अकेली (Akeli)

लेखक: मन्नू भंडारी

(क) “क्या हो गया बुआ, …………………………………………… ने कुछ कह दिया क्या ?”
१) उक्त संवाद किसने और किससे कहा ?
उत्तर: सोमा बुआ आँगन में बैठकर, धूप में पास रखी कटोरी से तेल लेकर हाथों में मल रही थी और साथ में कुछ बड़बड़ा रही थी | उन्हें बड़बड़ाता देखकर पड़ोस में रहने वाली राधा भाभी ने उपरोक्त वाक्य बुआ से कहा |

२) संवाद की पृष्ठभूमि क्या है ?
उत्तर: सोमा बुआ मोहल्ले में रहनेवाले किशोरीलाल के पुत्र के मुंडन समारोह में बिना बुलाये ही चली गयी थी | इससे उनके पति बहुत नाराज हो गए थे और उन्होंने सोमा बुआ को बहुत बुरा-भला कहा | इसलिए सोमा बुआ आँगन में बैठकर, धूप में पास रखी कटोरी से तेल लेकर हाथों में मल रही थी और साथ में कुछ बड़बड़ा रही थी | उन्हें बड़बड़ाता देखकर पड़ोस में रहने वाली राधा भाभी ने उनसे बड़बड़ाने का कारण पूछा |

३) संन्यासी जी का परिचय दीजिये |
उत्तर: संन्यासीजी सोमा बुआ के पति हैं | अपने इकलौते पुत्र हरखू की मृत्यु का उन्हें ऐसा सदमा लगा कि उन्होंने पत्नी, घर-बार सब त्याग दिया और संन्यास ग्रहण कर लिया | उनके वर्ष के ग्यारह महीने हरिद्वार में और सिर्फ एक महीना अपने घर में बीतता था | इस एक महीने वो बुआ से दो मीठे बोल भी नहीं बोलते | इसके बजाय उन्हें अलग-अलग कारणों से दिन भर डाँटते रहते थे |

४) संन्यासी जी के आने के कारण बुआ के दैनिक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: संन्यासी जी के आने के बाद बुआ के दैनिक जीवनचर्या में बाधा आने लगती है | जो ग्यारह महीने संन्यासी जी नहीं होते, बुआ पास-पड़ोस वालों के भरोसे जीवन काट लेती | किसी के घर कोई भी कार्यक्रम हो, बुआ वहाँ जाकर मन लगाकर कार्य करती | संन्यासी जी को यह सब पसंद नहीं था | वो आते ही बुआ पर रोक लगाना शुरू कर देते | बुआ का दूसरों से मिलना-जुलना या बाहर घूमना-फिरना बिलकुल बंद हो जाता है |

(ख) इन्हें तो नाते-रिश्तेवालों से कुछ लेना-देना नहीं, पर मुझे तो सबसे निभाना पड़ता है |
१) सोमा बुआ के पति ने उन्हें भला बुरा क्यों कहा था ?
उत्तर: सोमा बुआ बिना बुलाये ही किशोरीलाल के बेटे के मुंडन कार्यक्रम में पहुँच गई थी और वहाँ जी तोड़ के काम किया | उनके पति को जब यह बात पता चली तो वो बहुत नाराज हुए | उन्हें सोमा बुआ का बिना बुलाये दूसरे के कार्यक्रम में जाना बिलकुल अच्छा नहीं लगा इसलिए उन्होंने सोमा बुआ को भला-बुरा कहा |

२) सोमा बुआ अपने पति की शिकायत क्यों कर रही थी ?
उत्तर: सोमा बुआ के पति ने पुत्र की मृत्यु के दुःख में संन्यास ले लिया था | वे ग्यारह महीने हरिद्वार में रहते, सिर्फ एक महीने के लिए घर आते | इस एक महीने वो सोमा बुआ पर कड़ा नियंत्रण लगाते | बुआ की छोटी-मोटी गलती पर उन्हें डाँटते | बुआ का कहीं आना-जाना भी उन्हें पसंद न था | वो संन्यास लेकर सारा धर्म-कर्म खुद करते और बुआ को अकेले छोड़ दिया था | इन सब कारणों से सोमा बुआ अपने पति की शिकायत कर रही थी |

३) सोमा बुआ ने किशोरीलाल की लाज किस तरह रखी ?
उत्तर: किशोरीलाल ने अपने बेटे के मुंडन पर पूरी बिरादरी को न्योता दिया था, किन्तु घर में एक भी काम ठीक से नहीं हो रहा था | गीतवाली औरतें मुंडन पर विवाह का गीत गा रहीं थी | समोसे कच्चे उतार दिए गए थे और इतने बना दिए गए थे कि पूरी पंगत को दो बार खिला सको | गुलाब जामुन इतने कम कि एक पंगत को भी पूरा नहीं पड़े | सोमा बुआ ने तुरंत मैदा सानकर गुलाब जामुन बनवायें | उन्होनें रसोई व भण्डार घर की जिम्मेदारी लेते हुए बाकी सब चीजों को भी ठीक किया | | इस प्रकार सोमा बुआ ने किशोरीलाल की लाज रखी ली |

४) सोमा बुआ बिना बुलाये भी किशोरीलाल के यहाँ जाने को सही क्यों मानती थी ?
उत्तर: सोमा बुआ को लगा कि मुंडन के हंगामे के कारण किशोरीलाल उन्हें बुलाना भूल गया | वो उसे घर का व्यक्ति मानती थी | बुआ को लगता था कि किशोरीलाल के घरवाले उसे माँ की तरह समझते हैं, इसलिए वो बिना बुलाये उसके कार्यक्रम में जाना गलत नहीं समझती थी | किशोरीलाल ने जिस तरह पूरी रसोई तथा भंडारघर की जिम्मेदारी बुआ को सौंप दी थी उससे भी बुआ को भरोसा हो गया कि उनका बिना बुलाये जाना सही था |
ग) “अरे वाह बुआ ! तुम्हारा नाम कैसे नहीं हो सकता ! तुम तो समधिन ठहरीं | संबंध में न रहे कोई रिश्ता थोड़े ही टूट जाता है |”
१) यहाँ वक्ता और श्रोता कौन है ?
उत्तर: यहाँ वक्ता सोमा बुआ के पड़ोस के घर की बड़ी बहू है तथा श्रोता स्वयं सोमा बुआ है | सोमा बुआ के देवर के ससुरालवालों की किसी लड़की का विवाह होने जा रहा है | उस विवाह का निमंत्रण सोमा बुआ को मिलेगा या नहीं, इस विषय पर चर्चा हो रही है |

२) उक्त संवाद के पीछे क्या कारण है ?
उत्तर: सोमा बुआ के मृत देवर के ससुराल वालों की किसी लड़की का विवाह, बुआ के शहर में रहनेवाले एक संपन्न व्यक्ति भागीरथ के पुत्र से होने जा रहा है | वे इसी शहर में विवाह करने जा रहे हैं | बहुत लंबे समय से बुआ के परिवार का उन लोगों से कोई संबंध नहीं रहा है | इसलिए बुआ सोच रही थी कि उसे बुलाया जायेगा या नहीं |

३) बुआ की चिंता क्या है ?
उत्तर: बुआ के देवर का देहांत हो गया है | देहांत के बाद देवर के ससुराल वालों से सारा रिश्ता-नाता टूट गया है | बुआ के पति ने भी उन लोगों से कोई संबंध बना के नहीं रखा | इन सब बातों को २५ वर्ष हो चुके हैं | बुआ को चिंता है कि देवर के ससुराल वाले इतने लंबे समय से ठंडे पड़े रिश्ते को स्मरण करेंगे या नहीं, विवाह में बुआ को निमंत्रित करेंगे या नहीं ?

४) समधिन कौन है और किस प्रकार है ? समधी के घर क्या आयोजन हो रहा है ?
उत्तर: यहाँ समधिन सोमा बुआ है क्योंकि लड़की पक्ष के परिवार में उनके देवर का विवाह हुआ था | उनके समधी के घर की किसी लड़की का विवाह उनके ही शहर के एक संपन्न व्यक्ति भागीरथ के यहाँ होने जा रहा है | शादी में सारी बिरादरी को दावत दी जा रही है |

घ) “तू तो बाजार जाती है राधा, इसे बेच देना और जो कुछ ठीक समझे खरीद लेना |”

१) बुआ किस वस्तु को बेचने की बात कर रही है ?
उत्तर: बुआ के पास अपने मृत पुत्र की आखरी निशानी के तौर पर एक अँगूठी रह गई थी | इस अँगूठी को उन्होंने बहुत कठिन परिस्थितियों में भी नहीं बेचा था | सोमा बुआ राधा को वही अँगूठी बेचने को कह रही है |

२) बुआ अँगूठी क्यों बेच रही थी ?
उत्तर: बुआ के देवर के ससुरालवालों की किसी लड़की का विवाह है | वे संपन्न लोग हैं | बुआ को उम्मीद है कि उसे बुलावा जरूर आयेगा | इसलिए वो विवाह में कुछ भेंट लेकर जाना चाहती है | भेंट खरीदने के लिए उनके पास पैसों की कमी है, इसलिए उन्होंने अँगूठी बेचने का निश्चय किया |

३) विवाह में जाने के लिए सोमा बुआ ने क्या-क्या तैयारियाँ की है ?
उत्तर: सोमा बुआ एक दिन पहले से ही विवाह में जाने की तैयारी कर रही थी | उन्होंने अपने लिए लाल-हरी रंग की चूड़ियाँ खरीदी | अपनी सफ़ेद साड़ी को उन्होंने पीले रंग से रंगा, फिर उसमें चमक आने के लिए मांड लगाकर सुखाया | शादी में भेंट देने के लिए राधा भाभी से कहकर एक चाँदी की एक सिंदूरदानी, एक साड़ी और एक ब्लाउज का कपड़ा खरीदा | बुआ थाली में साड़ी, सिंदूरदानी, नारियल और थोड़े से बताशे सजाकर अपने बुलावे का इंतज़ार कर रही है |

४) बुआ का अँगूठी बेचने का दुःख क्यों जाता रहा ?
उत्तर: सोमा बुआ के देवर के ससुरालवालों की लड़की का विवाह है | सोमा बुआ को पूरी उम्मीद है कि उन्हें भी न्योता जरूर मिलेगा | वो विवाह में कुछ भेंट ले जाना चाहती है पर उनके पास पैसे नहीं हैं | इसलिए उन्होंने अपने मृत पुत्र की इकलौती निशानी – उसकी अँगूठी पड़ोस की राधा को देकर कहा कि उसे बेचकर कुछ भेंट ले आए |
राधा भाभी उस अँगूठी को बेचकर चाँदी की एक सिंदूरदानी, एक साड़ी और एक ब्लाउज का कपड़ा खरीद ले आती है | बुआ मन ही मन सोचती है ये सब चीजें देखकर उनकी समधिन पुरानी बातों की दुहाई देकर उनकी मिलनसारिता की कितनी प्रशंसा करेंगी | यह सोचकर बुआ के मन से अँगूठी बेचने का दुःख जाता रहा |

ङ) “क्यों राधा, तू तो रंगी साड़ी पहनती है तो बड़ी आब रहती है, चमक रहती है, इसमें तो चमक आई नहीं |”
१) वक्ता का परिचय दीजिये |
उत्तर: उपर्युक्त कथन की वक्ता सोमा बुआ है | उसके पुत्र का देहांत हो चुका है | उस दुःख में उसके पति ने संन्यास ले लिया है | वह अपनी पड़ोसन राधा से साड़ी में चमक लाने का तरीका पूछ रही है |

२) साड़ी किस आयोजन पर जाने के लिए तैयार की जा रही है ?
उत्तर: सोमा बुआ के मृत देवर के ससुरालवालों की लड़की का विवाह होने जा रहा है | पच्चीस वर्षों से सोमा बुआ का उनके परिवार से कोई संबंध नहीं रहा है फिर भी उन्हें उम्मीद है कि उन्हें विवाह का निमंत्रण जरूर मिलेगा | इसलिए वो साड़ी तैयार कर रहीं थीं |

३) श्रोता साड़ी में चमक लाने का क्या तरीका बताती है ?
उत्तर: सोमा बुआ ने साड़ी को पीले रंग से रंगा था किंतु उनकी साड़ी में वो चमक नहीं आई जो श्रोता की रंगी हुई साड़ी में आती है | इसलिए सोमा बुआ ने उनसे चमक न आने का कारण पूछा | इसपर श्रोता ने बताया कि बुआ ने साड़ी पर कलफ़ नहीं लगाया इसलिए चमक नहीं आयी | इस समय भी बुआ अगर थोड़ा सा मांड दे दे तो साड़ी में चमक आ जायेगी |

४) बुलावा आने के विषय में बुआ क्या उत्तर देती है ?
उत्तर: सोमा बुआ को शादी के दिन तक भी बुलावा नहीं आया था | जब राधा उनसे बुलावे के विषय में पूछती है तो वो कहती है दिन में पाँच बजे का मुहूर्त है | ये नये फैशनवाले ऐन मौके पर ही बुलावा भेजते हैं | दिन में कभी भी बुलावा आ सकता है |

च) “बुआ ! सर्दी में खड़ी-खड़ी ……………………………………… क्या, सात तो बज गए |”
१) बुआ ने अब तक खाना क्यों नहीं बनाया था ?
उत्तर: बुआ को उम्मीद थी कि उन्हें अपने समधी के घर से विवाह में शामिल होने का न्योता आएगा | वो वहाँ जाने के लिए पूरी तैयारी कर के बैठी थी | उसी के इंतज़ार में उन्हें समय का ख्याल नहीं रहा और पूरी शाम बीत गयी | इस वजह से बुआ ने खाना नहीं बनाया था |

२) बुआ अनमने भाव से छत पर क्यों घूम रही थी ?
उत्तर: बुआ के देवर के ससुराल वालों के घर की किसी लड़की का विवाह था | बुआ को पूरी उम्मीद थी कि शादी में उन्हें भी बुलाया जाएगा | सोमा बुआ विवाह में शामिल होने की पूरी तैयारी कर के बैठी थी | विवाह का मुहूर्त पाँच बजे का था और दोपहर के तीन बज गए थे किन्तु बुआ को उनके समधिओं की तरफ से कोई बुलावा नहीं आया था | इसलिए वो अनमने भाव से छत पर घूम रही थी |

३) गली में किसी को घुसते देख बुआ का चेहरा क्यों चमक उठता ?
उत्तर: बुआ को उम्मीद थी कि उसके देवर के ससुराल वाले, उनके घर के विवाह में बुआ को जरूर आमंत्रित करेंगे | बुआ ने विवाह में शामिल होने का पूरा इंतजाम भी कर लिया था | विवाह का मुहूर्त शाम पाँच बजे का था | पाँच बजने को आए थे फिर भी बुआ को न्योता नहीं मिला था | बुआ गली की तरफ नजर लगा के बैठी थी कि कोई उन्हें बुलाने जरूर आएगा | इसलिए जब भी कोई गली में घुसता, उनकी उम्मीद बढ़ जाती कि शायद कोई उनका न्योता लेकर आया हो और उनका चेहरा चमक उठता |

४) विवाह का न्योता न मिलने पर सोमा बुआ ने क्या किया ?
उत्तर: विवाह का मुहूर्त पाँच बजे का था | शाम के ७ बजे तक जब उन्हें न्योता न आया तो बुआ समझ गयी कि उन्हें शादी में नहीं बुलाया गया है | उन्होंने सूखी हुई साड़ी को अच्छी तरह से तह किया, धीरे-धीरे हाथों की चूड़ियाँ खोलीं, थाली में विवाह के लिए सजाया सारा सामान उठाया और सारी चीजें बड़े जतन से अपने एकमात्र संदूक में रख दिया | इसके बाद वो बुझे हुए मन से भोजन बनाने के लिए अँगीठी जलाने लगी |

प्र.२ सोमा बुआ की सार्वजनिक जीवन में शामिल होने की व्याकुलता क्या दर्शाती है ?
उत्तर: बुआ का कोई पारिवारिक जीवन नहीं था | उनके पुत्र की मृत्यु हो चुकी थी तथा पति ने संन्यास ले लिया था | पति मुश्किल से वर्ष में एक माह के लिए घर आते, किंतु उनके व्यवहार में बुआ के प्रति कोई प्रेम नहीं था | बुआ अपने इस पारिवारिक जीवन की कमी अपने सामाजिक जीवन के द्वारा पूरी करना चाहती थी | वो चाहती थी कि लोग उन्हें अपने घर के विवाह, जन्मदिन जैसे कार्यक्रमों में बुलाये | लोग उनसे घुले–मिले | कई बार तो वो बिना बुलाये ही लोगों के कार्यक्रमों में शामिल होने चली जाती व पूरे मन से उनके लिए काम करती | जब उनके देवर के ससुरालवालों ने अपनी लड़की का विवाह बुआ के शहर में तय किया तो बुआ को बड़ी उम्मीद थी कि उन्हें विवाह में आमंत्रित किया जाएगा | विवाह में शामिल होने का उतावलापन बुआ द्वारा अपने अकेलेपन को दूर करने की एक कोशिश थी |

प्र.३ पुत्र की मृत्यु के बाद निराश होकर संन्यास लेने के सोमा बुआ के पति के फैसले को क्या आप सही मानते हैं ? कारण सहित बताइए |
उत्तर: हमारी संस्कृति के अनुसार जब मनुष्य के मन में संसार के प्रति वैराग्य हो, उसके मन में कोई इच्छा बाकी न रहे तब उसके लिए संन्यास लेने का विधान है | जीवन से थक हारकर, दुःखी होकर संन्यास लेना अर्थहीन है | सोमा बुआ के पति ने भी पुत्र की मृत्यु से दुःखी होकर संन्यास लिया था | ऐसे दुःखी व्यक्ति का मन संन्यास जीवन के नियमों का पालन नहीं कर सकता | उनके मन में संसार के प्रति वैराग्य नहीं था | इसलिए मेरा मानना है कि उनका संन्यास लेने का फैसला गलत था |

प्र.४ सोमा बुआ बिना बुलाये दूसरे के कार्यक्रमों में भाग लेने चली जाती थी | वर्तमान समय में इस प्रकार के व्यवहार को सही माना जा सकता है क्या ?
उत्तर: यह कहानी आज से कई दशकों पहले लिखी गयी थी | तब भारतीय समाज एक दूसरे के काफी करीब हुआ करता था | लोग में मेलजोल आज से कहीं ज्यादा था | सोमा बुआ का बिना बुलाये अपने परिचित लोगों के कार्यक्रमों में जाना उस समय उतना बुरा नहीं होता होगा, पर आज के समय में यह बिलकुल संभव नहीं है | आज मेजबान व्यक्ति इस बात को बिलकुल पसंद नहीं करता कि बिना बुलाये कोई उसके कार्यक्रम में भाग ले | कोई ऐसा करता है तो झगड़े से लेकर पुलिस से शिकायत तक की नौबत आ जाती है | इसलिए वर्तमान समय में कोई बिना बुलाये किसी के कार्यक्रम में जाता है तो उसे बिलकुल गलत माना जाएगा |

प्र.५ प्रस्तुत कहानी किस प्रकार की कहानी है ? सोमा बुआ जैसे स्त्रियों को समाज में किस प्रकार के कष्ट झेलने पड़ते हैं ? अपने विचार दीजिये | (ICSE 2010)
उत्तर: प्रस्तुत कहानी एक अकेली स्त्री की मानसिक वेदना का मर्मस्पर्शी चित्रण है | सोमा बुआ के पति संन्यास ले चुके हैं | उनके परिवार में अब कोई नहीं है | इसलिए वो अब अकेली हैं | हमारे समाज में सोमा बुआ की तरह ऐसी कई अनगिनत स्त्रियाँ हैं, जिनका कोई परिवार नहीं है | वे अपना जीवन अकेले काटने को मजबूर है | हमारा समाज पुरुषप्रधान होने के कारण कोई इन स्त्रियों को महत्व नहीं देता | वो एक तरह से सामाजिक बहिष्कार का शिकार हो जाती हैं | लोग उनसे मिलना-जुलना पसंद नहीं करते | किसी भी पारिवारिक या सामाजिक कार्यक्रम में शायद ही कभी उन्हें आमंत्रित किया जाता है | समाज में अपना एक अलग और सम्मानजनक स्थान पाने के लिए उन्हें बहुत कठिन संघर्ष करना पड़ता है |

प्र.५ “यों तो मैं कहीं ———————————————– घर सौंप दे ?” (ICSE 2015)
१) किसे, किसका कहीं भी आना-जाना पसंद नहीं है तथा क्यों ?
उत्तर: संन्यासीजी सोमा बुआ के पति हैं | उन्हें सोमा बुआ का कहीं आना-जाना पसंद नहीं है | सोमा बुआ बिना बुलाये ही दूसरों के कार्यक्रमों में शामिल होने चले जाया करती थी व वहाँ छाती फाड़कर काम किया करती थी | इसलिए संन्यासीजी ने बुआ को कई बार फटकार लगाई है |

२) सोमा बुआ किशोरीलाल के घर किस आयोजन पर बिना निमंत्रण के ही चली गयी थीं ? वहाँ उन्होंने किस प्रकार की व्यवस्था देखी ?
उत्तर: किशोरीलाल के बेटे का मुंडन था | उन्होंने पूरी बिरादरी को न्योता दिया था किन्तु सोमा बुआ को नहीं | बुआ को लगा कि मुंडन के हंगामे के कारण किशोरीलाल उन्हें बुलाना भूल गया है | वो उसे घर का व्यक्ति मानती थी, इसलिए बिना बुलाये उसके कार्यक्रम में चली गयी | वहाँ जाकर उन्होंने देखा कि घर में एक भी काम ठीक से नहीं हो रहा था | गीतवाली औरतें मुंडन पर विवाह का गीत गा रहीं थी | समोसे कच्चे उतार दिए गए थे और इतने बना दिए गए थे कि पूरी पंगत को दो बार खिला सको | गुलाब जामुन इतने कम कि एक पंगत को भी पूरा नहीं पड़े | इस तरह कार्यक्रम की तैयारी बिलकुल खराब थी |

३) बुलावा न आने पर भी सोमा बुआ ने किशोरीलाल के यहाँ क्या किया तथा वहाँ जाने का क्या तर्क दिया ? आप इस तर्क से कहाँ तक सहमत हैं ? अपने विचार दीजिये |
उत्तर: सोमा बुआ को लगा कि मुंडन के हंगामे के कारण किशोरीलाल उन्हें बुलाना भूल गया | वो उसे घर का व्यक्ति मानती थी | बुआ को लगता था कि किशोरीलाल के घरवाले उसे माँ की तरह समझते हैं, इसलिए वो बिना बुलाये उसके कार्यक्रम में चली गई | वहाँ जाकर उन्होंने देखा कि घर में एक भी काम ठीक से नहीं हो रहा था | गीतवाली औरतें मुंडन पर विवाह का गीत गा रहीं थी | समोसे कच्चे उतार दिए गए थे और इतने बना दिए गए थे कि पूरी पंगत को दो बार खिला सको | गुलाब जामुन इतने कम कि एक पंगत को भी पूरा नहीं पड़े | सोमा बुआ ने तुरंत मैदा सानकर गुलाब जामुन बनवायें | उन्होनें रसोई व भण्डार घर की जिम्मेदारी लेते हुए बाकी सब चीजों को भी ठीक किया | | इस प्रकार सोमा बुआ ने किशोरीलाल की लाज रख ली | किशोरीलाल ने भी जिस तरह पूरी रसोई तथा भंडारघर की जिम्मेदारी बुआ को सौंप दी थी उससे भी बुआ को भरोसा हो गया कि उनका बिना बुलाये जाना सही था |
मैं सोमा बुआ के तर्क से बिलकुल सहमत नहीं हूँ | बिना बुलाये किसी के कार्यक्रम में जाने से कई अप्रिय परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं | मेजबान कैसा व्यवहार करेगा इसका अंदाजा लगाना मुश्किल होता है तथा यह अशिष्टता भी है | अतः मेरा मत है कि सोमा बुआ को बिना बुलाये किशोरीलाल के घर नहीं जाना चाहिए था |

४) “अकेलापन जीवन का सबसे बड़ा अभिशाप है |” इस कहानी की घटनाओं के आधार पर स्पष्ट कीजिये |
उत्तर: सोमा बुआ का कोई पारिवारिक जीवन नहीं था | उनके पुत्र की मृत्यु हो चुकी थी तथा पति ने संन्यास ले लिया था | पति मुश्किल से वर्ष में एक माह के लिए घर आते, किंतु उनके व्यवहार में बुआ के प्रति कोई प्रेम नहीं था | बुआ अपने जीवन में अकेली हैं | उनके जीवन में कोई ऐसा नहीं था जो उनके साथ स्नेह का व्यवहार करे | बुआ अपने इस पारिवारिक जीवन की कमी अपने सामाजिक जीवन के द्वारा पूरी करना चाहती थी | वो चाहती थी कि लोग उन्हें अपने घर के विवाह, जन्मदिन जैसे कार्यक्रमों में बुलाये | लोग उनसे घुले–मिले | हमारा समाज ऐसा है कि सामाजिक संबंध मुख्यतः पुरुषों द्वारा ही बनाये जाते हैं | सोमा बुआ के पति हैं किन्तु उन्होंने संन्यास ले लिया है | अतः किसी से लेना-देना नहीं रखते | इस कारण सोमा बुआ के सामजिक संबंध भी लगभग समाप्त हो गए हैं | उन्हें कोई किसी भी कार्यक्रम में नहीं बुलाता | चाहे विवाह हो या मुंडन | कई बार वो बिना बुलाए ही चली जाती थीं | इस कारण कई बार उन्हें अपने पती से बहुत बार बुरा-भला सुनने मिलता | जब उनके देवर के ससुरालवालों ने अपनी लड़की का विवाह बुआ के शहर में तय किया तो बुआ को बड़ी उम्मीद थी कि उन्हें विवाह में आमंत्रित किया जाएगा | विवाह में शामिल होने के लिए उनके मन में बहुत उतावलापन था | उन्होंने विवाह में शामिल होने की तैयारी भी कर रखी थी किंतु उन्हें न्योता भेजा ही नहीं गया | इस प्रकार बुआ की स्थिति समाज से बहिष्कृत व्यक्ति की तरह हो गयी है | उनका अकेलापन उनके जीवन का सबसे बड़ा अभिशाप बन गया है |

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