भोलाराम का जीव (Bholaram ka jeev)

लेखक : हरिशंकर परसाई

क) “महाराज वह भी लापता है |”
१) कौन लापता है और कितने दिनों से ?
उत्तर: धर्मराज ने एक यमदूत को भोलाराम के जीव को पकड़ के लाने के लिए धरती पर भेजा था | भोलाराम को शरीर छोड़े पाँच दिन हो गए थे पर यमदूत भोलाराम के जीव को पकड़ कर यमलोक नहीं लाया था | वह पाँच दिन से लापता था |

२) यमदूत की हालत कैसी हो गयी थी ?
उत्तर: धर्मराज ने एक यमदूत को भोलाराम के जीव को पकड़ के लाने के लिए धरती पर भेजा था | भोलाराम को शरीर छोड़े पाँच दिन हो गए थे पर यमदूत भोलाराम के जीव को पकड़ कर यमलोक नहीं लाया था | वह पाँच दिन से गायब था | जब वह यमलोक पहुँचा तो बदहवास-सा नजर आ रहा था | उसका मौलिक कुरूप चेहरा परिश्रम, परेशानी और भय के कारण और भी विकृत हो गया था | उसके साथ भोलाराम का जीव भी नहीं था |

३) धर्मराज क्यों परेशान थे ?
उत्तर: धर्मराज ने एक यमदूत को भोलाराम के जीव को पकड़ के लाने के लिए धरती पर भेजा था | भोलाराम को शरीर छोड़े पाँच दिन हो गए थे और वह यमदूत के साथ यमलोक में आने के लिए रवाना हो चुका था पर अभी तक पहुँचा नहीं था | यमदूत भी उस दिन से लापता था | धर्मराज लाखों वर्षों से असंख्य आदमियों को कर्म तथा सिफारिश के आधार पर स्वर्ग या नरक में निवास स्थान देते आ रहे थे पर ऐसा कभी नहीं हुआ था | इसलिए वह परेशान थे |

४) यमदूत भोलाराम के जीव को साथ क्यों नहीं ला पाया था ?
उत्तर: भोलाराम ने जैसे ही देह त्यागी, यमदूत ने उसे पकड़ा और यमलोक की यात्रा आरम्भ की | नगर के बाहर ज्यों ही उसे लेकर यमदूत एक तीव्र वायु तरंग पर सवार हुआ, त्यों ही भोलाराम उसके चंगुल से छूटकर न जाने कहाँ गायब हो गया | यमदूत ने पाँच दिनों तक पूरा ब्रह्माण्ड छान मारा पर भोलाराम के जीव का कहीं पता नहीं चला | इसलिए यमदूत अपने साथ उसे नहीं ला पाया |

ख) “क्या नरक में निवास स्थान की समस्या अभी हल नहीं हुई है ?”
१) नरक में निवास स्थान की समस्या कैसे हल हुई ?
उत्तर: नरक में पिछले कुछ सालों में बड़े गुणी कारीगर आ गए थे | कई इमारत के ठेकेदार हैं, जिन्होंने धरती पर पूरे पैसे लेकर रद्दी इमारतें बनायीं थी | बड़े-बड़े इंजीनियर भी आ गए थे, जिन्होंने ठेकेदारों के साथ मिलकर पंचवर्षीय योजनाओं का पैसा खाया था | ओवेरसियर हैं, जिन्होंने उन मजदूरों की हाजिरी भरकर पैसा हड़पा था, जो कभी काम पर गए ही नहीं | इन लोगों ने बहुत जल्दी नरक में कई इमारतें तान दी हैं | इससे निवास स्थान की समस्या हल हो गयी |

२) भोलाराम के जीव को इनकम टैक्स वाले क्यों नहीं रोकते ?
उत्तर: भोलाराम गरीब व्यक्ति था | भुखमरा था | उसकी कोई इनकम ही नहीं थी तो टैक्स कहाँ से लगता | इसलिए इस बात की कोई संभावना ही नहीं थी कि उसके जीव को इनकम टैक्स वाले रोकते |

३) धर्मराज ने नारद मुनि को क्या समस्या बताई ?
उत्तर: धर्मराज ने नारद मुनि को अपनी समस्या बताते हुए कहा कि भोलाराम नाम के आदमी की पाँच दिन पहले मृत्यु हुई थी | उसके जीव को दूत यमलोक ला रहा था कि जीव रास्ते में चकमा देकर भाग गया | सारा ब्रह्मांड छान डाला गया है पर जीव कहीं नहीं मिला | ऐसा होने लगेगा तो पाप-पुण्य का भेद ही मिट जाएगा |

४) चित्रगुप्त ने भोलाराम के जीव के बारे में क्या शंका जाहिर की ?
उत्तर: चित्रगुप्त ने धर्मराज से अपनी शंका जाहिर करते हुए कहा कि “महाराज आज कल पृथ्वी पर इस प्रकार का व्यापार बहुत चला है | लोग दोस्तों को फल भेजते हैं और वे रास्ते में ही रेलवेवाले उड़ा लेते हैं | हौजरी के पार्सलों के मौजे रेलवे अफसर पहनते हैं | मालगाड़ी के डिब्बे के डिब्बे रास्ते में कट जाते हैं | एक बात और हो रही है | राजनैतिक दलों के नेता विरोधी नेता को उड़ाकर कहीं बंद कर देते हैं | कहीं भोलाराम के जीव को भी तो किसी विरोधी ने, मरने के बाद भी खराबी करने के लिए नहीं उड़ा दिया ?”

ग) “आगे जाओ, महाराज |”
१) उक्त संवाद किसने और किससे कहा ?
उत्तर: भोलाराम का जीव मरने के बाद कहीं गायब हो गया था | पाँच दिन खोजने के बाद भी वह नहीं मिल पाया था | नारद मुनि उसे खोजने के लिए भोलाराम के घर गए थे | वहाँ उन्होंने जैसे ही नारायण-नारायण की आवाज लगाई, भोलाराम की पुत्री को लगा कि वह कुछ माँगने आए हैं | इसलिए उसने नारद मुनि से कहा “आगे जाओ, महाराज |”

२) श्रोता का परिचय दीजिये |
उत्तर: श्रोता एक पौराणिक पात्र हैं, उनका नाम नारद मुनि है | उन्हें देवताओं का ऋषि माना जाता है | उनमें यह सामर्थ्य है कि वे तीनों लोकों में कहीं भी घूम सकते हैं | देवता संकट के अवसर पर उनकी सहायता लेते रहते हैं | यमराज भी भोलाराम के जीव को खोज न पाने के कारण संकट में थे, इसलिए उन्होंने नारद मुनि से प्रार्थना की कि वो उनकी सहायता करें | नारद मुनि को इस वजह से धरती पर आना पड़ा था |

३) श्रोता किस उद्देश्य से आया है ?
उत्तर: श्रोता नारद मुनि देवताओं के ऋषि है जो संकट में देवताओं की सहायता करते रहते हैं | यमराज भी भोलाराम के जीव को खोज न पाने के कारण संकट में थे, इसलिए उन्होंने नारद मुनि से प्रार्थना की कि वो उनकी सहायता करें | नारद मुनि भोलाराम के जीव को खोजने के लिए यमराज से उसके घर का पता लेकर आए थे |

४) श्रोता को भोलाराम के विषय में क्या पता चलता है ?
उत्तर: श्रोता को पता चलता है कि भोलाराम की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी | पाँच वर्ष पहले वो अपने काम से रिटायर हो चुके थे पर अब तक उन्हें पेंशन मिलनी शुरू नहीं हुई थी | उन्होंने पेंशन पाने के लिए बहुत दरख्वास्त दिए पर रिश्वत न दे पाने के कारण कोई फायदा नहीं हुआ | पाँच वर्षों में उसकी बीवी के सारे गहने बिक गए, घर के बर्तन बिक गए | अंत में चिंता और भूख के कारण भोलाराम की मृत्यु हो गयी |

घ) “साधुओं की बात कौन मानता है ? मेरा यहाँ कोई मठ तो है नहीं | फिर भी मैं सरकारी दफ्तर जाऊँगा और कोशिश करूँगा |”
१) वक्ता का परिचय दीजिये |
उत्तर: वक्ता नारद मुनि देवताओं के ऋषि है जो संकट में देवताओं की सहायता करते रहते हैं | यमराज भी भोलाराम के जीव को खोज न पाने के कारण संकट में थे, इसलिए उन्होंने नारद मुनि से प्रार्थना की कि वो उनकी सहायता करें | नारद मुनि भोलाराम को खोजने के लिए उसके घर आए थे | भोलाराम की पत्नी अपनी गरीबी की दुहाई देकर उनसे प्रार्थना करती है कि किसी तरह सरकारी कार्यालय से भोलाराम की पेंशन पास करा दे | नारद मुनि इसके लिए तैयार हो जाते हैं |

२) संवाद का सन्दर्भ स्पष्ट कीजिये |
उत्तर: नारद मुनि यमराज की प्रार्थना पर भोलाराम के जीव को खोजते हुए उसके घर पहुँचते हैं, जहाँ उन्हें पता चलता है कि भोलाराम की मृत्यु गरीबी के कारण हुई है | उसकी पेंशन पाँच वर्षों से पास नहीं हो रही है | उसके परिवार को भुखमरी का सामना करना पड़ रहा है | भोलाराम की पत्नी ने उनसे प्रार्थना की कि यदि वे किसी तरह भोलाराम की पेंशन दिला देते तो बच्चों को कुछ दिनों के लिए भोजन मिल जाएगा | इस पर नारद जी जवाब देते हुए कहते हैं कि “साधुओं की बात कौन मानता है ? मेरा यहाँ कोई मठ तो है नहीं | फिर भी मैं सरकारी दफ्तर जाऊँगा और कोशिश करूँगा |”

३) ‘मठ’ शब्द से क्या संकेत दिया गया है ?
उत्तर: जितने भी धार्मिक मठ होते हैं, सबका अपना-अपना प्रभाव होता है | वो राजनेताओं तथा अधिकारियों पर दबाव डाल कर बहुत सारे काम करवा सकते हैं | जब भोलाराम की पत्नी नारद मुनि को पेंशन दिला देने को कहती है तो नारद जी कहते हैं कि उनका वहाँ कोई मठ नहीं है | अतः उनका कोई ऐसा राजनीतिक प्रभाव नहीं है जिसका इस्तेमाल कर वो पेंशन पास करा दे |

४) वक्ता को कौन सा कार्य करने के लिए कहा जाता है ?
उत्तर: वक्ता नारद मुनि भोलाराम के जीव को खोजते-खोजते उसके घर पहुँचते हैं | जहाँ भोलाराम की पत्नी उन्हें बताती है कि भोलाराम की मृत्यु गरीबी के कारण हुई है | पाँच वर्ष हो गए किन्तु भोलाराम की पेंशन नहीं मिल पायी है | परिवार के सारे सदस्य भुखमरी से मर रहे हैं | भोलाराम की पत्नी नारद मुनि से प्रार्थना करती है कि वो सिद्ध पुरुष है | कुछ ऐसा करें कि भोलाराम की रुकी हुई पेंशन मिल जाए | उसके बच्चों को भोजन मिल सके |

ङ) “भई यह भी एक मंदिर है | यहाँ भी दान-पुण्य करना पड़ता है; भेंट चढ़ानी पड़ती है |”
१) उक्त संवाद का वक्ता कौन है ?
उत्तर: प्रस्तुत संवाद का वक्ता एक सरकारी कार्यालय का बड़ा साहब है | उस कार्यालय से पेंशन की फाइल पास होती है | नारद मुनि भोलाराम का पेंशन दिलवाने सरकारी कार्यालय गए थे |

२) ‘मंदिर’ शब्द से क्या संकेत किया गया है ?
उत्तर: मंदिर में जब भक्त जाता है, तो वहाँ पूजा पाठ करता है | भगवान को भेंट चढ़ाता है | अपनी इच्छा पूरी कराने के लिए मनौती माँगता है | वर्तमान समय में सरकारी कार्यालयों का भी यही हाल है | यदि हमें अपना काम कराना हो तो, खुशामद करनी पड़ती है, रिश्वत देना पड़ता है | तब जाकर कहीं सरकारी कर्मचारी काम करते हैं | इसलिए वाक्य में सरकारी कार्यालय के लिए मंदिर शब्द का प्रयोग हुआ है |

३) ‘भेंट’ किस लिए माँगी जा रही है ?
उत्तर: यहाँ भेंट का तात्पर्य रिश्वत से है | सरकारी कार्यालय के बड़े साहब नारद मुनि को उदाहरण देकर समझा रहे हैं कि जिस तरह मंदिर में भगवान को भेंट चढ़ाया जाता है| उसी तरह सरकारी कार्यालयों में भी काम कराने के लिए भेंट चढ़ाना पड़ता है | यदि भोलाराम की पेंशन की फाइल पास करानी है तो नारद जी को कुछ न कुछ रिश्वत देनी पड़ेगी | बड़े साहब भोलाराम के परिवार को पेंशन दिलाने के लिए भेंट माँग रहे हैं |

४) वक्ता ने समस्या के समाधान का क्या उपाय बताया ?
उत्तर: वक्ता एक सरकारी कार्यालय के बड़े साहब हैं | वो भोलाराम के पेंशन की फाइल को पास करने के लिए नारद मुनि से रिश्वत लेना चाहते हैं | उन्होंने नारद मुनि से कहा कि पेंशन अगर जल्दी चाहिए तो इसके बदले में उन्हें अपनी वीणा देनी पड़ेगी | उनकी एक पुत्री है जो गाना बजाना सीखती है | उस वीणा से वो जल्दी संगीत सीख जायेगी | इस प्रकार वक्ता ने समस्या के समाधान के लिए रिश्वत देने का उपाय बताया |

च) कौन पुकार रहा है मुझे ?
१) भोलाराम का जीव कहाँ मिला ?
उत्तर: भोलाराम का जीव उसके पेंशन की फाइलों में छुपा हुआ था | वह पेंशन की दरख्वास्तों में अटका था | नारद जी को वो सरकारी दफ्तर में फाइलों के अंदर मिला |

२) भोलाराम स्वर्ग क्यों नहीं जाना चाहता था ?
उत्तर: भोलाराम ने कई वर्षों तक पेंशन पाने के लिए संघर्ष किया | कई दरख्वास्त दिए पर रिश्वत न दे पाने के कारण उसकी पेंशन मंजूर नहीं हुई | मरने के बाद भी उसका मन पेंशन की फाइलों में ही लगा रहा | वह पेंशन की दरख्वास्तों में अटका था इसलिए स्वर्ग नहीं जाना चाहता था |

३) साहब क्यों कुर्सी से डरकर लुढ़क गए ?
उत्तर: भोलाराम ने कई वर्षों तक पेंशन पाने के लिए संघर्ष किया | कई दरख्वास्त दिए पर रिश्वत न दे पाने के कारण उसकी पेंशन मंजूर नहीं हुई | मरने के बाद भी उसका मन पेंशन की फाइलों में ही लगा रहा | इसलिए उसका जीव उन फाइलों में ही जा छिपा था | नारद जी से रिश्वत लेने के बाद साहब ने उस की सौ-डेढ़-सौ दरख्वास्तों से भरी फाइल अपने टेबल पर मँगाई | वहाँ नारद जी ने जैसे ही जोर से भोलाराम का नाम लिया तो सहसा फाइल में से आवाज आयी “कौन पुकार रहा है मुझे ? पोस्टमैन है क्या ? पेंशन का आर्डर आ गया ? ” मरे हुए व्यक्ति की आवाज फाइल में से सुनकर साहब डरकर कुर्सी से लुढ़क गए |

४) सरकारी कार्यालयों में बढ़ते भ्रष्टाचार पर एक अनुच्छेद में अपने विचार लिखिए | (2009)
उत्तर: भारत में सरकारी दफ्तरों में बहुत ज्यादा रिश्वतखोरी चलती है | बिना रिश्वत दिए कोई भी काम कराना लगभग नामुमकिन है | इसी व्यवस्था के कारण सरकार द्वारा बनाई गयी योजनाओं का लाभ गरीबों को नहीं मिलता और वो भूखे मरते हैं | हर काम, हर आवेदन एक फाइल बन कर रह जाती है | वह फाइल इस टेबल से उस टेबल, इस कर्मचारी से उस कर्मचारी तक घुमती रहती है | उन फाइलों का निपटारा तब तक नहीं हो पाता जब तक सरकारी कर्मचारी को रिश्वत न मिले | सरकारी कार्यालयों के इस भ्रष्टाचार तथा निकम्मेपन के कारण देश का लोकतंत्र अन्दर से खोखला हो गया है |

१) नारद जी को सरकारी दफ्तर में हुई परेशानी हमारे देश की कौन सी बुराई की ओर संकेत करती है ?
उत्तर: भ्रष्टाचार हमारे देश में भष्मासुर की तरह फ़ैल गया है | बिना रिश्वत दिए कोई काम नहीं होता | प्रस्तुत पाठ में नारद जी भी बिना रिश्वत दिए भोलाराम की पेंशन की फाइल पास नहीं करा पाए | इस व्यंग्य द्वारा लेखक ने संकेत किया है कि रिश्वत दिए बिना कोई भी शरीफ व्यक्ति सरकारी कार्यालयों से अपना काम नहीं करा सकता | भले मनुष्य के प्राणों का ही सवाल क्यों न हो, पैसे के बिना कोई कार्य नहीं होता | भ्रष्टाचार के दानव ने देश के विकास और देशवासियों के चरित्र, दोनों को निगल लिया है |

२) हमारे पुराणों तथा शास्त्रों के अनुसार धर्मराज कौन सी व्यवस्था संभालते हैं ?
उत्तर: हमारे पुराणों तथा शास्त्रों के अनुसार धर्मराज अथवा यमराज, यमलोक के देवता हैं जहाँ मनुष्य मृत्यु के बाद जाता है | इसलिए उन्हें मृत्यु का देवता भी कहा जाता है | यमलोक में मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार स्वर्ग या नरक भेजा जाता है | यदि मनुष्य ने धरती पर अच्छे कर्म किये हैं तो उसे स्वर्ग भेजा जाता है, यदि उसके कर्म बुरे हैं तो धर्मराज उसे नरक में भेजकर कठोर दंड देते हैं | इस प्रकार मनुष्य के कर्मों के अनुसार उसे फल देने का काम धर्मराज का है |

३) इमारत के ठेकेदारों, इंजीनियरों तथा ओवरसीयरों का नरक जाना क्या संकेत कर रहा है ?
उत्तर: हमारे देश में ठेकेदारों, इंजीनियरों तथा ओवरसीयरों ने मिलकर देश के लिए बननेवाली सडकों, इमारतों तथा दूसरे निर्माण कार्यों में बहुत घोटाले किये हैं | रिश्वत खाकर घटिया दर्जे का कार्य किया जाता है जिससे कई दुर्घटनाएँ हुई हैं तथा अनगिनत लोगों की जान गयी है | इनके बुरे कर्मों के कारण मरने के बाद धर्मराज ने इन्हें नरक भेज दिया | इस प्रकार इमारत के ठेकेदारों, इंजीनियरों तथा ओवरसीयरों का नरक जाना अप्रत्यक्ष रूप से भारत में फैले भ्रष्टाचार पर करारा व्यंग्य है |

3 Comments

  1. Ashutosh January 24, 2017
  2. neha June 27, 2017
  3. Abhay mahato July 5, 2017

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