अरुण यह मधुमय देश हमारा (Arun yah madhumay desh hamara)

कवि: जयशंकर प्रसाद

क) “अरुण यह मधुमय देश हमारा ! ………… मंगल कुंकुम सारा |”
१) अनजान क्षितिज को सहारा मिलने का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: कवि कहते हैं कि भारत में अनजान क्षितिज (धरती और आकाश के मिलने का काल्पनिक स्थान) को भी सहारा मिल जाता है अर्थात यहाँ अनजान, अपरिचित तथा दूर से आए हुए लोगों को भी सहारा मिलता है | भारत देश अनंत काल से ही संसार के लोगों के लिए आश्रय स्थल रहा है | भूतकाल में अनेक देशों और धर्मों के लोगों को विभिन्न कारणों से अपनी मातृभूमि छोड़नी पड़ी | उन्हें पूरे संसार में कहीं स्थान नहीं मिला किन्तु भारत भूमि ने उन्हें अपनाया | भारत का इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है |

२) पेड़ों की शाखाएँ (तरु-शिखा) नाचती हुई कब प्रतीत होती हैं ?
उत्तर: प्रातःकाल होते ही सूर्य का प्रकाश पेड़ों की शाखाओं पर पड़ता है | वहाँ से छन-छनकर वह चारों तरफ फ़ैलने लगता है | उस समय सूर्य का प्रकाश लाल होता है व वह पेड़ को हर तरफ से घेर लेता है | उसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि पेड़ की शाखाएँ कमल के फूल के बीच प्रसन्न होकर नाच रही हैं |

३) पद्य खंड में “मंगल-कुंकुम” शब्द का प्रयोग किसके लिए हुआ है ?
उत्तर: पद्य खंड में मंगल-कुंकुम शब्द का प्रयोग सूर्य की लाल किरणों के लिए हुआ है | सुबह-सुबह जब सूर्य का प्रकाश फैलता है तो उसकी किरणें पेड़ों से छन-छन कर धरती पर पहुँचती हैं | धरती की हरियाली पर जब सूर्य की ये लाल किरणें बिखरती हैं तो ऐसा लगता है जैसे किसी ने पूरी धरती पर कुंकुम बिखेर दिया हो |

४) प्रस्तुत कविता कौन गा रहा है और किस भाव से ओत-प्रोत होकर गा रहा है ?
उत्तर: प्रस्तुत कविता सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य की पत्नी कार्नेलिया गा रही है | वह एक यूनानी है किंतु विवाह के पश्चात उसे भारत आना पड़ा | भारत की प्राकृतिक शोभा और संस्कृति से वह अत्यधिक प्रभावित हो जाती है | देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत होकर वह यह कविता गा रही है | छायावादी शैली में रचित इस गीत में देश-प्रेम की मार्मिक अभिव्यक्ति हुई है |

ख) “लघु सुरधनु-से पंख पसारे …………………………….. पाकर जहाँ किनारा |”
१) प्रस्तुत कविता किस रचना से ली गयी है ? कवि का परिचय दो |
उत्तर : प्रस्तुत कविता श्री जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित ‘चन्द्रगुप्त’ नामक नाटक से ली गयी है | इसके कवि जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि, नाटककार, कहानीकार, उपन्यासकार और निबंधकार हैं | इनके नाटकों और कविताओं को बहुत लोकप्रियता मिली है | उनकी रचना कामायनी को आधुनिक काल का सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य माना जाता है |

२) खगों के भारत को प्यारा नीड़ समझने का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: सदियों से हमारा देश विदेशियों के लिए आश्रय स्थल रहा है | जिनको संसार में कहीं आश्रय नहीं मिला, भारत भूमि ने उन्हें आश्रय दिया | अनेक धर्मों और देशों के लोग भारत में आए और यहाँ घुल-मिल गए | यहाँ खगों से तात्पर्य विदेशियों से है, जिन्हें हमेशा भारत भूमि पर विश्वास होता है कि उन्हें संसार में कहीं रहने का स्थान मिले न मिले, भारत में जरूर मिलेगा | इसलिए वे भारत को अपना प्यारा नीड़ समझते हैं |

३) बरसाती आँखों के बादल क्या बन जाते हैं ?
उत्तर: कवि कह रहे हैं कि बरसाती आँखों के बादल करुणा से भरे जल में बदल जाते हैं | भारत के वर्षा ऋतु के बादल ऐसे बरसते हैं मानो उनमें से करुणा का जल बरस रहा हो, अर्थात भारतवासियों के ह्रदय में दया तथा करुणा के गुण हैं | वे दूसरों के कष्ट नहीं देख सकते | दूसरों के दुःख देखकर उनकी आँखें इस तरह आँसुओं से भर जाती हैं, जैसे वर्षा ऋतु में बादल पानी से भरे होते हैं | भारतीय संस्कृति में करुणा के महत्व को प्रतिपादित करते हुए कवि ने उक्त पंक्तियाँ लिखी हैं |

४) अनंत लहरों के किनारा पाने का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: यहाँ अनंत लहरों का प्रयोग करके कवि समुद्र की ओर संकेत कर रहे हैं | भारत का समुद्र तट बहुत बड़ा है | अरब सागर, हिन्द महासागर तथा बंगाल की खाड़ी इन तीनों की सीमा भारत के तट पर समाप्त हो जाती है | इसलिए कवि लिखते हैं कि इस अनंत दिखाई देने वाले समुद्र को भी भारत में आकर किनारा मिल जाता है |

ग) हेम-कुम्भ ले उषा सवेरे ……………………………. अरुण यह मधुमय देश हमारा |
१) उषा किस तरह कवि के सुख को बढ़ा रही है ?
उत्तर: सुबह का वातावरण बड़ा मनमोहक होता है | चारों ओर सूर्य की सुनहरी किरणें फैली हुई होती हैं | ऐसा लगता है जैसे उषा रूपी सुंदरी हेम-कुम्भ अर्थात सोने का घड़ा (सूर्य) लेकर निकली हो जिसमें से वह सभी पर सुखों की वर्षा कर रही है | प्रातः काल का यह वातावरण कवि का सुख बढ़ा रहा है |

२) हेम-कुम्भ से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर: यहाँ हेम-कुम्भ शब्द सूर्य के लिए प्रयोग किया गया है | प्रातः काल में चारों तरह सूर्य की सुनहरी किरणें फैली हुई होती है | धरती पर फैली यह किरणें मनुष्य को बहुत सुखमय लगती है | इसलिए कवि को ऐसा आभास होता है जैसे उषा हेम-कुम्भ अर्थात सोने के घड़े (सूर्य) को लेकर धरती पर सुखों की वर्षा कर रही है |

३) तारों के ऊँघने का क्या अर्थ है ?
उत्तर: सुबह होते ही चारों तरफ सूर्य की किरणें फ़ैलने लगती हैं | रात भर टिमटिमाने के बाद तारे सूर्य के इस बढ़ते प्रकाश में धुँधले पड़ने लगते हैं | कवि इसे ही काव्यात्मक रूप देते हुए लिखते हैं कि तारें रात भर जागे हैं | अब उन्हें इतनी नींद आ रही है कि वह किसी नशा किये हुए व्यक्ति की तरह ऊँघ रहे हैं | यहाँ तारों के धुँधला पड़ने को कवि ने ऊँघना कहा है |

४) कवि भारत देश को मधुमय क्यों कह रहा है ?
उत्तर: मधुमय का अर्थ होता है मिठास से भरा हुआ | हमारा देश भारत भी मधुर और सुंदर है | यहाँ के लोग सभी को अपना लेते हैं, चाहे वे संसार के किसी भी कोने से हों | सभी निराश्रितों को यहाँ आश्रय मिलता है | भारत के लोग दया और करुणा के सागर हैं | भारत आकार में विशाल, धन-धान्य से संपन्न और प्राकृतिक सुंदरता में अद्वितीय है | यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य मनुष्य जीवन को सुखमय बना देता है | इन सभी कारणों से कवि भारत देश को मधुमय कह रहा है |

कविता का केंद्रीय भाव :
‘अरुण, यह मधुमय देश हमारा’ देशप्रेम की भावना से ओत प्रोत कविता है | इसके कवि श्री जयशंकर प्रसाद ने एक विदेशी राजकुमारी द्वारा भारत की महानता तथा प्राकृतिक सौंदर्य का गुणगान कराया है |
सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य की पत्नी कार्नेलिया जो एक यूनानी है, वह भारतीयों की विश्व बंधुत्व की भावना से प्रभावित होकर लिख रही है कि भारत देश संसार के प्रत्येक मनुष्य का आश्रय स्थल है | जिन्हें कहीं स्थान न मिले, उनका भी यहाँ ह्रदय खोलकर स्वागत होता है | भारतवासी दयालु हैं व उनमें करुणा का भाव है | भारत की प्राकृतिक सुंदरता अद्वितीय है | यहाँ का मौसम मनुष्य को सुख देने वाला है | कार्नेलिया भारत देश को मधुमय अर्थात मिठास से भरा हुआ कहती है |

अतिरिक्त प्रश्न
१) भारत ने हमेशा अपनी शरण में आनेवालों को स्थान दिया है | इसपर अपने विचार लिखिए |
उत्तर: इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पड़ा है जब लोगों को प्रतिकूल परिस्थितिओं के कारण अपना देश छोड़ना पड़ा | पूरे संसार में उन्हें कहीं स्थान नहीं मिला किन्तु भारत की भूमि ने उन्हें अपनाया | चाहे पारसी हो या यहूदी, एक बार भारत की शरण में आने के बाद यह देश उनका उतना ही हो गया जितनी उनकी जन्मभूमि थी | अनेक धर्मों के लोग भारत आए, भारत में फले-फूले तथा अब वो भारत के नागरिक बन चुके हैं | हमारे देश में वो इस तरह घुल-मिल चुके हैं कि कोई अब बता ही नहीं सकता कि उनके पूर्वज किसी और देश से थे | इस प्रकार शरण आनेवालों को स्थान देना हमारे देश की महान संस्कृति का हिस्सा है |

२) कार्नेलिया कौन थी ? उसका भारत में आगमन कैसे हुआ था ?
उत्तर: कार्नेलिया सम्राट सेल्यूकस निकेटर की पुत्री थी | सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य से युद्ध में परास्त होने के बाद सेल्यूकस निकेटर ने उनसे मित्रता की संधि कर ली व अपनी पुत्री कार्नेलिया का विवाह उनसे करा दिया | इस प्रकार मौर्य वंश की रानी बनकर कार्नेलिया का भारत आगमन हुआ |

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