चीफ की दावत (Chief Ki Daawat)

लेखक: भीष्म सहानी

क) “माँ का क्या होगा ?”
१) उपर्युक्त संवाद किसने किससे कहा ? सन्दर्भ स्पष्ट करें |
उत्तर: उपर्युक्त वाक्य मिस्टर शामनाथ ने अपनी पत्नी से कहा |
शामनाथ के घर चीफ की दावत थी | वो और उनकी पत्नी मिलकर घर को सजा रहे थे | घर की एक-एक चीजों को ठीक किया जा रहा था | ऐसे समय में शामनाथ को ध्यान आया कि “माँ का क्या होगा” ? शामनाथ की माँ गाँव की एक साधारण औरत थी | इसलिए शामनाथ को उन्हें चीफ से मिलाने पर शर्म आ रही थी | शामनाथ कुछ ऐसा इंतजाम करना चाहते थे जिससे माँ चीफ के सामने नहीं पड़े |

२) माँ के साथ क्या असुविधा समझी जा रही थी ?
उत्तर: शामनाथ ने अपने चीफ को घर पर दावत पर बुलाया है | शामनाथ की माँ गाँव की एक साधारण औरत है | वो पढ़ी लिखी भी नहीं है | इसलिए शामनाथ को उन्हें चीफ से मिलाने में शर्म आ रही थी | शामनाथ कुछ ऐसा इंतजाम करना चाहता है जिससे माँ चीफ के सामने नहीं पड़े, किंतु शामनाथ को ऐसा तरीका नहीं मिल रहा है | शामनाथ को यह भी डर है कि माँ सो न जाये और नींद में खर्राटे न लेने लगे |

३) माँ के प्रसंग का मुख्य कारण क्या है ?
उत्तर: माँ के प्रसंग का मुख्य कारण है शामनाथ के चीफ का शामनाथ के घर पर दावत के लिए आना | शामनाथ के चीफ अमरीकी हैं जबकि शामनाथ की माँ गाँव की एक साधारण औरत | वो पढ़ी लिखी भी नहीं है | इसलिए उन्हें चिंता हुई कि कहीं माँ चीफ के सामने आ जाये, तो लज्जित न होना पड़े |
शामनाथ ने चीफ को घर इसलिए बुलाया था कि यदि वह खुश हो जाये तो उसे काम में तरक्की मिलेगी किन्तु यदि माँ के कारण चीफ नाराज हो गया तो उसका उद्देश्य विफल हो जायेगा |

४) वक्ता की मानसिकता का परिचय दीजिये |
उत्तर: वक्ता शामनाथ एक मध्यमवर्गीय नौकरीपेशा व्यक्ति है | उसकी मानसिकता एक ऐसे व्यक्ति की है जो शिक्षा प्राप्त करने के बाद गाँव के लोगों को, अनपढ़ लोगों को हीन समझने लगता है | उसके लिए आधुनिकता, दिखावा ही सब कुछ है | शामनाथ की माँ भी गाँव की एक अनपढ़ स्त्री है | इस वजह से उन्हें लोगों से अपनी माँ को मिलाने में शर्म महसूस होती है | उनकी माँ उनके वर्तमान जीवनशैली के अनुसार स्वयं को नहीं ढाल पाई है | इसलिए शामनाथ उन्हें बोझ समझने लगा है |

ख) “और माँ, आज जल्दी सो नहीं जाना | तुम्हारे खर्राटों की आवाज दूर तक जाती है |”
१) वक्ता और श्रोता का परिचय दीजिये |
उत्तर: वक्ता का नाम शामनाथ है जो एक नौकरीपेशा व्यक्ति है | वह पढ़ा लिखा है व पूरी तरह आधुनिकता के रंग में रंगा हुआ है | उसकी जीवनशैली में दिखावा बहुत ज्यादा है |
श्रोता शामनाथ की माँ है | वह गाँव की एक साधारण अशिक्षित स्त्री है | वह स्वयं अपमान और कष्ट झेलकर भी अपने पुत्र का भला ही चाहती है |

२) उक्त संवाद की पृष्ठभूमि क्या है ?
उत्तर: शामनाथ के घर पर चीफ की दावत है | वह चीफ को हर हालत में खुश करना चाहता है | शामनाथ की माँ एक बूढ़ी स्त्री है, जिसे नींद में जोर-जोर से खर्राटे लेने की आदत है | माँ की कोठरी के पास ही बरामदा है जहाँ पार्टी के दौरान लोग खाना खायेंगे | शामनाथ को डर है कि यदि खाना खाने के दौरान माँ अपनी कोठरी में सो जाये और खर्राटे लेने लगे तो उसकी आवाज सबको सुनाई देगी | इसलिए शामनाथ उन्हें सोने के लिए मना कर रहा है |

३) आनेवाला अतिथि कौन है तथा उसे बुलाने का उद्देश्य क्या है ?
उत्तर: शामनाथ एक नौकरीपेशा व्यक्ति है | आनेवाला अतिथि शामनाथ का चीफ है | शामनाथ ने उन्हें अपने घर दावत पर बुलाया है ताकि वह उन्हें प्रसन्न कर पदोन्नति प्राप्त कर सके |

४) संवाद को सुनकर माँ क्या उत्तर देती है ?
उत्तर: अपने पुत्र शामनाथ की बात सुनकर माँ लज्जित हो जाती है | वह अपने पुत्र से कहती है कि खर्राटों को रोकना उसके बस की बात नहीं है | जब से वह बीमारी से उठी है, नाक से साँस नहीं ले सकती | इसलिए नींद में जोर-जोर से खर्राटे लेती है |

ग) “चलो ठीक है | कोई चूड़ियाँ-वूड़ियाँ हों, तो वह भी पहन लो | कोई हर्ज नहीं |”
१) माँ ने चूड़ियाँ न पहनने का क्या कारण बताया ?
उत्तर: शामनाथ के घर चीफ की दावत थी | वो नहीं चाहते थे कि यदि माँ का सामना चीफ से हो जाए तो शर्मिंदा होना पड़े | इसलिए माँ को निर्देश दे रहे थे | उन्होंने माँ को कहा कि चूड़ियाँ हो तो पहन ले पर माँ के पास चूड़ियाँ थी नहीं | उनके सारे जेवर शामनाथ की पढ़ाई में बिक गए थे | इसलिए वो चूड़ियाँ नहीं पहन सकती थी |

२) शामनाथ की उधेड़बुन ख़त्म क्यों नहीं हुई थी ?
उत्तर: शामनाथ ने माँ को समझा दिया था कि किस तरह उसे मेहमानों के सामने नहीं आना है फिर भी उनके मन की उधेड़बुन ख़त्म नहीं हुई | उन्हें डर था कि कहीं चीफ बैठक से बरामदे की तरफ निकल आए तो ? मेहमानों में से कोई और गुसलखाने की तरफ आ गया तो ? ऐसी परिस्थिति में माँ उनके सामने पड़ जायेगी, तो उन्हें लज्जित होना पड़ सकता है|

३) शामनाथ ने माँ को क्या-क्या निर्देश दिए ?
उत्तर: शामनाथ ने माँ से कहा कि जब मेहमान बैठक में बैठे हो तो वो बरामदे में बैठे रहे और जब मेहमान बरामदे में आए तो वो गुसलखाने के रास्ते बैठक में चली जाए | फिर भी शामनाथ को डर था कि माँ चीफ के सामने पड़ सकती है | इसलिए उन्होंने माँ को कहा कि वो कुर्सी पर बिना पैर ऊपर किये बैठा करें | उन्होंने माँ को नंगे पैर न घूमने व खड़ाऊँ न पहनने का भी निर्देश दिया | इसके अलावा माँ को सलवार कमीज पहनने व चूड़ियाँ हो तो वह भी पहनने को कहा | माँ ने सलवार कमीज तो पहन लिया पर उनके पास चूड़ियाँ नहीं थी | शामनाथ ने माँ को यह हिदायत भी दी थी कि यदि चीफ सामने आ जाए तो गुमसुम न बैठे, चीफ कोई बात पूछे तो ठीक से उसका जवाब दे |

४) माँ विधवा सहेली के यहाँ क्यों जाना चाहती थी ?
उत्तर: घर पर चीफ की दावत होने से माँ घबरा उठी थी | यदि चीफ सामने आ गया तो वो क्या जवाब देगी ? अंग्रेजों को तो दूर से देखकर ही वो घबरा उठती थी, चीफ तो अमरीकी है, न मालूम क्या पूछे ? माँ डर गयी थी कि कहीं उनकी वजह से कोई गड़बड़ न हो जाये, इसलिए वो विधवा सहेली के यहाँ जाना चाहती थी |

घ) जो दृश्य उन्होंने देखा, उससे उनकी टाँगे लड़खड़ा गयीं, और क्षण भर में सारा नशा हिरन होने लगा |
१) सब लोग बरामदे में क्यों आए ?
उत्तर: पार्टी बहुत बढ़िया चल रही थी | बातें करते-करते समय कब गुजरा, पता ही नहीं चला | खाते-पीते साढ़े दस बज गए | आखिर सब लोग खाना खाने के लिए उठे और बैठक से बाहर निकले | भोजन का प्रबंध बरामदे में था, इसलिए चीफ और सारे मेहमान शामनाथ के साथ बरामदे में आए |

२) बरामदे का दृश्य देखकर शामनाथ का क्या मन हुआ ?
उत्तर: बरामदे का दृश्य देखकर शामनाथ क्रोधित हो उठे | उनका जी चाहा कि माँ को धक्का देकर उठा दें और कोठरी में धकेल दे, मगर ऐसा संभव नहीं था क्योंकि चीफ तथा बाकी मेहमान पास ही खड़े थे |

३) कौन सा दृश्य देखकर शामनाथ का नशा हिरन होने लगा ?
उत्तर: शामनाथ जैसे ही चीफ तथा दूसरे मेहमानों को लेकर बरामदे में आया, उन्होंने देखा कि माँ कुर्सी पर ज्यों की त्यों बैठी है मगर दोनों पाँव कुर्सी की सीट पर रखे हैं | सिर दायें से बायें और बायें से दायें झूल रहा है और मुँह से गहरे खर्राटों की आवाज लगातार आ रही है | जब सिर टेढ़ा होकर एक तरफ थमता, तो खर्राटे और गहरे हो जाते | फिर जब झटके से नींद टूटती, तो सिर फिर से दायें-बायें झुलाने लगता | पल्ला सिर पर से खिसक गया था, और माँ के झड़े हुए बाल, आधे गंजे सिर पर अस्त व्यस्त बिखर रहे थे | यह सब देखकर शामनाथ का नशा हिरन होने लगा |

४) पार्टी किस तरह सफलता के शिखर चूमने लगी थी ?
उत्तर: शामनाथ की दी हुई पार्टी चीफ को पसंद आ गयी | वार्तालाप रौ में बह रहा था, कहीं कोई रुकावट नहीं थी | साहब चुटकुले और कहानियाँ सुनाने लगे थे, बिलकुल दोस्त परवर हो रहे थे | उनकी पत्नी को भी शामनाथ के घर के पर्दे पसंद आए थे, सोफा-कवर का डिज़ाइन पसंद आया था, कमरे की सजावट पसंद आयी थी | वो बात-बात पर हँसती, बात-बात पर सिर हिलातीं तथा शामनाथ की स्त्री से ऐसे बात कर रही थी जैसे पुरानी सहेली हो | इस तरह शामनाथ की पार्टी सफलता के शिखर चूम रही थी |

ङ) “यूँ नहीं माँ ! तुम तो जानती हो, दायाँ हाथ मिलाया जाता है | दायाँ हाथ मिलाओ |”
१) वक्ता का परिचय दीजिये |
उत्तर: वक्ता का नाम शामनाथ है | वह एक नौकरीपेशा व्यक्ति है | वह पूरी तरह आधुनिकता के रंग में डूबा हुआ है | वह अशिक्षित लोगों को, गाँव के लोगों को, जिन्हें आज की आधुनिक जीवनशैली का अनुभव नहीं है, उन्हें अपने से हीन समझता है | अपनी पदोन्नति कराने के लिए उसने अपने चीफ को घर पर दावत के लिए बुलाया है |

२) किसे, किससे हाथ मिलाने का ढंग सिखाया जा रहा है और क्यों ?
उत्तर: शामनाथ ने अपने घर चीफ को दावत पर बुलाया है | वहाँ चीफ तथा माँ का आमना-सामना होने पर शामनाथ माँ को चीफ से हाथ मिलाने को कहते हैं | इसपर माँ हडबडाकर बायाँ हाथ बढ़ा देती है | इसपर शामनाथ अपनी माँ को हाथ मिलाने का ढंग सिखाते हुए कहते हैं कि दायाँ हाथ मिलाया जाता है, इसलिए दायाँ हाथ मिलाओ |

३) आगंतुक के आगमन का उद्देश्य क्या है ?
उत्तर: आगंतुक एक अमरीकी व्यक्ति है | वो शामनाथ के चीफ हैं | शामनाथ पदोन्नति पाने के लिए उन्हें प्रसन्न करना चाहता है | इसलिए उसने चीफ को अपने घर दावत पर बुलाया है |

४) वक्ता आगंतुक के सामने क्या प्रदर्शित करना चाहता है और क्यों ?
उत्तर: वक्ता शामनाथ अपने चीफ को अपनी स्वामीभक्ति दिखाना चाहता था | वह दिखाना चाहता था कि उसका रंग-ढंग, जीवनशैली बिलकुल पश्चिमी देश के लोगों जैसी ही है | इस वजह से उसने अपने घर को इस तरह से सजाया कि उसके अमरीकी चीफ को पसंद आए | यह सब करके शामनाथ अपने चीफ को खुश करना चाहता था ताकि उसे नौकरी में पदोन्नति मिले |

च) दरवाजा खुलते ही शामनाथ झूमते हुए आगे बढ़ आए और माँ को आलिंगन में भर लिया|
१) माँ हरिद्वार क्यों जाना चाहती थी ?
उत्तर: माँ की काफी उम्र हो चुकी थी | वो अपने बचे हुए दिन हरिद्वार में भगवान का नाम लेते-लेते बिताना चाहती थी | माँ यह भी समझ गयी थी कि उसके रहने के कारण शामनाथ को असुविधा होने लगी है | इन सब वजहों से वो हरिद्वार जाना चाहती थी |

२) शामनाथ माँ को हरिद्वार भेजना क्यों नहीं चाहता था ?
उत्तर: शामनाथ ने चीफ से वादा किया था कि माँ उनके लिए एक फुलकारी बना देंगी | चीफ स्वयं फुलकारी बनाते हुए देखना चाहते थे | अगर माँ हरिद्वार चली गयी तो फुलकारी कौन बनाएगा ? इसलिए शामनाथ माँ को हरिद्वार नहीं भेजना चाहते थे |

३) माँ फुलकारी बनाने को क्यों राज़ी हुई ?
उत्तर: माँ की उम्र बहुत हो गयी थी | उन्हें फुलकारी बनाने में बहुत कठिनाई होगी क्योंकि उन्हें अब ठीक से दिखाई नहीं देता | शामनाथ ने माँ से कहा कि उसे फुलकारी बनाते देख उसके साहब बहुत खुश होंगे | यदि माँ साहब के लिए घर में फुलकारी बना दे तो वो प्रसन्न होकर शामनाथ को बड़ी नौकरी दे सकता है, अफसर बना सकता है | बेटे की यह बात सुनकर माँ फुलकारी बनाने को राज़ी हो गयी क्योंकि वो हमेशा उसका भला चाहती थी |

४) शामनाथ ने माँ को आलिंगन में क्यों भर लिया ?
उत्तर: शामनाथ के घर चीफ की दावत थी | दावत के दौरान चीफ की मुलाकात शामनाथ की माँ से हो गयी | शामनाथ की माँ गाँव की थी, इस बात से चीफ बहुत प्रसन्न हुए | उन्होंने माँ से पुराना देसी गीत सुना | उनकी फुलकारी देखी | और जब शामनाथ ने कहा कि वो माँ से उनके लिए एक फुलकारी बनवा देगा तो चीफ बहुत प्रसन्न हो गए | शामनाथ ने दावत ही इस उद्देश्य से रखी थी कि चीफ को प्रसन्न करके पदोन्नति पा सके | चीफ माँ के कारण बहुत खुश था, इसलिए शामनाथ ने माँ को आलिंगन में भर लिया |

प्र.२ चापलूसी को प्रगति की सीढ़ी की तरह प्रयोग किया जाने लगा है | इसपर अपने विचार लिखिए |
उत्तर: हमारे देश में पिछले कुछ दशकों से चापलूसी का चलन लगातार बढ़ता जा रहा है | लोग यह सोचने लगे हैं कि कार्य स्थलों में पदोन्नति के लिए चापलूसी बहुत जरूरी है | अपने मेहनत या पुरुषार्थ से आगे के बढ़ने के बजाय अपने अधिकारिओं की खुशामद करके आगे बढ़ना चाहते हैं | कोई नेताओं की खुशामद में लगा है तो कोई सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की | कोई-कोई तो आर्थिक लाभ के लिए आपराधिक छवि वाले लोगों की खुशामद भी करते हैं | समाज के एक बड़े वर्ग के मन में यह बात बैठ गयी है कि यदि जीवन में जल्दी से जल्दी प्रगति करनी है तो चापलूसी ही एकमात्र रास्ता है | इसलिए चापलूसी को आज प्रगति की सीढ़ी की तरह प्रयोग किया जाने लगा है |

प्र.३ आधुनिकता की अंधी दौड़ में कई लोग माता-पिता का अपमान करने लगे हैं | वर्तमान समय की इस समस्या पर प्रकाश डालिए |
उत्तर: मनुष्य का जीवन आजकल बड़ी तेज गति से बदल रहा है | विज्ञान और तकनीक की लगातार प्रगति के कारण लोगों की जीवन शैली हर दूसरे दिन बदल रही है | कई लोग ऐसे हैं जो इस बदलते समय के साथ खुद को बदल नहीं पाते | वो अपनी पुरानी जीवनशैली से चिपके रहते हैं | ऐसे में कई बार उनकी संतान उनसे असहज महसूस करने लगती है | उन्हें अपने माता-पिता पर शर्म आने लगती है | माता-पिता आधुनिक रंग-ढंग का हिस्सा नहीं बन पा रहे हैं, यह बात उन्हें अपमानजनक लगती है | आधुनिक दिखना उनके जीवन में बहुत जरूरी होता है | इसलिये वह अपने माता-पिता का अपमान करने लगते हैं |

प्र.४ प्रस्तुत कहानी के आधार पर सामाजिक जीवन की मूल्यहीनता व समाज में फैले भ्रष्टाचार का वर्णन कीजिये | (ICSE 2014)
उत्तर: वर्तमान समय में मनुष्य सिर्फ भौतिक प्रगति की इच्छा रखता है | किसी भी तरह अधिक से अधिक धन कमाना और ऊँचा पद प्राप्त करना ही मनुष्य का लक्ष्य हो गया है, चाहे इसके लिए कोई भी रास्ता अपनाना पड़े | आदर्शों तथा मूल्यों का समाज में कोई स्थान नहीं बचा | आगे बढ़ने के लिए रिश्वत, चापलूसी जैसे उपायों का प्रयोग किया जाता है | समाज में मनुष्य का एक दूसरे पर प्रेम तथा विश्वास लगभग ख़त्म हो चला है | परिवार में लोग बड़ों का सम्मान करना भूल गए हैं | बच्चे माता-पिता का अपमान करें लगे हैं | भौतिक प्रगति की चाह में जो दौड़ शुरू हुई है उसने समाज में अनगिनत बुराइयों के लिए स्थान बना दिया है |

प्र.५ यह माँ का झमेला ही रहेगा ……………………………… मजा जाता रहेगा | (ICSE 2014)
१) वक्ता तथा श्रोता कौन है, वक्ता माँ को झमेला क्यों कह रहा है ?
उत्तर: वक्ता का नाम शामनाथ है जो एक नौकरीपेशा व्यक्ति है | वह पढ़ा लिखा है व पूरी तरह आधुनिकता के रंग में रंगा हुआ है | उसकी जीवनशैली में दिखावा बहुत ज्यादा है | श्रोता रामनाथ की पत्नी है | शामनाथ ने अपने चीफ को घर पर दावत पर बुलाया है | इसलिए वह तैयारी में लगा है | शामनाथ के साथ उसकी माँ भी रहती है जो कि गाँव की एक साधारण औरत है | वो पढ़ी लिखी भी नहीं है | इसलिए शामनाथ को उन्हें चीफ से मिलाने में शर्म आ रही थी | शामनाथ कुछ ऐसा इंतजाम करना चाहता है जिससे माँ चीफ के सामने नहीं पड़े, किंतु शामनाथ को ऐसा तरीका नहीं मिल रहा है | शामनाथ को यह भी डर है कि माँ सो न जाये और नींद में खर्राटे न लेने लगे | इसलिए उसने माँ को झमेला कहा |

२) श्रोता किस बात को लेकर चिंतित है, क्या उसका चिंतित होना उचित है ? तर्क सहीत उत्तर दीजिये |
उत्तर: श्रोता शामनाथ ने अपने चीफ को घर पर दावत पर बुलाया है | इसलिए वह तैयारी में लगा है | शामनाथ के साथ उसकी माँ भी रहती है जो कि गाँव की एक साधारण औरत है | वो पढ़ी लिखी भी नहीं है | इसलिए शामनाथ को उन्हें चीफ से मिलाने में शर्म आ रही थी | शामनाथ कुछ ऐसा इंतजाम करना चाहते है जिससे माँ चीफ के सामने नहीं पड़े, किंतु शामनाथ को ऐसा तरीका नहीं मिल रहा है | शामनाथ को यह भी डर है कि माँ सो न जाये और नींद में खर्राटे न लेने लगे | कोई उल्टी-सीधी बात हो जाये और चीफ को बुरा लगे तो सारा मजा जाता रहेगा इसलिए शामनाथ चिंतित है |
शामनाथ की चिंता अर्थहीन है | बूढ़े लोग नयी पीढ़ी की तरह आधुनिक हो यह जरूरी नहीं हैं | यदि किसी को अपने माता-पिता पर शर्म आये तो यस उसकी मुर्खता है | माता-पिता कैसे भी हो, पूजनीय होते हैं |

३) चीफ़ कौन है ? उसको घर में बुलाने का क्या उद्देश्य है ? उसके लिए क्या-क्या तैयारियाँ की जा रही हैं ?
उत्तर: शामनाथ जहाँ काम करते हैं, चीफ वहाँ के वरिष्ठ अधिकारी हैं | शामनाथ पदोन्नति पाने के लिए उन्हें प्रसन्न करना चाहता है | इसलिए उसने चीफ को अपने घर दावत पर बुलाया है |
चीफ का अच्छे से स्वागत करने के लिए शामनाथ ने पूरी तैयारी कर ली है | कुर्सियाँ, मेज, तिपाईयाँ, नैपकिन, फूल, सब बरामदे में पहुँच गए है | इंतजाम बैठक में कर दिया गया है | घर का फ़ालतू सामान अलमारियों के पीछे और पलंगों के नीचे छिपा दिया गया | घर को इस तरह से सजाया गया है कि उसके अमरीकी चीफ को पसंद आये |

प्र.६ प्रस्तुत कहानी में नई पीढ़ी के किस दृष्टि व व्यवहार का परिचय मिलता है ? (ICSE 2010)
उत्तर: प्रस्तुत कहानी चीफ की दावत में लेखक ने समाज की नई पीढ़ी पर व्यंग्य किया है | आज की नई पीढ़ी जल्दी से जल्दी आगे बढ़ना चाहती है, चाहे इसके लिए कुछ भी करना पड़े | चापलूसी इन लोगों का मुख्य औजार बन गया है | सामाजिक मूल्यों का इनके लिए कोई महत्व नहीं है | किसी भी तरह भौतिक प्रगति करना ही इनका मुख्य लक्ष्य है | इसके लिए कई बार ये पारिवारिक हितों की बलि भी दे देते हैं | माता-पिता का अपमान तो जैसे सामान्य बात हो गयी है | ये नई पीढ़ी पालन-पोषण करनेवाले माता-पिता को भी बुढ़ापे में एक समस्या मानने लगती है | भौतिक प्रगति की जिस अंधी दौड़ में ये शामिल हुए हैं, उसका परिणाम हमारे समाज के लिए बहुत बुरा निकल रहा है |

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  1. Sangita September 19, 2017

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