चप्पल (Chappal)

लेखक: कमलेश्वर

क) मुझे आल इंडिया मेडिकल इंस्टिट्यूट की सातवीं मंजिल पर जाना था |
१) उक्त कथन किसका है ? उसे वहाँ क्यों जाना था ?
उत्तर: उक्त कथन लेखक कमलेश्वर का है | उनकी एक परिचित डॉक्टर है जिसका नाम संध्या है | उनका गंभीर ऑपरेशन हुआ है | वो फिलहाल आल इंडिया मेडिकल इंस्टिट्यूट के आई. सी. यू. में भरती हैं तथा मृत्यु से संघर्ष कर रही हैं | लेखक उनको देखने के लिए अस्पताल की सातवीं मंजिल पर जाना चाहता था |

२) लेखक अस्पताल में क्या सोचता है ?
उत्तर: लेखक का मन अस्पताल जाकर दार्शनिक हो उठा | वो सोचने लगे कि कितना दुख और कष्ट है इस दुनिया में | मृत्यु से लगातार लड़ाई चल रही है | उस दुख और कष्ट को सहने वाले सब लोग एक जैसे ही हैं | दर्द तथा यातना चाहे किसी भी व्यक्ति की हो, उनमें भेद नहीं किया जा सकता | दुनिया के हर माँ के दूध का रंग एक है, और आँसुओं का रंग भी एक ही है | जिस तरह दूध, खून तथा आँसुओं का रंग नहीं बदलता, उसी तरह दुख, कष्ट तथा यातना के रंगों का बँटवारा नहीं किया जा सकता |

३) संध्या का किस रोग के कारण कैसा ऑपरेशन हुआ था ?
उत्तर: संध्या आल इंडिया मेडिकल इंस्टिट्यूट के आई. सी. यू. में भरती थी | उसके पेट का मेजर ऑपरेशन हुआ था | उसकी बड़ी आँत काटकर निकाल दी गयी थी तथा अगले अड़तालीस घंटे क्रिटिकल थे | अभी एक और ऑपरेशन बाकी था जिसमें छोटी आँत को सिस्टम से जोड़ा जाना था |

४) संध्या का पति संध्या की कैसे प्रशंसा करता है ?
उत्तर: संध्या का एक गंभीर ऑपरेशन हुआ है | उसके डॉक्टर पति उसकी प्रशंसा करते हुए कहते हैं कि वो बहुत करेजसली बिहेव कर रही है | वो बोल नहीं सकती | कुछ बताना हो तो लिखकर बता रही है | उसका सारा शरीर आराम कर रहा है तथा सब कुछ आर्टिफिशल मदद से ही चल रहा है |

ख) समाधान चाहे न मिले, पर एक अमूर्त दार्शनिक उत्तर जरूर मिल जाता है |
१) पुरानी सभ्यताओं की क्या खूबी है ?
उत्तर: पुरानी सभ्यताओं की यह खूबी है कि उनकी परम्परा से चली आती संतानों को एक आत्मा नाम की अमूर्त शक्ति भी मिल गयी है | यह सदियों पुरानी सभ्यता मनुष्य के क्षुद्र विकारों का शमन करती रहती है | एक दार्शनिक दृष्टी से जीवन की क्षण भंगुरता का एहसास कराते हुए सारी विषमताओं को समतल करती रहती है |

२) पुरानी सभ्यता का वारिस होने से क्या मानसिक सुविधा मिलती है ?
उत्तर: पुरानी सभ्यता का वारिस होने के नाते यह मानसिक सुविधा मिल जाती है कि हम हर बात, घटना या दुर्घटना का कोई न कोई दार्शनिक उत्तर खोज सकते हैं | समाधान चाहे न मिले पर एक अमूर्त दार्शनिक उत्तर जरूर मिल जाता है |

३) मित्र ने लेखक को संध्या के बारे में क्या बताया ?
उत्तर: मित्र ने लेखक को संध्या के संगीन ऑपरेशन के बारे में बताया तथा उसे देख आने की भी सलाह दी थी | उसने लेखक को आई.सी.यू. में संध्या के केबिन का पता बताया कि आठवें फ्लोर पर ऑपरेशन थियेटर्स हैं और सातवें पर संध्या का आई.सी.यू. है| मेजर ऑपरेशन में संध्या की बड़ी आँत काटकर निकाल दी गयी है और अगले अड़तालीस घंटे क्रिटिकल हैं |

४) इमरजेंसी वार्ड की चीख का लेखक पर क्या असर पड़ा ?
उत्तर: लेखक संध्या को अस्पताल में देखने जा रहा था | संध्या सातवें फ्लोर पर आई.सी.यू. में थी | रास्ता इमरजेंसी वार्ड से होकर जाता था | एक बेहद दर्द भरी चीख इमरजेंसी वार्ड से आ रही थी | कोई घायल मरीज असह्य तकलीफ से चीख रहा था | उस चीख से लेखक की आत्मा दहल उठी | लेखक ने मन में सोचा एक दर्द की चीख और दूसरे दर्द की चीख में क्या अंतर है ! दूध, खून और आँसुओं के रंगों की तरह चीख की तकलीफ भी एक ही होती है |

ग) “और क्या …. माडर्न साधु की तरह रहेंगे | मछलियाँ तलेंगे, खाएँगे और पीएँगे |”
१) लेखक के मित्र का परिचय दो |
उत्तर: लेखक का मित्र इलाहबाद का है | वह अपने रिटायर होने का इंतज़ार कर रहा है | रिटायर होने के बाद वह गंगा किनारे एक झोंपड़ी डालकर रहना चाहता है | उसने ही लेखक को सुझाव दिया कि उसे जाकर संध्या को देखकर आना चाहिए | संध्या की हालत क्रिटिकल है |

२) लेखक के मित्र ने रिटायर होने के बाद के लिए क्या योजना बना रखी थी ?
उत्तर: लेखक का मित्र रिटायर होने के बाद गंगा के किनारे एक झोपड़ी बनाकर रहना चाहता है | पास में वो आठ-दस ताड़ी के पेड़ लगा लेगा | साथ में मछली मारने की एक बंसी ले लेगा | दोपहर तक दो-चार मछलियाँ पकड़ेगा | रात भर जो ताड़ी टपकेगी, उसे फ्रिज में रख लेगा | वह मॉडर्न साधु की तरह रहेगा | मछलियाँ तलेगा, खायेगा और पीयेगा | पेंशन तो उसे मिलती ही रहेगी | वह चाहता था कि उसकी किसी चीज में आसक्ति न रह जाए और वो सुखी होकर मरे |

३) लिफ्ट का देर से आना लेखक को क्यों खल रहा था ?
उत्तर: लेखक संध्या को अस्पताल में देखने जा रहा था | संध्या सातवें फ्लोर पर आई.सी.यू. में थी | रास्ता इमरजेंसी वार्ड से होकर जाता था | एक बेहद दर्द भरी चीख इमरजेंसी वार्ड से आ रही थी | कोई घायल मरीज असह्य तकलीफ से चीख रहा था | उस चीख से लेखक की आत्मा दहल उठी | इस बीच लेखक अपने मित्र के बारे में सोचने लगा | अपने मित्र की निश्चिंतता के बारे में सोचकर लेखक को थोडा अच्छा तो लगा पर इमरजेंसी वार्ड से आनेवाली चीख उसे सताती रही | वो वहाँ से जल्दी जाना चाहते थे पर लिफ्ट को आने में देर हुई | यह देरी लेखक को खल रही थी |

घ) “ बाबा ! चप्पल … ! “
१) उक्त संवाद का वक्ता कौन है ? वह किस दशा में था ?
उत्तर: उक्त कथन का वक्ता एक पाँच साल का बालक है | उसने अस्पताल की धारीदार बहुत बड़ी-सी कमीज पहन रखी थी | वह पाँचवी मंजिल से आठवी मंजिल पर जा रहा था | एक दुर्घटना में उसकी जाँघ की हड्डी टूट गयी थी | उसके पिता ने उसे गोद में उठाया हुआ था | उसे बैठने में तकलीफ हो रही थी | उसे दर्द महसूस तो हो रहा था पर दर्द के कारण का अहसास नहीं था |

२) चप्पल कहाँ गिर गयी थी ? उसे किसने उठाकर पुनः पहनाया ?
उत्तर: बच्चे की एक चप्पल लिफ्ट के पास गिर गयी थी | बच्चे के बोलने पर उसके पिता ने चप्पल उठाकर बच्चे को पहना दी |

३) वक्ता का किस प्रकार का ऑपरेशन हुआ और क्यों ?
उत्तर: सड़क पार करते समय वक्ता को एक गाड़ी ने टक्कर मार दी थी, जिससे उसकी जाँघ की हड्डी टूट गयी थी | इलाज कराने के लिए उसे आल इंडिया मेडिकल इंस्टिट्यूट में दाखिल कराया गया था | डॉक्टरों ने उसकी घायल टाँग पर ऑपरेशन किया तथा उसे काट कर निकाल दिया |

४) वक्ता का कौन सा अंग काटा गया था ?
उत्तर: सड़क पार करते समय एक दुर्घटना में वक्ता के जाँघ की हड्डी टूट गयी थी | डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर उसके घायल पैर को काटकर निकाल दिया था |

ङ) मैंने संध्या को इस हाल में देखा तो उदास हो गया |
१) लेखक क्यों उदास हो गया ?
उत्तर: लेखक संध्या को अस्पताल में देखने आया था | उसका एक बड़ा ऑपरेशन हुआ था तथा स्थिति गंभीर थी | लेखक ने अस्पताल में जब शीशे की दीवार से संध्या को देखा तो वो पहचान में नहीं आयी | वह बिलकुल लाचार थी | नलियों तथा मशीनों के बीच उसे पहचानना भी मुश्किल था | लेखक इन सबसे उदास हो गया |

२) संध्या के पति ने लेखक को संध्या के ऑपरेशन के बारे में क्या बताया ?
उत्तर: संध्या के पति ने लेखक को बताया कि संध्या के ऑपरेशन में चार घंटे लगे थे | एक्सेसिव ब्लीडिंग के वजह से यह ऑपरेशन करना पड़ा था | फिलहाल वह आर्टिफीसियल रेस्परेशन पर है | उसका सारा शरीर आराम कर रहा है, सबकुछ आर्टिफीसियल मदत से चल रहा है | इन सबके बावजूद संध्या होश में है |

३) लेखक संध्या के पति से इधर–उधर की बातें क्यों कर रहा था ?
उत्तर: संध्या का पति लेखक को संध्या की सेहत तथा उसके ऑपरेशन के बारे में बता रहा था | लेखक समझ चुका था कि संध्या की हालत बहुत संगीन है | यदि उसी विषय में बात चलती रही तो संध्या के पति की चिंता बढ़ सकती थी | लेखक उनका ध्यान उससे हटाना चाहता था | वो बोलते रहे तथा लेखक चुप रहे, यह भी अच्छा नहीं लगता | इसलिए लेखक यहाँ-वहाँ की बातें करने लगा |

४) ईश्वर तथा मनुष्य के रिश्ते के बारे में लेखक ने क्या बताया है ?
उत्तर: लेखक के अनुसार मनुष्य ने मनुष्य के साथ तो सघन तथा उदात्त संबंध बना लिए हैं पर ईश्वर के साथ वो ऐसा नहीं कर पाया है | मनुष्य अपने ईश्वर के सुख-दुख में शामिल नहीं हो सकता | ईश्वर से उसका संबंध सिर्फ दाता और पाता का है | वह देता है और मनुष्य पाता है | इस तरह ईश्वर तथा मनुष्य का रिश्ता बिलकुल एकतरफा है |

५) लेखक को ईश्वर की क्षमता पर क्यों संदेह हो रहा है ?
उत्तर: लेखक के अनुसार यदि हम मान ले कि ईश्वर ने मनुष्य को बनाया है तो ईश्वर की क्षमता पर विश्वास घटने लगता है | सृष्टि के आदि से वह मनुष्य बनाता आ रहा है परंतु असंख्य प्राण बनाने के बावजूद वह आज तक एक सहज, सम्पूर्ण, और मुक्कमिल मनुष्य नहीं बना पाया | कुछ कमी कहीं तो ईश्वर की व्यवस्था में भी है | इसलिए लेखक को ईश्वर की क्षमता पर संदेह हो रहा है |

च) लिफ्ट के बाहर पहुँचते ही ………………………….. चप्पलें वहाँ कोने में फेंक दी … |
१) चप्पलें किसकी थी और उन्हें किसने और क्यों फेंक दिया ?
उत्तर: चप्पलें एक दुर्घटनाग्रस्त बालक की थी जिसे सड़क पार करते समय एक गाड़ी ने टक्कर मार दी थी | अस्पताल में इलाज के दौरान उस बालक की दुर्घटनाग्रस्त टाँग को काटकर निकाल दिया गया था | अब जब बालक के पैर ही नहीं रहे तो उसकी चप्पलें किस काम की ? यही सोच के उसके पिता ने दोनों नीली हवाई चप्पलों को वहीं कोने में फेंक दी |

२) फेंकने वाले ने बाद में एक चप्पल क्यों उठाई ?
उत्तर: सड़क दुर्घटना में बच्चे के जाँघ की हड्डी टूट गयी थी | डॉक्टरों ने ऑपरेशन करके उसके एक पैर को काट दिया था | बच्चे का पिता इस बात से बहुत ज्यादा विचलित था | इसलिए उसने निराशा में आकर बालक की दोनों चप्पलें फेंक दी थी | फिर उसे ध्यान आया कि बालक का तो सिर्फ एक ही पैर कटा है, दूसरे पैर में अब भी चप्पल की जरुरत पड़ेगी | यही सोचकर उसने फेंकनें के बाद एक चप्पल दोबारा उठाया |

३) फेंकनें वाले ने दूसरी चप्पल भी क्यों उठा ली ?
उत्तर: डॉक्टरों ने बच्चे के दुर्घटनाग्रस्त पैर को काट कर शरीर से निकाल दिया था | बच्चे का पिता इस बात से बहुत दुखी था | इसलिए उसने चप्पलों को फेंक दिया था | फिर उसने सोचा कि बालक का एक ही पैर काटा गया है, एक चप्पल अब भी काम आ सकती है | इसलिए बच्चे के पिता ने एक चप्पल उठा ली | लेकिन फिर उस के मन में आया कि हो सकता है बेहोशी से उठने के बाद बच्चा अपनी चप्पल माँगे | अतः उन्होंने दूसरी चप्पल भी उठा ली |

४) लेखक उक्त क्रियाएँ देखकर मन में क्या सोचता है और क्यों ?
उत्तर: बच्चे के दुर्घटनाग्रस्त पैर को डॉक्टरों ने काटकर शरीर से अलग कर दिया था | इससे दुखी होकर बच्चे के पिता ने उसकी दोनों चप्पलें फेंक दी थी | फिर कुछ सोचकर उसने एक-एक कर दोनों चप्पलें दोबारा उठा ली | उक्त क्रिया को देखकर लेखक ने सोचा कि पता नहीं बेहोशी से उठने के बाद उसका बेटा क्या माँगेगा ? चप्पल माँगेगा या चप्पलों को देखकर पैर माँगेगा ?

प्र.२ हमारा भारतीय दर्शन हमें कष्ट के समय किस प्रकार राहत देता है ?
उत्तर: हमारा भारतीय दर्शन हमें हमेशा से सिखाता रहा है कि यह संसार क्षणभंगुर है | शरीर भी नाशवान है | हम तो अमर आत्मा हैं जिसे कभी कष्ट नहीं हो सकता | इसलिए शरीर को होनेवाला कष्ट वास्तव में हमें नहीं हो रहा है | यह तो इस नाशवान शरीर को रहा है | जिनको इस भारतीय दर्शन पर श्रद्धा होती है, उन्हें कष्ट के समय यह सब सोचकर राहत मिलती है | शरीर की वास्तविक पीड़ा तो कम नहीं होती किन्तु उसे सहने की शक्ति अवश्य मिल जाती है | इस प्रकार हमारा भारतीय दर्शन हमें कष्ट के समय राहत देता है |

प्र.३ मनुष्य की असहायता उसे ईश्वर के शरण ले जाती है | अपने विचार लिखिए |
उत्तर: मनुष्य पर कई बार ऐसे संकट आ जाते हैं कि जहाँ उसका सामर्थ्य समाप्त हो जाता है | उसके बस में कुछ नहीं रहता | वो उस संकट से लड़ नहीं सकता | ऐसे समय उसे किसी ऐसी शक्ति की आवश्यकता होती है, जिसके लिए उस संकट को दूर करना संभव हो | मनुष्य का मन ऐसे समय में जिसे सहायता के लिए खोजता है वो ईश्वर के सिवा कोई और नहीं हो सकता | मनुष्य स्वयं अपने सारे संकटों को दूर नहीं कर सकता | इसलिए मुसीबत के समय मनुष्य अपने आप ईश्वर को याद करता है |

प्र.४ देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं की संख्या किस प्रकार के सामाजिक व्यवहार की तरफ इशारा करती है ?
उत्तर: हमारे देश में सड़क दुर्घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं | लोग सड़क पर गाड़ी चलाने के नियमों का पालन नहीं करते | खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाकर अपनी तथा दूसरों की जान को जोखिम में डालते हैं | यह सारी चीजें इस बात की तरफ इशारा करती हैं कि हम अपने सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति कितने लापरवाह हैं | एक सभ्य समाज में जीने का तरीका हम आज भी सीख नहीं पाए हैं | यहाँ नियमों को तोड़ना गर्व की बात है | देश के नागरिकों का इस तरह का व्यवहार देश को बहुत नुकसान पहुँचाता है |

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  1. Aman parmar December 10, 2015

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