लिए प्रयोग किया है | हिमालय पर्वत भारत देश के उत्तर दिशा में फैला हुआ है | वो वर्ष के ज्यादातर समय बर्फ से ढँका हुआ होता है | इसलिए ऐसा लगता है जैसे भारत माता के सर पर बर्फ का मुकुट है | इसलिए यहाँ कवि ने हिमालय को मेरी जननी के हिम-किरीट कहा है |

३) उपरोक्त पद्य खंड में हिमालय के लिए किन-किन विशेषणों का प्रयोग हुआ है ?
उत्तर: उपरोक्त पद्य खंड में हिमालय को नगपति, विशाल, साकार, दिव्य, गौरव विराट जैसे विशेषणों से संबोधित किया गया है | इसके अलावा उसे भारत माता का बर्फ से बना मुकुट, युगों-युगों से अजेय, निर्बंध, मुक्त, गर्वोन्नत और महान भी कहा गया है |

४) कवि ने हिमालय को अजेय क्यों कहा है ?
उत्तर: हिमालय वर्ष के ज्यादातर समय बर्फ से ढँका होता है | उसका आकार भी बहुत बड़ा है | हिमालय की चोटियाँ बहुत ऊँची-ऊँची है | उसके चारों ओर गहरी घाटियाँ हैं | इन सब कारणों से भारत के उत्तर में रहने वाले विदेशिओं को हिमालय पार कर भारत में आना बहुत कठिन पड़ता है | इसके अलावा उत्तर से आनेवाली ठंडी हवाओं को भी हिमालय रोक लेता है, भारत आने नहीं देता | अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण हिमालय ने भारत की अनेक आक्रमणों से रक्षा की है | इसलिए कवि इसे अजेय कहता है |

ख) कैसी अखंड यह चीर समाधि …………………………………….. तड़प रहा पद पर स्वदेश |
१) प्रस्तुत कविता किस रचना से ली गयी है ? कवि का परिचय दो |
उत्तर : प्रस्तुत कविता श्री जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित ‘चन्द्रगुप्त’ नामक नाटक से ली गयी है | इसके कवि जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि, नाटककार, कहानीकार, उपन्यासकार और निबंधकार हैं | इनके नाटकों और कविताओं को बहुत लोकप्रियता मिली है | इनकी रचना कामायनी को आधुनिक काल का सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य माना जाता है |

२) खगों के भारत को प्यारा नीड़ समझने का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: सदियों से हमारा देश विदेशियों के लिए आश्रय स्थल रहा है | जिनको संसार में कहीं आश्रय नहीं मिला, भारत भूमि ने उन्हें आश्रय दिया | अनेक धर्मों और देशों के लोग भारत में आए और यहाँ घुल-मिल गए | यहाँ खगों से तात्पर्य विदेशियों से है, जिन्हें हमेशा भारत भूमि पर विश्वास होता है कि उन्हें संसार में कहीं रहने का स्थान मिले न मिले, भारत में जरूर मिलेगा | इसलिए वे भारत को अपना प्यारा नीड़ समझते हैं |

३) बरसाती आँखों के बादल क्या बन जाते हैं ?
उत्तर: कवि कह रहे हैं कि बरसाती आँखों के बादल करुणा से भरे जल में बदल जाते हैं| भारत के वर्षा ऋतु के बादल ऐसे बरसते हैं मानो उनमें से करुणा का जल बरस रहा हो | अर्थात भारतवासियों के ह्रदय में दया तथा करुणा के गुण हैं | वे दूसरों के कष्ट नहीं देख सकते | दूसरों के दुःख देखकर उनकी आँखें इस तरह आँसुओं से भर जाती हैं, जैसे वर्षा ऋतु में बादल पानी से भरे होते हैं | भारतीय संस्कृति में करुणा के महत्व को प्रतिपादित करते हुए कवि ने उक्त पंक्तियाँ लिखी है |

४) अनंत लहरों के किनारा पाने का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: यहाँ अनंत लहरों का प्रयोग करके कवि समुद्र की ओर संकेत कर रहे हैं | भारत का समुद्र तट बहुत बड़ा है | अरब सागर, हिन्द महासागर तथा बंगाल की खाड़ी इन तीनों की सीमा भारत के तट पर समाप्त हो जाती है | इसलिए कवि लिखते हैं कि इस अनंत दिखाई देने वाले समुद्र को भी भारत में आकर किनारा मिल जाता है |

ग) सुखसिन्धु, पंचनद, ब्रह्मपुत्र, ……………………………………. डँस रहे चतुर्दिक विविध व्याल |
१) यहाँ सीमापति कौन है ? वह क्या पुकार रहा है ?
उत्तर: हिमालय सदियों से भारत देश की उत्तरी सीमा की रक्षा करता आया है | इसलिए उसे सीमापति कहा जाता है | भारत पर जब भी कोई शत्रु उत्तर दिशा से आक्रमण करने का प्रयत्न करता है तो हिमालय उसकी राह में बड़ी रुकावट बन जाता है | भारत तक पहुँचने से पहले शत्रु की पूरी सेना को हिमालय पार करना पड़ता है | एक प्रकार हिमालय शत्रुओं को पुकारता है कि भारत को नुकसान पहुंचाने से पहले तू मेरा सर काट, अर्थात पहले मुझे पार कर, फिर भारत पर हमले की सोचना |

२) पुण्यभूमि से यहाँ क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: पुण्यभूमि शब्द यहाँ भारत देश के लिए प्रयोग हुआ है | भारत प्राचीन काल से ही साधु, संतों और महात्माओं का देश रहा है | यहाँ पर अनेक धर्मों का उदय हुआ है | भारत देश विश्व अध्यात्म का केंद्र रहा है | इसलिए भारत को पुण्यभूमि कहते हैं |

३) पुण्यभूमि पर क्या संकट आ पड़ा है ?
उत्तर: पुण्यभूमि शब्द यहाँ भारत देश के लिए प्रयोग हुआ है | भारत पर बहुत बड़े-बड़े संकट आ पड़े हैं | देश चारों तरफ से शत्रुओं से घिरा हुआ है | देश की जनता व्याकुल है | देश गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से जूझ रहा है | इन समस्याओं का कोई हल निकट भविष्य में नहीं दिख रहा है |

४) हिमालय के पुत्र क्यों तड़प रहे हैं ?
उत्तर: आज भारत भूमि पर बहुत बड़े-बड़े संकट आ पड़े हैं | देश चारों तरफ से शत्रुओं से घिरा हुआ है | देश की जनता गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से जूझ रही है | इन समस्याओं का कोई हल निकट भविष्य में नहीं दिख रहा है | इसलिए कवि ने लिखा है कि हिमालय के पुत्र तड़प रहे हैं | यहाँ ‘हिमालय के पुत्र’ शब्द भारतवासियों के लिए प्रयोग किया गया है |

५) “डँस रहे चतुर्दिक विविध व्याल” से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: “डँस रहे चतुर्दिक विविध व्याल” द्वारा कवि यह बताना चाहते हैं कि हमारा देश आज चारों ओर से संकटों से घिरा हुआ है | देश के शत्रु शक्तिशाली हो रहे हैं और भारत के खिलाफ रणनीति बना रहे हैं | देश अपनी पूरी शक्ति से उनका सामना भी नहीं कर पा रहा है क्योंकि आंतरिक समस्याओं ने देशवासियों को लपेट रखा है | देश की जनता गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से जूझ रही है | कवि के अनुसार यह सारी चीजें देश को सर्प के समान डँस रही हैं |

घ) कितनी मणियाँ लुट गईं ? ………………………….. यह सुलग रही है कौन आग ?
१) मणियों के लुटने और वैभव के मिटने से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: हजारों वर्षों तक भारत संसार का सबसे संपन्न देश था | हमारे देश को सोने की चिड़िया कहा जाता था | कई आक्रमणकारियों ने देश पर हमला करके देश की संपत्ति लूटी | देश के सोना, चाँदी, मणियाँ, बहुमूल्य रत्न आदि अनेक चीजें विदेशियों के हाथों में पड़ गयी | इसके बाद अंग्रेज आये | उन्होंने न केवल देश को लूटा बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी तबाह कर दिया | अब भारत वो भूतकाल का वैभवशाली भारत नहीं रहा है | इसलिए कवि लिख रहे हैं कि भारत की मणियाँ लूट ली गयी हैं, वैभव मिट गया है |

२) स्वदेश क्यों वीरान हो गया है ?
उत्तर: विदेशियों ने आक्रमण करके भारत की सारी संपत्ति लूट ली है | भारत की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो चुकी है | देश का वैभव मिट चुका है | देश व्यापक रूप से गरीबी और भुखमरी झेल रहा है | इसलिए कवि लिखते हैं कि स्वदेश वीरान हो गया है |

३) तरुण देश का सन्दर्भ स्पष्ट करते हुए लिखिए कि यहाँ किस ध्वंस-राग की बात की जा रही हैं ?
उत्तर: कवि भारत देश को तरुण कह रहा है क्योंकि हमें आजादी मिले अधिक समय नहीं हुआ है | हमारा देश एक नवयुवक कि तरह प्रगति पथ पर आगे बढ़ने को उत्सुक है | यहाँ ध्वंस-राग से कवि का तात्पर्य विदेशी शासकों द्वारा भारत में किये गये विनाश से है | विदेशी शासकों ने भारत को भरसक लूटा और मार-काट मचाया | युद्ध में अनगिनत भारतीयों की मौत हो गयी | देश सोने की चिड़िया से गरीब और अविकसित देशों की श्रेणी में आ गया | देश में भुखमरी और बेकारी छा गयी | इस विनाश लीला को कवि ध्वंस-राग कहते हैं |

४) कवि किस आग की ओर संकेत कर रहा है ?
उत्तर: कवि भारत के नवयुवकों के ह्रदय में छुपे क्रोध और असंतोष की ओर संकेत कर रहा है | भारत के नवयुवक शांत तो दिख रहे हैं पर उनके ह्रदय में देश की अव्यवस्था के प्रति बहुत नाराजगी है | उनका यह क्रोध और असंतोष समुद्र के अन्तस्तल में छुपे आग की तरह है, जो बाहर से दिखता तो नहीं है पर बहुत विनाशकारी होता है |

ङ) प्राची के प्रांगण-बीच देख ………………………………………. लौटा दे अर्जुन-भीम वीर !
१) स्वर्ण युग के जलने का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: एक समय भारत देश सोने की चिड़िया थी | हमारा देश धन-धान्य से संपन्न, बेशकीमती रत्नों का भंडार था | देश ने भौतिक तथा अध्यात्मिक दोनों क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की थी | वह समय भारत का स्वर्ण युग था | विदेशियों के आक्रमण और शोषण से भारत का वो स्वर्ण युग समाप्त हो गया है | देश संपन्नता के शिखर से विपन्नता के कगार पर आकर खड़ा है | इसलिए कवि भारत के स्वर्ण युग के जलने की बात कह रहा है |

२) प्राची के प्रांगण से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: प्राची का प्रांगण अर्थात पूर्व का आँगन | भारत देश को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पूर्व का आँगन कहा जाता है | इसलिए कवि ने प्राची के आँगन का प्रयोग भारत देश के लिया किया है |

३) कवि हिमालय को सिंहनाद करने का आवाहन क्यों कर रहा है ?
उत्तर: सिंहनाद का अर्थ होता है जोर की गर्जना | जैसे शेर की दहाड़ से पूरा जंगल काँप जाता है, वैसे ही जब हिमालय सिंहनाद करेगा तो देश के दुश्मन काँप जायेंगे | उनके पैर उखड जायेंगे और वो भारत की और कुदृष्टि डालने की हिम्मत नहीं करेंगे |

४) कवि युधिष्ठिर को क्यों नहीं रोकना चाहता ?
उत्तर: भारत देश इस समय संकटों से घिरा है | हमारे शत्रु छल-कपट की सारी नीतियाँ अपनाकर भारत को नुकसान पहुँचाने में लगे हैं | ऐसे समय में देश की रक्षा के लिए कर्मशील योद्धाओं की जरूरत है | धर्म का ज्ञान रखने वाले क्षमाशील युधिष्ठिर ऐसे समय में देश की उचित तरीके से सेवा नहीं कर पायेंगे | इसलिए कवि हिमालय को कह रहा है कि युधिष्ठिर को वो न रोके |

५) कवि किन योद्धाओं को वापस माँग रहा है और क्यों ?
उत्तर: हमारा देश भारत आज चारों ओर से शत्रुओं से घिरा है | देश पर संकट के बादल छाये हुए हैं | ऐसे समय में हमें महापराक्रमी योद्धाओं की आवश्यकता है | जो शत्रुओं का अंत कर देश की रक्षा कर सकें | भारत के इतिहास में दो बड़े महायोद्धाओं का उल्लेख मिलता है – भीम और अर्जुन | महाभारत के युद्ध में दोनों ने मिलकर कौरवों की विशाल और महाशक्तिशाली सेना को परास्त किया था | इसलिए कवि हिमालय से इन दो योद्धाओं को वापस माँग रहा है |

च) कह दे शंकर से, आज करे …………………………………… तू जाग, जाग, मेरे विशाल |
१) कवि प्रलय नृत्य का आवाहन क्यों कर रहा है ?
उत्तर: हिन्दू धर्म में यह मान्यता है कि जब संसार में पाप का बोझ बहुत ज्यादा बढ़ जाता है तो भगवान शिव प्रलय नृत्य कर पूरे संसार का विनाश कर देते हैं | यहाँ कवि प्रलय नृत्य का आवाहन देश के शत्रुओं और देश में छिपी बुराइयों को नष्ट करने के लिए कर रहा है | प्रलय नृत्य द्वारा देश के शत्रुओं का, दुष्ट, अत्याचारी और अन्यायी लोगों का विनाश हो जायेगा | जिससे देश सुरक्षित होगा और देश में शांति स्थापित होगी |

२) ‘हर-हर-बम’ के महोच्चार की क्यों आवश्यकता है ?
उत्तर: ‘हर-हर-बम’ भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए प्रयोग किया जानेवाला मंत्र है | कवि भगवान शिव का आवाहन करना चाहता है ताकि वो प्रलय नृत्य के द्वारा देश के शत्रुओं और देश में छिपी बुराइयों को नष्ट कर सकें, देश को सुरक्षित कर सकें | इसलिए ‘हर-हर-बम’ के महोच्चार की आवश्यकता है |

३) हिमालय के विराट स्वर में निनाद करने से क्या होगा ?
उत्तर: हिमालय के विराट स्वर में निनाद करने से देश पर जो संकट आया है वो दूर होने लगेगा | देशवासियों में जो आलस्य और प्रमाद की भावना भर गयी है, वो दूर हो जायेगी | देशवासी पुरुषार्थी हो जायेंगे | वो शत्रुओं का बहादुरी से सामना कर देश पर आयी सारी मुसीबतों को दूर कर देंगे | देशवासी जो कर्महीनता की स्थिति में है, वह स्थिति हिमालय की हुंकार से समाप्त हो जायेगी |

४) कवि के अनुसार आज तप का समय क्यों नहीं है ?
उत्तर: तप स्वयं के मन की शांति और शुद्धि के लिए किया जाता है | व्यक्ति जब समाज के प्रति अपने सारे कर्तव्य पूरे कर लेता है, तो वो एकांत में जाकर आत्मशुद्धि के लिए तप करता है | वर्तमान समय ऐसा नहीं है | देश पर महासंकट छाया हुआ है | देश की रक्षा के लिए महायोद्धाओं की जरूरत है | इसलिए ऐसी परिस्थिति में सबका यही कर्तव्य है कि वह अपने तन, मन और धन से देश की सेवा में लग जाये | तप करने के लिए यह समय बिलकुल उचित नहीं है क्योंकि देश और समाज के प्रति एक बड़ा कर्तव्य बाकी रह गया है |

अतिरिक्त प्रश्न
१) भारतीय संस्कृति में हिमालय का स्थान महत्वपूर्ण क्यों है ? अथवा हिमालय का भारत की सभ्यता और संस्कृति से क्या संबंध है ? (ICSE 2014) अथवा
हिमालय के सांस्कृतिक महत्व को स्पष्ट कीजिये. (ICSE 2009)
उत्तर: भारतीय संस्कृति में हिमालय का बड़ा महत्वपूर्ण स्थान है | गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियाँ जो हमारे देश में पूजनीय हैं, हिमालय से ही निकलती हैं | हिमालय पर ऐसे अनगिनत तीर्थस्थल हैं, जहाँ देश के करोड़ों लोग प्रतिवर्ष जाकर भगवान के दर्शन करते हैं | इसके अलावा राजनैतिक कारणों से भी हिमालय का अपार महत्व है | अनंत समय से हिमालय देश के शत्रुओं को भारत पर आक्रमण करने से रोकता रहा है | हिमालय की बर्फीली चोटियों को पार कर भारत पर आक्रमण करना बहुत ज्यादा कठिन है | हिमालय उत्तर से आनेवाली शीत हवाओं को भी रोकता है, जिससे भारत का मौसम अपेक्षाकृत गर्म रहता है | इस प्रकार भारतीय संस्कृति में हिमालय का महत्वपूर्ण स्थान है |

२) हिमालय को सुरक्षित रखना आज के युग की प्राथमिकता क्यों है ? (ICSE 2014)
उत्तर: हिमालय भारत के लिए आर्थिक तथा सामरिक रूप से बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है | देश को हिमालय से बहुत सारे प्राकृतिक संसाधन प्राप्त होते हैं | वह उत्तर में शत्रुओं के आक्रमण से भारत की सुरक्षा भी करता है | देश की अनेक बड़ी नदियाँ हिमालय की गोद से ही निकलती है | गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र जैसी नदियाँ जो पूरे भारत को सींचती है, हिमालय से ही निकलती है | हिमालय के इतने महत्वपूर्ण होने के बावजूद हम उसको सुरक्षित नहीं रख पा रहे | ग्लेशिअरों की बर्फ पिघलने के कारण नदियों के लुप्त होने का खतरा हो गया है | हिमालय के जंगलों की अंधाधुंध कटाई हो रही है जिससे वहाँ का संतुलन बिगड़ा है | हिमालय की सुरक्षा पूरे देश से जुड़ी है | इसलिए हिमालय को सुरक्षित रखना आज के युग की प्राथमिकता है |

३) प्रस्तुत कविता में कवि देश के चरित्र में किस तरह के परिवर्तन का आवाहन कर रहा है ?
उत्तर: कवि का मानना है कि देश इस समय घनघोर संकट में है | ऐसे समय में हमें शांति की नीति छोड़कर आक्रामकता की नीति अपनानी चाहिये | हमने बहुत समय तक शांति की भाषा बोल ली, शांति के लिए अनेक कुर्बानियाँ भी दी किन्तु हमारे शत्रु इसे हमारी कमजोरी मान बैठे हैं | अतः ऐसे समय में यदि आवश्यकता पड़े तो हमें युद्ध से पीछे नहीं हटना चाहिए | कवि हमारे देश के राष्ट्रीय चरित्र में आक्रामकता लाना चाहता है |

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